अमेरिका में चुनावी हार के बाद ट्रंप को पहला बड़ा झटका, चंडीगढ़ की बेटी हरमीत कौर ढिल्लों का इस्तीफा

अमेरिका में चुनावी हार के बाद ट्रंप को पहला बड़ा झटका, चंडीगढ़ की बेटी हरमीत कौर ढिल्लों का इस्तीफा


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अमेरिका में चुनावी हार के बाद ट्रंप को पहला झटका, हरमीत कौर ढिल्लों का इस्तीफा

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चंडीगढ़ में जन्मी भारतीय मूल की हरमीत कौर ढिल्लों ने अमेरिकी न्याय विभाग के नागरिक अधिकार प्रभाग के प्रमुख पद से इस्तीफा दे दिया है. अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लैंच ने गुरुवार को उनके इस्तीफे की पुष्टि की. ढिल्लों ने कहा कि उन्होंने खुद पद छोड़ने का फैसला किया था. मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की बड़ी हार के बाद ट्रंप प्रशासन से इस्तीफा देने वाली वह पहली वरिष्ठ अधिकारी हैं.

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हरमीत कौर ढिल्लौं.

अमेरिका में मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी को करारी हार मिलने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन में पहली बड़ी विदाई हुई है. भारतीय मूल की हरमीत कौर ढिल्लों ने अमेरिकी न्याय विभाग के नागरिक अधिकार प्रभाग (Civil Rights Division) के प्रमुख पद से इस्तीफा दे दिया है. अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लैंच ने गुरुवार को उनके जाने की पुष्टि की और उनके काम की तारीफ की. हालांकि, ढिल्लों ने साफ किया है कि उन्होंने यह फैसला खुद लिया है और इस्तीफे के पीछे कोई खास वजह नहीं बताई है. ढिल्लों ने बताया कि वह पहले ही पद छोड़ने का फैसला कर चुकी थीं, लेकिन व्हाइट हाउस की चीफ ऑफ स्टाफ सुसी विल्स के अनुरोध पर उन्होंने चुनाव के नतीजे आने तक इसका ऐलान टाल दिया. इस तरह वह मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की बड़ी हार के बाद पद छोड़ने वाली ट्रंप प्रशासन की पहली वरिष्ठ अधिकारी बन गई हैं.

ट्रंप को कहा शुक्रिया

अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लैंच ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि हरमीत कौर ढिल्लों ने हर अमेरिकी के नागरिक अधिकारों की रक्षा की और बिना किसी डर या पक्षपात के कानून लागू किया. उन्होंने ढिल्लों की सार्वजनिक सेवा के लिए न्याय विभाग की ओर से आभार भी जताया. वहीं, ढिल्लों ने अपने इस्तीफे पर कहा कि नागरिक अधिकारों के लिए सहायक अटॉर्नी जनरल के तौर पर देश की सेवा करना उनके जीवन का सबसे बड़ा सम्मान रहा. उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को यह मौका देने के लिए धन्यवाद दिया. ढिल्लों ने अपने कार्यकाल की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि उनकी टीम ने उन विविधता, समानता और समावेश (DEI) नीतियों को खत्म करने की दिशा में काम किया, जिन्हें वह गैरकानूनी मानती थीं.

ढिल्लों के समय बदला न्याय विभाग का कामकाज

हरमीत कौर ढिल्लों को अप्रैल 2025 में इस पद के लिए मंजूरी मिली थी. उनके नेतृत्व में न्याय विभाग के नागरिक अधिकार प्रभाग में बड़े बदलाव हुए. उनके समर्थकों ने इन बदलावों को जरूरी बताया, जबकि आलोचकों ने इस पर सवाल उठाए. उनके कार्यकाल में विभाग के सैकड़ों पुराने वकीलों को बाहर किया गया. पुलिस विभागों के खिलाफ संवैधानिक अधिकारों के कथित उल्लंघन से जुड़ी कुछ जांच भी बंद कर दी गईं. इसके अलावा, UCLA और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के खिलाफ मुकदमे दायर किए गए. विभाग का आरोप था कि इन संस्थानों के कैंपस में यहूदी विरोधी माहौल को पनपने दिया गया.

ढिल्लों के कार्यालय की कुछ कार्रवाइयों को लेकर भी विवाद हुआ. आलोचकों ने आरोप लगाया कि विभाग ने राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने की कोशिश की. इनमें ट्रंप की पूर्व सहयोगी कैसिडी हचिंसन के खिलाफ मुकदमा चलाने की असफल कोशिश भी शामिल थी. हचिंसन ने 6 जनवरी को अमेरिकी संसद परिसर में हुई हिंसा की जांच कर रही हाउस कमेटी के सामने गवाही दी थी. दूसरी ओर, उदारवादी विचारधारा वाले नागरिक अधिकार संगठनों ने आरोप लगाया कि विभाग अल्पसंख्यकों के मतदान, आवास और दूसरे क्षेत्रों में भेदभाव की शिकायतों पर ध्यान देने के बजाय DEI कार्यक्रमों को निशाना बनाने में ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहा था.

चंडीगढ़ में हुआ जन्म

हरमीत कौर ढिल्लों का जन्म चंडीगढ़ में एक सिख परिवार में हुआ था. उनके माता-पिता पहले कुछ समय लंदन में रहे और फिर परिवार अमेरिका चला गया. ढिल्लों ने एक कार्यक्रम में बताया था कि उनके माता-पिता का अमेरिका जाने का फैसला उनके लिए सबसे बड़ा तोहफा था. वह 10 साल की उम्र में अमेरिकी नागरिक बनी थीं. पेशे से वकील ढिल्लों ने सैन फ्रांसिस्को में अपनी लॉ फर्म चलाई. ट्रंप प्रशासन में शामिल होने से पहले भी वह डोनाल्ड ट्रंप की करीबी समर्थक रही थीं. उनकी लॉ फर्म 2020 के राष्ट्रपति चुनाव के दौरान ट्रंप की कानूनी टीम का हिस्सा थी. वह कैलिफोर्निया रिपब्लिकन पार्टी की उपाध्यक्ष और रिपब्लिकन नेशनल कमेटी की सदस्य भी रह चुकी हैं. 2023 में उन्होंने रिपब्लिकन नेशनल कमेटी के अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने की कोशिश की थी, लेकिन वह सफल नहीं हुईं.

इस्तीफे के बाद क्या करेंगी ढिल्लों?

ढिल्लों के इस्तीफे का ऐलान उस समय हुआ है, जब उनके विभाग ने मिडटर्म चुनाव के दौरान मतदान केंद्रों पर निगरानी के लिए 1,000 से ज्यादा पर्यवेक्षक तैनात किए थे. यह विभाग की ओर से अब तक की सबसे बड़ी तैनाती बताई गई. कुछ मतदान केंद्रों पर इनकी मौजूदगी को लेकर चिंता जताई गई, हालांकि किसी बड़ी घटना की खबर नहीं आई. ट्रंप प्रशासन में रहते हुए ढिल्लों को दक्षिणपंथी कानूनी हलकों में प्रभावशाली माना गया. हालांकि, उन्हें नस्लीय टिप्पणियों और हमलों का भी सामना करना पड़ा. उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा था कि कुछ लोग उन्हें अमेरिकी नागरिकता को लेकर निशाना बनाते हैं और उनके खिलाफ नस्लवादी बातें लिखते हैं. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ढिल्लों अब अपनी पुरानी लॉ फर्म ढिल्लों लॉ ग्रुप में लौटने की योजना बना रही हैं.



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