भारी बारिश में भी नहीं डूबी सोयाबीन की फसल, किसान ने अपनाई जबरदस्त तकनीक
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Agriculture News: किसान सोबरन सिंह धाकड़ ने लोकल 18 से कहा कि मौसम की अनिश्चितता के बीच खेती में आधुनिक तकनीक अपनाना जरूरी है. सही पद्धति से खेती करने पर फसल को वर्षा से होने वाले नुकसान से बचाने के साथ बेहतर उत्पादन की दिशा में भी काम किया जा सकता है.
शिवपुरी. मध्य प्रदेश के शिवपुरी में लगातार बदलते मौसम और बारिश के बीच सोयाबीन की फसल को जलभराव से बचाना किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है. ऐसे में फतेहपुर निवासी किसान सोबरन सिंह धाकड़ ने आधुनिक कृषि तकनीक अपनाकर खेती का ऐसा तरीका अपनाया है, जिससे भारी बारिश के दौरान खेत में पानी जमा नहीं हुआ और सोयाबीन की फसल सुरक्षित रही.
किसान सोबरन सिंह पहले सामान्य तरीके से सोयाबीन की बोवनी करते थे. बारिश अधिक होने पर खेत में पानी जमा होने से फसल खराब होने का खतरा बना रहता था. इसके बाद उन्होंने कृषि विभाग के आत्मा कार्यक्रम के ब्लॉक तकनीकी प्रबंधक रघुवीर सिंह यादव और कृषि विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में वैज्ञानिक तरीके से खेती करने का निर्णय लिया.
एक बीघा में अपनाई रिज एंड फरो पद्धति
सोबरन सिंह ने अपने एक बीघा खेत में सोयाबीन की बोवनी रिज एंड फरो यानी मेड़ और नाली पद्धति से की. इस तकनीक में फसल की कतारों के बीच मेड़ और नालियां बनाई जाती हैं. किसान ने करीब 12 से 15 किलोग्राम बीज प्रति बीघा की दर से इस्तेमाल किया और कतार से कतार की दूरी 18 इंच रखी.
रिज एंड फरो पद्धति का फायदा
इस पद्धति का सबसे बड़ा फायदा बारिश के दौरान देखने को मिला. खेत में जब बारिश का पानी आया, तो नालियों के जरिए अतिरिक्त पानी बाहर निकल गया. इससे खेत में लंबे समय तक जलभराव की स्थिति नहीं बनी और सोयाबीन की फसल को नुकसान से बचाने में मदद मिली.
पौधों का हुआ बेहतर विकास
किसान के अनुसार, रिज एंड फरो पद्धति से फसल में जलभराव की समस्या कम हुई. पौधों का विकास बेहतर दिखाई दिया और शाखाएं भी अच्छी तरह विकसित हुईं. फसल में दाने बनने की स्थिति भी अच्छी रही, जिससे उत्पादन बेहतर होने की उम्मीद है.
अन्य किसानों को भी मिली प्रेरणा
सोबरन सिंह की एक बीघा भूमि में अपनाई गई इस तकनीक को देखकर आसपास के किसान भी जलभराव वाले खेतों में मेड़ और नाली पद्धति अपनाने के बारे में जानकारी ले रहे हैं. कृषि विभाग के अधिकारियों और विशेषज्ञों ने भी उनके खेत का निरीक्षण कर तकनीक के इस्तेमाल की सराहना की.
किसान सोबरन सिंह धाकड़ का कहना है कि मौसम की अनिश्चितता के बीच खेती में आधुनिक तकनीक अपनाना जरूरी है. सही पद्धति से खेती करने पर फसल को बारिश से होने वाले नुकसान से बचाने के साथ बेहतर उत्पादन की दिशा में भी काम किया जा सकता है.