बॉलीवुड में ही नहीं लता मंगेशकर ने गढ़वाली गाने से बांधा था समां, आज भी पहाड़ों में गूंजती है स्वर कोकिला की आवाज

बॉलीवुड में ही नहीं लता मंगेशकर ने गढ़वाली गाने से बांधा था समां, आज भी पहाड़ों में गूंजती है स्वर कोकिला की आवाज


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Lata Mangeshkar Garhwali Song: लता मंगेशकर की सुरीली आवाज ने हिंदी सिनेमा के साथ-साथ क्षेत्रीय भाषाओं के गानों में भी जादू बिखेरा. उनका ये गढ़वाली गाना आज भी उत्तराखंड के लोगों के बीच खास जगह रखता है. जानिए इस गाने का मतलब और इससे जुड़ी दिलचस्प बातें.

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लता मंगेशकर का गढ़वाली गाना (फोटो साभार-IMDB)

नई दिल्ली: स्वर कोकिला लता मंगेशकर की आवाज का जादू सिर्फ हिंदी फिल्मों तक सीमित नहीं रहा. उन्होंने अपने लंबे करियर में कई भाषाओं में गाने गाए और हर जगह अपनी अलग पहचान बनाई. उनके गाए गाने आज भी लोगों के बीच पसंद किए जाते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि लता मंगेशकर ने उत्तराखंड की गढ़वाली भाषा में भी एक गाना गाया था? खास बात यह है कि करीब 16 साल पहले रिलीज हुआ यह गाना आज भी पहाड़ के लोगों के बीच काफी पसंद किया जाता है.

इस गाने का नाम ‘मन भरमैगे’ है. इसकी धुन और बोल उत्तराखंड की मिट्टी, वहां के लोकजीवन और संस्कृति से जुड़ाव महसूस कराते हैं.

लता मंगेशकर ने गाया था ‘मन भरमैगे’

लता मंगेशकर का गढ़वाली गाना ‘मन भरमैगे’ साल 2010 में रिलीज हुआ था. इसे देवी प्रसाद सेमवाल ने लिखा था, जबकि इसका म्यूजिक कुंवर सिंह बबला ने तैयार किया था. इस गाने में लता मंगेशकर की आवाज सुनना अपने आप में खास अनुभव है. उन्होंने अपनी सुरीली आवाज से गढ़वाली भाषा के इस गीत को एक अलग पहचान दी. यही वजह है कि उत्तराखंड के लोग आज भी इसे पसंद करते हैं. यूट्यूब पर भी इस गाने को लोग खूब सुनते हैं.

क्या है ‘मन भरमैगे’ गाने का मतलब?

इस गाने के बोल में पहाड़ों की खूबसूरती और वहां के लोकजीवन की झलक मिलती है. ‘मन भरमैगे’ का मतलब है कि मन खुश हो गया या किसी की धुन सुनकर दिल मोहित हो गया. गाने में बांसुरी की मीठी आवाज का जिक्र है. इसकी धुन सुनकर भंवरे, फूल और पहाड़ों में रहने वाले लोग भी जैसे उसमें खो जाते हैं. गीत में पहाड़ की वादियों, फूलों और गोरू-बखरों यानी मवेशियों के झुंड का भी जिक्र आता है. इसके जरिए उत्तराखंड के गांवों और वहां की रोजमर्रा की जिंदगी की तस्वीर सामने आती है. यही बात इस गाने को आम गानों से अलग बनाती है.

आज भी लोगों को पसंद हैं लता के गाने

लता मंगेशकर ने अपने करियर में हिंदी के अलावा मराठी, बंगाली, गुजराती और कई दूसरी भाषाओं में भी गाने गाए. उनके लोकप्रिय गानों में ‘लग जा गले’, ‘बाहों में चले आओ’, ‘तेरा मेरा प्यार अमर’ और ‘ये गलियां ये चौबारा’ जैसे गाने शामिल हैं. इन गानों को आज भी लोग बड़े शौक से सुनते हैं.

‘मन भरमैगे’ भी उनके ऐसे ही खास गानों में शामिल है, जो भाषा की सीमाओं से आगे जाकर लोगों के दिलों तक पहुंचा. उत्तराखंड के लोगों के लिए यह सिर्फ एक गाना नहीं, बल्कि अपनी मिट्टी और संस्कृति से जुड़ने का एक खूबसूरत जरिया है. यही वजह है कि 16 साल बाद भी लता मंगेशकर की यह आवाज पहाड़ों में गूंज रही है.



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