September Equinox: क्या आपको आज का दिन कुछ अलग महसूस हुआ? आप शायद सोचेंगे कि दिन तो बुधवार है. वही सुबह हुई, वैसी ही धूप निकली. दिन के बाद दोपहर और फिर शाम होगी और रात ढल जाएगी. हां, बिल्कुल ऐसा ही हुआ लेकिन कहानी में जरा सा ट्विस्ट है क्योंकि तारीख 23 सितंबर की है. नहीं समझ पाएं हों तो जान लीजिए कि धरती पर मौसम के बदलने और खगोलीय घटनाओं में रुचि रखने वालों के लिए आज 23 सितंबर का दिन बेहद खास है.
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के खगोलीय कैलकुलेशन आंकलन के अनुसार 23 सितंबर 2026 को भारतीय समयानुसार सुबह 5 बजकर 35 मिनट पर सितंबर इक्विनॉक्स (Equinox) की घटना हुई. इस दौरान दुनिया के अधिकांश हिस्सों में दिन और रात का समय लगभग बराबर महसूस होगा. मतलब 50 प्रतिशत दिन और 50 प्रतिशत रात का समय. लेकिन क्या इसका मतलब यह है कि दुनिया के हर कोने में ठीक 12 घंटे का दिन और 12 घंटे की रात होगी? विज्ञान के नजरिए से देखें तो इसका जवाब कुछ अलग ही निकलेगा.
आखिर क्या होता है इक्विनॉक्स?
Equinox शब्द पर गौर करें तो ये लैटिन भाषा के Aequus मतलब बराबर और Nox यानी रात से मिलकर बना है. यह सामान्य जानकारी की बात है कि धरती अपनी धुरी पर लगभग 23.5 डिग्री झुकी हुई है. अपनी कक्षा में सूर्य की परिक्रमा करते हुए एक साल में दो बार ऐसी स्थिति आती है, जब धरती का कोई भी गोलार्ध सूर्य की तरफ अधिक झुका हुआ नहीं होता है. जब सूर्य का केंद्र सीधे धरती की तरफ भूमध्य रेखा यानी Equator के ऊपर से गुजरता है, तो इस घटना को इक्विनॉक्स कहा जाता है. सितंबर के महीने में सूर्य, उत्तर से दक्षिण गोलार्ध की ओर बढ़ते हुए भूमध्य रेखा को पार करता है.
क्या भारत में दिन और रात 12-12 घंटे के होंगे?
मैथमेटिक्स के लिहाज से देखें तो Equinox वाले दिन में दिन और रात दोनों ही बराबर माने जाते हैं, लेकिन प्रैक्टिकल तौर पर ऐसा नहीं होता है. उदाहरण के लिए 23 सितंबर के दिन राजधानी नई दिल्ली में दिन की अवधि लगभग 12 घंटे और 7 मिनट की रहेगी. यानी कि आधे से कुछ मिनट अधिक.
क्यों होता है ऐसा?
- वायुमंडलीय रिफ्रैक्शन: धरती का वायुमंडल सूर्य के प्रकाश को मोड़ देता है. इसकी वजह से सूर्य असल में क्षितिज यानी Horizon के ऊपर आने से कुछ मिनट पहले ही हमें दिखाई देने लगता है और ढलने के बाद भी कुछ देर तक दिखता रहता है.
- सूर्य का आकार: सूर्य कोई एक बिंदु ना होकर एक बड़ा सा चक्र है. सूर्योदय और सूर्यास्त की गणना सूर्य के ऊपरी किनारे के दिखने और छिपने से की जाती है, ना कि उसके सेंटर से.
भारत और दुनिया पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा?
ऋतु परिवर्तन: सितंबर इक्विनॉक्स के साथ ही उत्तरी गोलार्ध (Northern Hemisphere) में खगोलीय शरद ऋतु (Autumn) की शुरुआत होती है. इसी हेमिस्फेयर में भारत भी शामिल है. इसके ठीक उलट दक्षिणी गोलार्ध (Southern Hemisphere) में वसंत ऋतु (Spring) का आगमन होता है.
लंबी होने लगेंगी रातें: 23 सितंबर के बाद सूर्य की सीधी किरणें दक्षिणी गोलार्ध की ओर खिसकने लगेंगी. इसका नतीजा यह होगा कि भारत समेत पूरे उत्तरी गोलार्ध में धीरे-धीरे दिन छोटे और रातें लंबी होने लगेंगी. दिनों के छोटे होने का यह सिलसिला 21-22 दिसंबर तक जारी रहेगा, जिसे विंटर सोलस्टाइस (Winter Solstice) कहा जाता है. यह साल का सबसे छोटा दिन होता है. फिर धीरे-धीरे दिन बड़ा होने शुरू होगा.
अब इसमें ध्यान देने लायक बात यह है कि यह घटना खगोलीय रूप से शरद ऋतु की शुरुआत का प्रतीक है, लेकिन भारत में इसका मौसम संबंधी प्रभाव डायरेक्ट महसूस नहीं होता है. ऐसा इसलिए क्योंकि भारत का मौसम मुख्य रूप से मानसून और स्थानीय जलवायु पैटर्न के जरिए ऑपरेट होता है.