जापान, कोरिया और तुर्की की कारीगरी एक ही जगह, देहरादून विरासत फेस्ट में छाया विदेशी सामान का जलवा

जापान, कोरिया और तुर्की की कारीगरी एक ही जगह, देहरादून विरासत फेस्ट में छाया विदेशी सामान का जलवा


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Virasat Festival Dehradun: देहरादून में चल रहे विरासत फेस्ट में इस बार लोगों को देश ही नहीं, विदेशों की भी खूबसूरत कारीगरी देखने और खरीदने को मिल रही है. यहां जापान, कोरिया, ट्यूनीशिया और तुर्की से आए हाथ से बने सिरेमिक बर्तन, रंग-बिरंगे मोज़ेक लैंप और अनोखे शोपीस लोगों का ध्यान खींच रहे हैं. खास बात यह है कि इनकी शुरुआत 550 रुपये से हो रही है. तुर्की के मोज़ेक लैंप से लेकर हाथ से पेंट किए गए कप, मग और प्लेटों तक, यहां घर सजाने और इस्तेमाल करने के लिए कई तरह के सामान मौजूद हैं.

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देहरादून में आयोजित विरासत फेस्ट में इस बार देश-विदेश की खूबसूरत क्रॉकरी और हाथ से बनी चीजें लोगों को खूब पसंद आ रही हैं. यहां भारत के अलग-अलग राज्यों से आए कारीगरों के साथ कई देशों के व्यापारी भी अपना सामान लेकर पहुंचे हैं. खास बात यह है कि इन सामानों में हाथों की कारीगरी और अलग-अलग देशों की पारंपरिक कला देखने को मिल रही है.

जापान, कोरिया और ट्यूनीशिया में तैयार होने वाली प्लेटें यहां लोगों का ध्यान खींच रही हैं. इन पर नीले, लाल और नारंगी रंगों से जियोमेट्री डिजाइन बनाए गए हैं. ये डिजाइन ट्यूनीशिया की पारंपरिक सिरेमिक कला से काफी मिलते-जुलते हैं. इन प्लेटों पर हाथ से पेंटिंग की गई है और इनकी फिनिशिंग भी काफी चमकदार है.

विरासत फेस्ट में एक स्टॉल पर लगे बैनर पर ग्रैंड बाजार इस्तांबुल, तुर्की लिखा हुआ है. इस स्टॉल पर तुर्की के मशहूर मोज़ेक लैंप, ईविल आई और रंग-बिरंगे सिरेमिक शोपीस रखे गए हैं. यहां आने वाले लोग इन चीजों को पसंद कर रहे हैं. साथ ही, यह स्टॉल फोटो खिंचवाने के लिए भी लोगों की पसंद बना हुआ है.

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स्टॉल पर उल्लू, बिल्ली, कछुए और हाथी जैसे जानवरों के आकार के सिरेमिक शोपीस भी रखे गए हैं. इन पर नीले, लाल और पीले रंगों से फूलों की बारीक चित्रकारी की गई है. इनका इस्तेमाल सिर्फ सजावट के लिए ही नहीं, बल्कि छोटे गमले और अगरबत्ती स्टैंड के रूप में भी किया जा सकता है.

स्टॉल पर ऊपर से लटक रहे तुर्की के मोज़ेक लैंप इस फेस्ट की खास चीजों में शामिल हैं. इन लैंपों में छोटे-छोटे रंगीन कांच के टुकड़ों से फूल और सितारों जैसे डिजाइन बनाए गए हैं. रात में जब ये लैंप जलते हैं तो इनसे रंग-बिरंगी रोशनी निकलती है. लोग इन्हें अपने घर के ड्राइंग रूम के लिए खरीद रहे हैं.

यहां फिरोजी और गहरे नीले रंग के कप, मग और बाउल का भी अच्छा कलेक्शन है. इन पर काले रंग से हाथों से बेल-बूटों की डिजाइन बनाई गई है. दुकानदार जोसेफ का कहना है कि ये सिरेमिक बर्तन माइक्रोवेव सेफ हैं और इनमें खाना ज्यादा देर तक गर्म रहता है. उन्होंने बताया कि मिट्टी के बर्तनों में खाना खाने से सेहत भी अच्छी रहती है और स्वाद भी बढ़ता है.

तुर्की से आए कारीगर नेमत ने बताया कि यह पॉटरी पूरी तरह हाथों से बनाई जाती है. इसे तैयार करने के लिए खास तरह की मिट्टी को कई दिनों तक पकाया जाता है. देहरादून के लोग इस विदेशी कारीगरी को खूब पसंद कर रहे हैं और जमकर खरीदारी भी कर रहे हैं. यह फेस्ट सिर्फ खाने-पीने का ही नहीं, बल्कि दुनिया की कला और संस्कृति को एक जगह देखने का मौका भी दे रहा है.

पहले लोग स्टील और प्लास्टिक के बर्तनों को ज्यादा पसंद करने लगे थे, लेकिन अब एक बार फिर मिट्टी और सिरेमिक के बर्तनों की तरफ लौट रहे हैं. विरासत फेस्ट में भी यह बदलाव साफ दिखाई दे रहा है. लोग यहां इन बर्तनों के अलग-अलग डिजाइन और कलेक्शन देख रहे हैं. अगर आप भी अपने डाइनिंग टेबल को खूबसूरत बनाना चाहते हैं तो यहां मौजूद सिरेमिक बर्तन पसंद कर सकते हैं. इनकी कीमत 550 रुपये से शुरू होती है.

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