धौलपुर: धौलपुर जैसे छोटे शहर में क्रिकेट को नई पहचान दिलाने वाले कोच सोमेन्द्र तिवारी आज युवाओं के लिए प्रेरणा बने हुए हैं. उन्होंने अपने जुनून और मेहनत से ऐसे खिलाड़ियों को तैयार किया है, जो आज राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रिकेट खेलकर धौलपुर का नाम रोशन कर रहे हैं. उनके मार्गदर्शन में 8 से अधिक खिलाड़ी राजस्थान रणजी टीम का हिस्सा बन चुके हैं, जबकि 70 से अधिक बच्चे नेशनल स्तर पर खेल चुके हैं. राहुल चाहर, दीपक चाहर और रजत बघेल जैसे खिलाड़ियों ने भी उनके मार्गदर्शन में क्रिकेट का प्रशिक्षण लिया है.
खास बात यह है कि सोमेन्द्र तिवारी अब तक 8 हजार से अधिक बच्चों को बिना किसी शुल्क के क्रिकेट का प्रशिक्षण दे चुके हैं. वह मेहनती और जरूरतमंद बच्चों को निशुल्क क्रिकेट किट भी उपलब्ध कराते हैं.
नौकरी छोड़ दी और क्रिकेट को ही अपना जीवन बना लिया
कोच सोमेन्द्र तिवारी बताते हैं कि क्रिकेट की दुनिया में पहुंचने के लिए उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा. उनके माता-पिता चाहते थे कि वह पढ़ाई करके सरकारी नौकरी हासिल करें. उनके पिता भी सरकारी कर्मचारी थे, इसलिए परिवार की इच्छा थी कि वह भी सरकारी नौकरी करें. लेकिन सोमेन्द्र तिवारी का सपना एक बड़ा क्रिकेटर बनने का था. परिवार के दबाव में उन्होंने इंडियन रेलवे में नौकरी भी हासिल कर ली, लेकिन उनका मन नौकरी में नहीं लगा. वह बताते हैं कि मुझे सरकारी कर्मचारी नहीं, बल्कि क्रिकेटर बनना था. इसी जुनून के चलते उन्होंने रेलवे की नौकरी छोड़ दी और क्रिकेट को ही अपना जीवन बना लिया.
प्रशिक्षण से निकले बच्चे आज भारतीय टीम तक पहुंच रहे
सोमेन्द्र तिवारी बताते हैं कि जब वह खुद क्रिकेट खेला करते थे, तब धौलपुर में क्रिकेट खेलने के लिए अच्छे मैदान और सुविधाओं का अभाव था. शहर में इंदिरा गांधी स्टेडियम ही एकमात्र बड़ा मैदान था, लेकिन उसकी हालत भी काफी खराब थी. उस समय क्रिकेट में काफी प्रतिस्पर्धा थी और सीमित सुविधाओं के बीच खिलाड़ियों को अभ्यास करना पड़ता था. करीब 32 साल पहले जो परेशानी खिलाड़ियों को होती थी, आज भी स्टेडियम की स्थिति में ज्यादा सुधार नहीं हुआ है. उनका कहना है कि वह खुद भारतीय टीम तक नहीं पहुंच पाए, लेकिन उन्हें इस बात की खुशी है कि उनके प्रशिक्षण से निकले बच्चे आज भारतीय टीम तक पहुंच रहे हैं.
कोच की बात मानकर लगातार अभ्यास करता
कोच सोमेन्द्र तिवारी बताते हैं कि उनकी क्रिकेट अकादमी में हर साल 500 से अधिक बच्चे प्रशिक्षण लेने के लिए आते हैं. हालांकि इनमें से केवल चार से पांच बच्चे ही ऐसे होते हैं, जो अपनी मेहनत और लगन के दम पर राजस्थान या राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच पाते हैं. उनका कहना है कि क्रिकेट में आगे बढ़ने के लिए केवल अकादमी में आना काफी नहीं है. बच्चे में मेहनत करने की इच्छा, ईमानदारी और मजबूत इरादा होना जरूरी है. कोच केवल खिलाड़ी को सही दिशा दिखा सकता है, लेकिन उस रास्ते पर चलकर मेहनत बच्चे को खुद करनी पड़ती है. जो बच्चा कोच की बात मानकर लगातार अभ्यास करता है, वह एक दिन अच्छा खिलाड़ी बन सकता है.
धौलपुर के युवाओं को भी क्रिकेट में आगे बढ़ने की प्रेरणा
सोमेन्द्र तिवारी बताते हैं कि उन्होंने कई ऐसे खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दिया है, जिन्होंने आगे चलकर क्रिकेट की दुनिया में अपनी पहचान बनाई. राहुल चाहर और दीपक चाहर भारतीय सीनियर टीम का हिस्सा बनकर टेस्ट, वनडे और टी-20 क्रिकेट में देश का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं. वहीं विवेक यादव भारतीय अंडर-19 टीम का हिस्सा रह चुके हैं. वर्तमान में रजत बघेल भी भारतीय अंडर-19 टीम का हिस्सा हैं और अंडर-19 एशिया कप के लिए श्रीलंका दौरे पर खेल रहे हैं. इसके अलावा उनके प्रशिक्षण से निकले खिलाड़ी राजस्थान रणजी टीम, ईरानी ट्रॉफी और शेष भारत जैसी बड़ी प्रतियोगिताओं में भी खेल चुके हैं. इन खिलाड़ियों की सफलता से धौलपुर के युवाओं को भी क्रिकेट में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिल रही है.
माता-पिता पहली बार अपने बच्चे को क्रिकेट का प्रशिक्षण
कोच बताते हैं कि जब कोई माता-पिता पहली बार अपने बच्चे को क्रिकेट का प्रशिक्षण दिलाने के लिए उनके पास लेकर आते हैं, तो वह सबसे पहले बच्चे की रुचि और जुनून के बारे में पूछते हैं. उनका कहना है कि मैं उन्हीं बच्चों को प्रशिक्षण देना चाहता हूं, जो सच में क्रिकेटर बनना चाहते हैं और पूरी ईमानदारी से खेलना चाहते हैं. जो बच्चे केवल समय बिताने या पार्ट टाइम के तौर पर क्रिकेट खेलना चाहते हैं, उनके लिए क्रिकेट को करियर बनाना सही नहीं है. उनका मानना है कि माता-पिता को भी बच्चे की रुचि समझनी चाहिए. अगर बच्चा पढ़ाई में अच्छा है और पढ़ना चाहता है, तो उसे पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए. बच्चों पर एक साथ कई गतिविधियों का दबाव डालने से वे न तो पढ़ाई में अच्छा कर पाते हैं और न ही खेल में.
खेल के प्रति पूरी तरह समर्पित रहें
सोमेन्द्र तिवारी का मानना है कि अगर कोई बच्चा लगातार चार से पांच साल तक पूरी मेहनत, लगन और ईमानदारी के साथ क्रिकेट खेलता है, तो वह कम से कम राष्ट्रीय स्तर पर खेलने का सपना पूरा कर सकता है. इसके लिए बच्चे में धैर्य होना बहुत जरूरी है. क्रिकेट में सफलता एक दिन में नहीं मिलती. इसके लिए रोजाना अभ्यास करना पड़ता है और अपनी गलतियों को सुधारना होता है. वह बच्चों को सलाह देते हैं कि खेल के प्रति पूरी तरह समर्पित रहें और किसी भी गलत आदत से दूर रहें.
बच्चे का क्रिकेटर बनने का सपना अधूरा न रह जाए
कोच सोमेन्द्र तिवारी की अकादमी की सबसे खास बात यह है कि यहां बच्चों को क्रिकेट का प्रशिक्षण लेने के लिए कोई शुल्क नहीं देना पड़ता. वह अब तक 8 हजार से अधिक बच्चों को निशुल्क प्रशिक्षण दे चुके हैं. इतना ही नहीं, जो बच्चे मेहनती हैं और क्रिकेट में आगे बढ़ने की क्षमता रखते हैं, उन्हें वह अपनी तरफ से निशुल्क क्रिकेट किट भी उपलब्ध कराते हैं. उनका उद्देश्य है कि आर्थिक परेशानी के कारण किसी बच्चे का क्रिकेटर बनने का सपना अधूरा न रह जाए.
भारत और ईरानी ट्रॉफी जैसे बड़े टूर्नामेंट में खेलकर धौलपुर का नाम रौशन
इसका उदाहरण धौलपुर के तनवीर उल हक हैं. उनके पिता दर्जी का काम करते थे. आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वह महंगी क्रिकेट किट खरीद सकें. ऐसे में सोमेन्द्र तिवारी ने उन्हें निशुल्क प्रशिक्षण दिया और क्रिकेट किट भी उपलब्ध कराई. अपनी मेहनत के दम पर तनवीर उल हक ने राजस्थान रणजी टीम, शेष भारत और ईरानी ट्रॉफी जैसे बड़े टूर्नामेंट में खेलकर धौलपुर का नाम रोशन किया. आज वह इनकम टैक्स ऑफिसर के पद पर कार्यरत हैं. कोच का कहना है कि किसी बच्चे की प्रतिभा आर्थिक परेशानी के कारण पीछे नहीं रहनी चाहिए.
वीरेंद्र सहवाग और श्रीकांत भी उनके पसंदीदा खिलाड़ियों में शामिल
सोमेन्द्र तिवारी बताते हैं कि उनके आदर्श खिलाड़ी पूर्व भारतीय कप्तान कपिल देव रहे हैं. उन्हें देखकर ही उन्होंने क्रिकेटर बनने का सपना देखा था. कपिल देव एक बेहतरीन ऑलराउंडर थे और सोमेन्द्र तिवारी भी अपने समय में ऑलराउंडर के तौर पर खेलते थे. वह छठवें नंबर पर बल्लेबाजी करने आते थे. वर्तमान समय में भारतीय क्रिकेटर अभिषेक शर्मा उनके पसंदीदा खिलाड़ी हैं. उनका कहना है कि अभिषेक शर्मा की तरह वह भी अपने खेल के दिनों में ताबड़तोड़ बल्लेबाजी किया करते थे. इसके अलावा वीरेंद्र सहवाग और श्रीकांत भी उनके पसंदीदा खिलाड़ियों में शामिल रहे हैं.
माता-पिता उनसे मिलकर अकादमी से जुड़ सकते
सोमेन्द्र तिवारी धौलपुर के उन बच्चों को भी मौका देना चाहते हैं, जो क्रिकेटर बनने का सपना देखते हैं, लेकिन आर्थिक परेशानी या सही मार्गदर्शन नहीं मिलने के कारण आगे नहीं बढ़ पाते. वह बताते हैं कि शहर का कोई भी बच्चा क्रिकेट सीखना चाहता है, तो वह इंदिरा गांधी स्टेडियम आकर उनसे मिल सकता है. वह यहां सुबह और शाम बच्चों को प्रशिक्षण देते हैं. इच्छुक बच्चे और उनके माता-पिता उनसे मिलकर अकादमी से जुड़ सकते हैं.
एक अच्छा कोच खिलाड़ी को रास्ता दिखाता
सोमेन्द्र तिवारी कहते हैं कि वह खुद भारतीय क्रिकेट टीम तक नहीं पहुंच पाए, लेकिन आज जब उनके प्रशिक्षण से निकले राहुल चाहर, दीपक चाहर और दूसरे खिलाड़ी देश का प्रतिनिधित्व करते हैं, तो उन्हें बहुत खुशी होती है. उनके लिए बच्चों की सफलता ही उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि है. वह चाहते हैं कि धौलपुर के ज्यादा से ज्यादा बच्चे क्रिकेट में आगे बढ़ें और अपने माता-पिता, शहर, राजस्थान और देश का नाम रोशन करें. उनका मानना है कि एक अच्छा कोच खिलाड़ी को रास्ता दिखाता है, लेकिन मंजिल तक पहुंचने के लिए खिलाड़ी को खुद मेहनत करनी पड़ती है.