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Ankita Rathore And Hasnain Ansari Love Story: मध्य प्रदेश के जबलपुर के बहुचर्चित हसनैन अंसारी और अंकिता राठौर की शादी का मामला एक बार फिर चर्चाओं में है. अपर कलेक्टर और विवाह पंजीयन अधिकारी ने शादी के आवेदन को खारिज कर दिया था. अब एक बार फिर से यह मामला चर्चा में है.
अंकिता-हसनैन की शादी पर मंडराए संकट के बादल!
Ankita Rathore And Hasnain Ansari Love Story: अंकिता-हसनैन शादी मामले में अब बहस सीधे विशेष विवाह अधिनियम की धारा 4 पर पहुंच गई है. इंदौर की अंकिता राठौर और जबलपुर के हसनैन अंसारी की शादी को लेकर अंकिता के पिता हीरालाल राठौर और विश्व हिंदू परिषद के प्रांत धर्म प्रसार प्रमुख दिग्विजय सिंह ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है. याचिका में धारा 4 की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है. 22 सितंबर को चीफ जस्टिस अल्पेश कोगजे और जस्टिस विवेक जैन की डिविजन बेंच में सुनवाई हुई, जहां कोर्ट ने केंद्र सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया है.
अंकिता राठौर और हसनैन अंसारी की शादी का विवाद अक्टूबर 2024 से सुर्खियों में है. दोनों ने विशेष विवाह अधिनियम के तहत शादी के लिए आवेदन किया था. इसके बाद मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा और अक्टूबर 2024 में कोर्ट ने दोनों को बालिग और आर्थिक रूप से स्वतंत्र मानते हुए पुलिस को सुरक्षा के आदेश दिए थे.
अंकिता के पिता ने लगाई है याचिका
अब अंकिता के पिता हीरालाल राठौर और दिग्विजय सिंह की ओर से डब्ल्यूपी नंबर 3407/2026 दायर की गई है. याचिका में विशेष विवाह अधिनियम की धारा 4 को संविधान के अनुच्छेद 14, 25 और 26 के संदर्भ में चुनौती दी गई है. याचिकाकर्ताओं ने मुस्लिम पर्सनल लॉ का हवाला देते हुए इस तरह के विवाह की वैधता पर सवाल उठाए हैं और विवाह रजिस्ट्रारों को ऐसे विवाह कराने से रोकने की अंतरिम मांग भी की है.
कब अलग-अलग धर्म दो बालिक लोग कर सकते हैं शादी
धारा 4 विशेष विवाह अधिनियम के तहत शादी की बुनियादी कानूनी शर्तें तय करती है. इनमें पहले से शादीशुदा न होना, वैध सहमति की क्षमता, पुरुष की न्यूनतम 21 और महिला की न्यूनतम 18 साल की उम्र और प्रतिबंधित रिश्ते में न होना शामिल है. इसी प्रावधान के तहत अलग-अलग धर्म के दो बालिग लोग शादी कर सकते हैं.
22 सितंबर की सुनवाई में याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता आकाश लालवानी ने पक्ष रखा. हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को जवाब के लिए समय दिया है. फिलहाल धारा 4 पर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है और न ही शादी पर कोई अंतिम रोक लगाई गई है. अब केंद्र के जवाब के बाद इस संवैधानिक चुनौती पर आगे सुनवाई होगी.