शिमला. हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के संजौली, भट्टाकुफर और ढली इलाके में फोरलेन टनल निर्माण को लेकर विवाद गहराता जा रहा है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि फोरलेन के लिए बनाई जा रही टनल के चलते मकानों में दरारें आ रही हैं, जिसके चलते इस इलाके के सभी की चिंता बढ़ गई है.
इस बीच कैबिनेट मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं. मंत्री ने निर्माण कार्य में कथित तौर पर घटिया मानकों का इस्तेमाल होने के आरोप लगाए हैं और कहा है कि अगर जरूरत पड़ी तो इस मामले को अदालत तक ले जाया जाएगा.
अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि एनएचएआई पूरी तरह से सब-स्टेंडर्ड कार्य कर रही है, जिसके चलते संजौली, समिट्री भट्टाकुफर और ढली क्षेत्र में करीब 13 से 14 भवनों में बड़ी-बड़ी दरारें आ चुकी हैं, कुछ भवनों के गिरने का खतरा पैदा हो गया है. उन्होंने दावा किया कि संजौली के हेलीपोर्ट क्षेत्र में 4 घर खाली करवाए जा चुके हैं. सभी प्रभावित लोग अब मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से भी मुलाकात करेंगे.
कैबिनेट मंत्री ने NHAI और निर्माण कार्य से जुड़ी कंपनियों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि उन्हें हिमाचल के हितों और लोगों की जान-माल की कोई चिंता नहीं है. उनका आरोप है कि फोरलेन निर्माण में सब-स्टैंडर्ड काम किया जा रहा है और इससे लोगों के घरों की सुरक्षा खतरे में पड़ रही है. मंत्री ने यहां तक आरोप लगाया कि एनएचएआई के कुछ अधिकारी पैसे कमा रहे हैं और पैसे जेब में डाल रहे हैं. अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि वह शुरुआत से ही फोरलेन निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाते रहे हैं. उनके मुताबिक कई जगह निर्माण के कारण नुकसान हुआ है, पहले भी एक भवन गिर चुका है और अब संजौली क्षेत्र में मकानों में आई दरारों ने गंभीर चिंता पैदा कर दी है.
प्रशासन ने निर्माण कार्य पर लगाई रोक
मामले की गंभीरता को देखते हुए शिमला के उपायुक्त अनुपम कश्यप ने प्रभावित क्षेत्र का जायजा लिया है. प्रशासन की ओर से फिलहाल निर्माण कार्य के लिए दी गई अनुमति वापस लेने और काम रोकने के आदेश जारी किए गए हैं. अब सरकार पूरे मामले की तकनीकी और स्वतंत्र जांच कराने की तैयारी में है. अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि वह मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव के साथ जल्द ही इस मुद्दे पर उच्च स्तरीय बैठक करेंगे. इस बैठक के बाद एक हाई पावर कमेटी गठित की जाएगी. इसमें पर्यावरणविदों, भूवैज्ञानिकों और संबंधित विभागों के अधिकारियों को शामिल करने की बात कही गई है. मंत्री ने यह भी सुझाव दिया कि कमेटी की अध्यक्षता किसी सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश या न्यायाधीश से करवाई जानी चाहिए, ताकि जांच निष्पक्ष तरीके से हो और यदि निर्माण कार्य में किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारी तय की जा सके.
नुकसान की भरपाई की मांग की
फोरलेन टनल निर्माण से प्रभावित शांति विहार वार्ड के लोगों के प्रतिनिधिमंडल ने आज कैबिनेट मंत्री अनिरुद्ध सिंह से मुलाकात कर अपनी चिंताएं रखीं. प्रतिनिधिमंडल में पार्षद विनीत शर्मा, नरेंद्र ठाकुर और पूर्व पार्षद राजेंद्र चौहान शामिल रहे. स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों की मेहनत से बनाए गए उनके मकानों में दरारें आ गई हैं और उन्हें भविष्य में किसी बड़े हादसे का डर सता रहा है. लोगों ने मांग की है कि निर्माण कार्य में निर्धारित सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन कराया जाए. प्रभावित भवनों को लेकर लोगों ने अधिग्रहण और उचित मुआवजे की मांग भी उठाई है. उनका कहना है कि जब तक मकानों की सुरक्षा को लेकर विशेषज्ञों से स्पष्ट रिपोर्ट नहीं आती, तब तक ऐसे निर्माण कार्य को आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए.
मुख्यमंत्री से मिलेंगे प्रभावित लोग
स्थानीय प्रतिनिधियों के मुताबिक प्रभावित लोग जल्द ही मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से मुलाकात करेंगे और उन्हें पूरे मामले की जानकारी देंगे. लोगों की मुख्य मांग है कि टनल निर्माण के कारण उनके मकानों को हुए नुकसान का वैज्ञानिक आकलन कराया जाए और भविष्य में होने वाले संभावित नुकसान से बचाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं.