दतिया से कांग्रेस विधायक घनश्याम सिंह के निर्वाचन को हाईकोर्ट में चुनौती, क्या फिर होंगे उपचुनाव?

दतिया से कांग्रेस विधायक घनश्याम सिंह के निर्वाचन को हाईकोर्ट में चुनौती, क्या फिर होंगे उपचुनाव?


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MP High Court News: दतिया से नवनिर्वाचित कांग्रेस विधायक घनश्याम सिंह का निर्वाचन जबलपुर हाईकोर्ट में कानूनी चुनौती में फंस गया है. भाजपा नेता दीपक बेलपत्री ने याचिका दायर कर उन पर चुनावी शपथ पत्र में वर्ष 1991 के एक आपराधिक मामले की जानकारी छिपाने का आरोप लगाते हुए चुनाव रद्द करने की मांग की है.

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दतिया कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह.

Jabalpur News: दतिया विधानसभा उपचुनाव के नतीजे आने के करीब डेढ़ महीने बाद नवनिर्वाचित विधायक घनश्याम सिंह की कानूनी मुश्किलें बढ़ गई हैं. दतिया से कांग्रेस विधायक घनश्याम सिंह के निर्वाचन को जबलपुर हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है. यह याचिका भाजपा नेता और अधिवक्ता दीपक बेलपत्री ने दायर की है. याचिका में घनश्याम सिंह का निर्वाचन रद्द कर दतिया में दोबारा चुनाव कराने की मांग की गई है. हालांकि, अभी सिर्फ याचिका दायर हुई है और विधायक की सदस्यता रद्द नहीं हुई है.

शपथ पत्र में जानकारी छिपाने का आरोप
अधिवक्ता शिवम गौतम के माध्यम से 17 सितंबर को जबलपुर हाईकोर्ट में यह याचिका दायर की गई. याचिका में दावा किया गया है कि वर्ष 1991 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के बाद दतिया में हुए विरोध प्रदर्शन और चक्काजाम के दौरान एक एफआईआर (FIR) दर्ज की गई थी, जिसमें घनश्याम सिंह का नाम शामिल था.

आरोप है कि जुलाई 2026 के उपचुनाव में दाखिल चुनावी शपथ पत्र में घनश्याम सिंह ने इस 1991 वाले मामले की जानकारी नहीं दी. हालांकि, उपलब्ध चुनावी रिकॉर्ड के मुताबिक घनश्याम सिंह ने अपने शपथ पत्र में दो अन्य आपराधिक मामलों का उल्लेख किया था. अब अदालत में यह तय होना है कि 1991 के कथित मामले की जानकारी देना कानूनी रूप से जरूरी था या नहीं और इसका निर्वाचन पर क्या प्रभाव पड़ेगा.

30 जुलाई को हुआ था चुनाव, 3 अगस्त को आया था परिणाम
दतिया सीट पर 30 जुलाई को उपचुनाव हुआ था और 3 अगस्त को परिणाम घोषित हुए थे. इसमें कांग्रेस के घनश्याम सिंह ने भाजपा के आशुतोष तिवारी को 6 हजार 16 वोटों के अंतर से हराया था.

फिलहाल यह याचिका हाईकोर्ट की किसी बेंच में सुनवाई के लिए लिस्ट नहीं हुई है, इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि दतिया में दोबारा उपचुनाव की नौबत आएगी. आगे की पूरी स्थिति जबलपुर हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई और अदालत के अंतिम आदेश से ही तय होगी.



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