श्रीकृष्ण पर टिप्पणी कर बुरे फंसे धीरेंद्र शास्त्री, आगरा में दर्ज हुआ मानहानि का मुकदमा

श्रीकृष्ण पर टिप्पणी कर बुरे फंसे धीरेंद्र शास्त्री, आगरा में दर्ज हुआ मानहानि का मुकदमा


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Dhirendra Shastri News: कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री की भगवान श्रीकृष्ण को लेकर टिप्पणी पर अब मानहानि का मुकदमा दायर किया गया है. आगरा में एक वकील ने उन पर आरोप लगाया है. अब इस मामले में जल्द ही सुनवाई होगी.

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पंडित धीरेंद्र शास्त्री मुश्किल में फंसे.

आगरा : भगवान श्रीकृष्ण के बारे में कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री की कथित टिप्पणी वाला मामला बढ़ता जा रहा है. अब इस बयान को लेकर आगरा की एक अदालत में उनके खिलाफ आपराधिक मानहानि का मुकदमा दायर किया गया है. सिविल जज जूनियर डिवीजन पंचम कंचन कुमारी के न्यायालय में बुधवार को अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह द्वारा दायर मानहानि के वाद में सुनवाई हुई.

क्या बोले अधिवक्ता ?

अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह ने आगरा दीवानी न्यायालय में यह परिवाद दाखिल करते हुए आरोप लगाया कि शास्त्री ने एक कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण के संबंध में अमर्यादित टिप्पणी की. इससे उनके वंशजों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं और उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है.  उन्होंने यह भी दलील दी कि भगवान श्रीकृष्ण के वंशज आज भी भारत में निवास करते हैं, जिनमें जादौन, जडेजा और भाटी क्षत्रिय शामिल हैं. इनका उल्लेख मथुरा गजेटियर और अलेक्जेंडर कनिंघम की 1882-83 की पुस्तक ‘रिपोर्ट इन ईस्टर्न राजपूताना’ में भी मिलता है.

इस दिन होगी सुनवाई
परिवादी ने दावा किया कि वह मातृ पक्ष से भगवान श्रीकृष्ण के वंशज हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि कथित टिप्पणी से भगवान श्रीकृष्ण के वंशजों की धार्मिक भावनाओं और सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है. अदालत ने परिवाद दर्ज करते हुए मामले में अगली सुनवाई के लिए आगामी 14 दिसंबर की तारीख तय की है. इससे पहले समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शास्त्री की टिप्पणी पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उत्तर प्रदेश में उनके प्रवेश पर रोक लगाने की बात कही थी.

विवाद बढ़ने पर धीरेंद्र शास्त्री ने मांगी थी माफी
विवाद बढ़ने पर धीरेंद्र शास्त्री ने एक वीडियो जारी किया और हाथ जोड़कर माफी मांगी थी. उन्होंने स्पष्ट किया था कि उनकी बात का गलत अर्थ निकाला गया, वह केवल विनोद और भाव यानी भक्ति रस में ऐसी बातें कह रहे थे और उनका उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था.



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