कौन हैं सुनील शर्मा और जसप्रीत, US ने क्यों इंडियन कपल पर ठोका बैन?
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अमेरिका ने ईरान से कथित कनेक्शन के चलते भारतीय कारोबारी सुनील कुमार शर्मा और उनकी पत्नी जसप्रीत प्रीति शाहिद पर प्रतिबंध लगा दिए हैं. अमेरिकी ट्रेजरी विभाग का आरोप है कि इस कपल ने फर्जी समुद्री रजिस्ट्रेशन का नेटवर्क चलाया. इसके जरिए ईरानी तेल ले जाने वाले प्रतिबंधित जहाजों को अलग-अलग देशों के झंडे और प्रमाणपत्र उपलब्ध कराए जाते थे. अमेरिका ने शर्मा से जुड़ी नौ कंपनियों और दो अन्य भारतीय नागरिकों को भी निशाना बनाया है. आखिर कौन हैं सुनील शर्मा और जसप्रीत? उनका नेटवर्क कैसे काम करता था और अमेरिकी प्रतिबंधों का क्या असर होगा? जानिए पूरी कहानी.
अमेरिका ने भारतीय कारोबारी सुनील शर्मा और पत्नी जसप्रीत शाहिद पर ईरान के तेल प्रतिबंधों से बचने में मदद का आरोप लगाकर प्रतिबंध लगाए. (फोटो Reuters)
अमेरिका ने ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए एक बार फिर बड़ा कदम उठाया है. इस बार उसकी कार्रवाई की जद में भारत का एक कारोबारी और उसकी पत्नी आ गए हैं. अमेरिका ने सुनील कुमार शर्मा और जसप्रीत प्रीति शाहिद पर प्रतिबंध लगा दिए हैं. आरोप है कि दोनों ने ईरान के तेल कारोबार पर लगे प्रतिबंधों से बचने में मदद की. बताया गया है कि इस भारतीय कपल ने समुद्री जहाजों के लिए फर्जी रजिस्ट्रेशन और सर्टिफिकेट जारी करने का नेटवर्क खड़ा कर रखा था. इसके जरिए ईरानी तेल ले जाने वाले प्रतिबंधित जहाजों को अलग-अलग देशों के झंडे के तहत चलने में मदद मिलती थी. आखिर कौन हैं सुनील शर्मा और जसप्रीत? इनका कारोबार कैसे चलता था और अमेरिका को इनके ईरान कनेक्शन से क्या परेशानी है? अमेरिकी ट्रेजरी विभाग की कार्रवाई ने इन सवालों को चर्चा में ला दिया है.
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका के वित्त मंत्रालय ने बुधवार को भारत और तुर्की में मौजूद कुछ लोगों और कंपनियों पर कार्रवाई का ऐलान किया. इसमें सुनील शर्मा की पत्नी जसप्रीत प्रीति शाहिद के अलावा दो अन्य भारतीय नागरिकों और शर्मा से जुड़ी नौ कंपनियों को भी निशाना बनाया गया है. अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि इस नेटवर्क ने ईरानी पेट्रोलियम ले जाने वाले प्रतिबंधित जहाजों को फर्जी पहचान और प्रमाणपत्र उपलब्ध कराए. इनमें ईरानी सेना और उससे जुड़े संगठनों की ओर से संचालित जहाज भी शामिल बताए गए हैं. यह कार्रवाई राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट का हिस्सा है. इसका मकसद ईरान की तेल से होने वाली कमाई पर रोक लगाना है ताकि वह इस पैसे का इस्तेमाल अपनी सैन्य गतिविधियों के लिए न कर सके.
कौन हैं सुनील शर्मा और जसप्रीत शाहिद?
- अमेरिका की कार्रवाई के केंद्र में भारत के कारोबारी सुनील कुमार शर्मा हैं. अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के मुताबिक उनकी पत्नी जसप्रीत प्रीति शाहिद भी इस कथित नेटवर्क को चलाने में मदद कर रही थीं. विभाग का आरोप है कि दोनों की समुद्री रजिस्ट्रेशन से जुड़ी धोखाधड़ी कम से कम 2014 से चल रही थी.
- अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार इस कपल ने ऐसी वेबसाइट और संस्थाएं बनाई थीं जो खुद को अलग-अलग देशों के समुद्री नियामक प्राधिकरण का प्रतिनिधि बताती थीं. जबकि संबंधित देशों की सरकारों से उन्हें ऐसी कोई आधिकारिक अनुमति नहीं मिली थी. इन वेबसाइटों पर जहाजों का रजिस्ट्रेशन कराने से लेकर नाविकों की ट्रेनिंग और पोतों को प्रमाणपत्र देने जैसी सेवाएं उपलब्ध कराने का दावा किया जाता था.
फर्जी झंडे के सहारे कैसे चलता था कारोबार?
- समुद्री व्यापार में किसी जहाज का झंडा बेहद अहम होता है. जिस देश के झंडे के तहत जहाज रजिस्टर्ड होता है उसके कानून और समुद्री नियम उस पर लागू होते हैं. आधिकारिक रजिस्ट्रेशन से संबंधित देश जहाज की निगरानी कर सकता है. सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन भी सुनिश्चित करता है.
- अमेरिकी ट्रेजरी विभाग का आरोप है कि शर्मा और शाहिद ने इसी व्यवस्था का गलत इस्तेमाल किया. उनका नेटवर्क अरूबा, गुयाना, माली, मोजाम्बिक, मलावी, सिंट मार्टेन और तिमोर-लेस्ते जैसे देशों के झंडे के तहत जहाजों का रजिस्ट्रेशन कराने का दावा करता था. आरोप है कि इन देशों की मंजूरी के बिना ही जहाजों को फर्जी रजिस्ट्रेशन और प्रमाणपत्र दिए गए. इससे ईरानी तेल ले जाने वाले प्रतिबंधित जहाज अपनी असली पहचान छिपाकर समुद्र में चल सकते थे.
ईरान के तेल कारोबार से क्या है कनेक्शन?
- अमेरिका का दावा है कि इस नेटवर्क ने ईरानी पेट्रोलियम की ढुलाई करने वाले प्रतिबंधित जहाजों को फर्जी झंडे और प्रमाणपत्र मुहैया कराए. इनमें ऐसे जहाज भी शामिल थे जो ईरानी सेना या उसके सहयोगी संगठनों की ओर से काम कर रहे थे. वॉशिंगटन के मुताबिक इस तरह की व्यवस्था ईरान को तेल बेचने और उस पर लगे प्रतिबंधों से बचने में मदद करती है.
- अमेरिका ने तुर्की की कंपनी फुगो ग्राउंड सर्विसेज इंक पर भी प्रतिबंध लगाया है. उस पर ईरान के प्रतिबंधित विमानन क्षेत्र को लगातार मदद देने का आरोप है. अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट के तहत हम कई बार साफ कर चुके हैं कि या तो आप हमारे साथ हैं या हमारे खिलाफ. हमें पता है कि आप कहां हैं. ईरानी शासन का समर्थन जारी रखने वालों पर हम प्रतिबंध लगाएंगे. फिर चाहे वे जमीन से मदद करें या समुद्र और हवाई रास्ते से.’
अमेरिका के प्रतिबंधों का क्या होगा असर?
अमेरिका के इस फैसले के बाद प्रतिबंधित लोगों और कंपनियों की अमेरिकी अधिकार क्षेत्र में आने वाली संपत्ति और वित्तीय हित फ्रीज किए जा सकते हैं. अमेरिकी नागरिकों और कंपनियों को इनके साथ कारोबार या वित्तीय लेनदेन करने की अनुमति नहीं होगी. हालांकि अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय यानी OFAC से विशेष मंजूरी मिलने पर कुछ लेनदेन संभव हो सकते हैं.
प्रतिबंधों का दायरा सिर्फ सीधे तौर पर नामित कंपनियों तक सीमित नहीं है. जिन कंपनियों में प्रतिबंधित व्यक्ति या संस्था की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष हिस्सेदारी 50 फीसदी या उससे अधिक है वे भी इसकी जद में आ सकती हैं. अमेरिका ने गैर-अमेरिकी कारोबारियों और कंपनियों को भी चेतावनी दी है. अगर वे प्रतिबंधों से बचने में मदद करते हैं या प्रतिबंधित लेनदेन को आगे बढ़ाते हैं तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है.