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Ramayana Public Review: नितेश तिवारी की फिल्म ‘रामायण: पार्ट 1’ के रिलीज होते ही सिनेमाघरों में दर्शकों का जबरदस्त क्रेज देखने को मिला. थिएटर्स से बाहर निकले दर्शकों ने फिल्म के आधुनिक वीएफएक्स, 3D तकनीक और दमदार स्क्रीनप्ले को खूब सराहा. खासकर प्रभु श्रीराम के रूप में रणबीर कपूर के जीवंत अभिनय और वनवास के भावुक दृश्य ने सिनेप्रेमियों का दिल जीत लिया, जिससे अधिकांश दर्शकों ने इसे एक तकनीकी मास्टरपीस करार दिया.
Ramayana Public Review: नितेश तिवारी की मच अवेटेड फिल्म ‘रामायण: पार्ट 1’ सिनेमाघरों में दस्तक दे चुकी है और पहले ही दिन इसे लेकर दर्शकों के बीच जबरदस्त क्रेज नजर आया. रणबीर कपूर, यश और साई पल्लवी की अदाकारी देखने पहुंचे सिनेमाप्रेमियों की ओर से थिएटर्स के बाहर मिली-जुली राय सामने आ रही है. फिल्म के शानदार विजुअल इफेक्ट्स, दमदार साउंड, 3D तकनीक और कलाकारों के अभिनय ने दर्शकों को प्रभावित किया है. खास बात यह है कि फिल्म देखकर निकल रहे दर्शकों में किसी को रणबीर कपूर का प्रभु श्रीराम के रूप में अभिनय बेहद पसंद आया, तो किसी ने रावण के दृष्टिकोण से कहानी की शुरुआत और उसके चित्रण को सराहा.
महाकाव्य को तकनीकी रूप से किया गया अपग्रेड
ग्रेटर नोएडा के सिनेमाघर से फिल्म देखकर बाहर निकले आशु भटनागर ने कहा कि उन्हें ऐसा लगा जैसे 25 साल पहले देखे गए एक महाकाव्य को तकनीकी रूप से अपग्रेड करके दोबारा सामने प्रस्तुत किया गया हो. उन्होंने कहा कि रामायण की मूल कथा को फिल्म में समाहित किया गया है, लेकिन खास बात यह है कि इसमें वाल्मीकि रामायण के प्रसंगों और कहानी को जिस तरह प्रस्तुत किया गया है, वह काफी प्रभावशाली है. तकनीकी स्तर पर फिल्म में काफी काम किया गया है. साउंड और 3D का अनुभव शानदार है. बड़े पर्दे पर इसे देखना अपने आप में अलग अनुभूति देता है.
कसा हुआ स्क्रीनप्ले और जटायु का सूत्रधार रूप
आशु भटनागर ने पुरानी रामायण और नई फिल्म की तुलना करते हुए कहा कि रामानंद सागर की रामायण एक विस्तृत धारावाहिक थी. उस समय हर रविवार को करीब 40 मिनट का एपिसोड देखने को मिलता था. धारावाहिक में कहानी को विस्तार से दिखाने का अवसर था, जबकि फिल्म में लगभग तीन घंटे के भीतर पूरी कहानी को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करना एक बड़ी चुनौती थी. इसके बावजूद फिल्म की स्क्रीनप्ले कहीं टूटती हुई महसूस नहीं होती. कहानी को इस तरह आगे बढ़ाया गया है कि दर्शक लगातार उससे जुड़े रहते हैं. उन्होंने कहा कि आमतौर पर रामायण देखते समय दर्शक भगवान श्रीराम के दृष्टिकोण से कहानी को देखते हैं, लेकिन इस फिल्म में शुरुआत में रावण के जीवन और उसके आगे बढ़ने की कहानी को भी प्रमुखता से दिखाया गया है. उन्होंने कहा कि रामानंद सागर की रामायण में सूत्रधार की भूमिका अलग थी, जबकि यहां जटायु के माध्यम से कहानी को आगे बढ़ाने का अंदाज देखने को मिलता है. फिल्म की शुरुआत में रावण के प्रसंगों को दिखाना दर्शकों के लिए एक अलग अनुभव है. हालांकि, उन्होंने गानों को लेकर थोड़ी निराशा जताई. उनका कहना था कि कुछ गाने कहानी के माहौल से पूरी तरह जुड़ते हुए महसूस नहीं होते, लेकिन फिल्म के बाकी हिस्से इतने प्रभावशाली हैं कि यह कमी ज्यादा खलती नहीं है. उन्होंने फिल्म को मास्टरपीस बताया.
प्रभु श्रीराम के रूप में रणबीर कपूर को मिले 10 में से 10 अंक
वहीं, फिल्म देखकर निकलीं रुबिका भटनागर ने रणबीर कपूर के अभिनय की जमकर तारीफ की. उन्होंने कहा कि रणबीर कपूर को इससे पहले कई अलग-अलग किरदारों में देखा है, लेकिन जब उन्हें प्रभु श्रीराम के रूप में स्क्रीन पर देखा तो अनुभव बिल्कुल अलग था. ऐसा महसूस हुआ जैसे सामने वास्तव में प्रभु श्रीराम ही मौजूद हों. उनके व्यक्तित्व और प्रस्तुति ने उन्हें काफी प्रभावित किया. उन्होंने कहा कि फिल्म शानदार है और इसे वे 10 में से 10 अंक देना चाहेंगी. उनके मुताबिक, पूरी फिल्म का अनुभव बेहद अद्भुत रहा और कलाकारों ने अपने किरदारों को प्रभावशाली तरीके से निभाया है.
वीएफएक्स, निर्देशन और श्रीराम के वनवास प्रसंग का भावुक दृश्य
इसी तरह सक्षम ने भी फिल्म को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि उन्हें फिल्म बहुत ज्यादा पसंद आई. उन्होंने कहा कि खासतौर पर इसके वीएफएक्स और निर्देशन ने प्रभावित किया. फिल्म में कई दृश्य ऐसे हैं, जो दर्शकों को कहानी के साथ भावनात्मक रूप से जोड़ते हैं. उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम का अपने घर को छोड़कर वनवास के लिए जाना फिल्म का सबसे अच्छा हिस्सा लगा. इस दृश्य में भावनाओं को जिस तरह प्रस्तुत किया गया है, वह दर्शकों के मन को छूता है.