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8th Pay Commission : 8वें वेतन आयोग का गठन किए हुए करीब एक साल बीत गए और इस आयोग को 18 महीने में अपनी रिपोर्ट सौंपनी है. इससे पहले आयोग ने देश के सभी बड़े कर्मचारी संगठनों के साथ बातचीत करके फिटमेंट फैक्टर लागू करने की डिमांड रखी है. इस डिमांड को अगर मंजूर किया जाता है तो 8वें वेतन आयोग में मिनिमम बेसिक सैलरी कितनी बढ़ जाएगी.
8वें वेतन आयोग को 18 महीने में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपनी है.
नई दिल्ली. सरकारी कर्मचारियों को बीते एक साल से 8वें वेतन आयोग का बेसब्री से इंतजार है. सरकार ने भी वेतन आयोग का गठन बीते जनवरी में ही कर लिया था और आयोग के सदस्य सभी कर्मचारी संगठनों के साथ बातचीत और मंथन कर रहे हैं. कर्मचारी संगठनों ने तमाम तरह की डिमांड भी आयोग के सामने रखी है. इन डिमांड में सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है फिटमेंट फैक्टर की. फिटमेंट फैक्टर ही वह फॉर्मला है जो कर्मचारियों की सैलरी बढ़ाएगा और यही वजह है कि इसे लेकर लगातार अलग-अलग कयास लगाए जा रहे हैं.
8वां वेतन आयोग एक अस्थायी 3 सदस्यीय कमीशन है, जिसकी अगुवाई रंजना प्रकाश देसाई कर रहे हैं. आयोग सभी कर्मचारी संगठनों से बातचीत करके एक फाइनल रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा, जिस पर अंतिम फैसला सरकार ही लेगी. आयोग को 18 महीने में अपनी रिपोर्ट देनी है और इसमें से 12 महीने बीत चुके हैं. आयोग को सबसे ज्यादा मंथन फिटमेंट फैक्टर, सैलरी रिवीजन, अलाउंस, पेंशन सुधार, ग्रेच्युटी और पेंशन को लेकर करना पड़ रहा है. अब कर्मचारी संगठनों ने 4 अंक के फिटमेंट फैक्टर की डिमांड की है. अगर यह मंजूर होता है तो शुरुआती सैलरी कितनी हो जाएगी.
अभी तक कितनी आई डिमांड
कर्मचारी संगठनों ने अभी तक 3.61 से 4 अंकों के फिटमेंट फैक्टर की डिमांड रखी है. इन संगठनों में नेशनल-काउंसिल ज्वाइंट कंसल्टेटिव मशीनरी, भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ, भारत पेंशनर्स समाज, मिनिस्टेरियल स्टाफ एसोसिएशन ने भी 4 अंकों तक के फिटमेंट फैक्टर की डिमांड रखी है. सरकार ने 6वें वेतन आयोग में 1.87 तो 7वें वेतन आयोग में 2.57 अंकों की बढ़ोतरी की थी. 7वें वेतन आयोग में 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू करने के बाद मिनिमम बेसिक सैलरी 7 हजार से बढ़कर 18 हजार रुपये हो गया था.
कैसे काम करता है फिटमेंट फैक्टर
फिटमेंट फैक्टर से ही बेसिक सैलरी का निर्धारण होता है. मान लीजिए कि 6वें वेतन आयोग में किसी की बेसिक सैलरी 7 हजार रुपये है तो 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लगने के बाद यह सैलरी 2.57 गुना बढ़ा दी गई. इसका मतलब है कि फिटमेंट फैक्टर सीधे सैलरी को उतना ही गुना बढ़ा देता है.7वें वेतन आयोग में सैलरी 2.57 गुना बढ़कर 17,990 यानी राउंड फिगर 18 हजार हो गई थी.
अगर 4 का फिटमेंट फैक्टर लागू हुआ तो…
भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ (BPMS) ने अभी तक सबसे ज्यादा 4 का फिटमेंट फैक्टर मांगा है. अगर यह लागू होता है तो जो मिनिमम बेसिक सैलरी अभी 18 हजार है, वह सीधे 4 गुना बढ़कर 72 हजार हो जाएगी. हालांकि, इस पर फैसला करने से पहले 2016-17 से 2024-25 के बीच प्रति व्यक्ति कमाई का राष्ट्रीय औसत को ध्यान रखना होता है. अभी इसका निर्धारण 5 सदस्यों का परिवार मानकर किया जाता है, लेकिन कर्मचारी संगठनों ने परिवार के सदस्यों की संख्या बढ़ाने की भी डिमांड की है.
अन्य संगठनों की कितनी डिमांड
कर्मचारियों के सबसे बड़े संगठन नेशनल काउंसिल-ज्वाइंट कंसल्टेटवि मशीनरी और भारत पेंशनर्स समाज ने आयोग से 3.83 का फिटमेंट फैक्टर लागू करने की डिमांड की है. अगर इस फैक्टर को ही माना जाए तो मिनिमम बेसिक सैलरी 69 हजार रुपये हो जाएगी. संगठनों ने खाने, कपड़े, घर, ईंधन, शिक्षा आदि का खर्च बढ़ने के आधार पर फिटमेंट फैक्टर लागू करने की डिमांड की है. संगठनों ने परिवार की यूनिट भी बढ़ाकर 5.2 करने की डिमांड की है. मिनिस्टेरियल स्टाफ एसोसिएशन ने 3.61 फिटमेंट फैक्टर की डिमांड रखी है और इस आधार पर सैलरी बढ़ाई जाती है तो मिनिमम बेसिक 65 हजार रुपये हो जाएगी.