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शिवहर के राजकीय मध्य विद्यालय कटसरी जागीर में अंडा वितरण में गड़बड़ी का मामला सामने आया है. डीएम प्रतिभा रानी के औचक निरीक्षण में बच्चों ने बताया कि उन्हें अंडे की जगह बिस्कुट दिए जाते हैं. वहीं, स्कूल के रजिस्टर में अंडे की खरीद का बिल दर्ज था. डीएम ने हाजिरी रजिस्टर, एमडीएम स्टॉक रजिस्टर, कैश बुक समेत कई फाइलें जब्त कर लीं. स्कूल में बच्चों की कम उपस्थिति पर भी नाराजगी जताई.
स्कूल में घोटाला
शिवहर: बिहार के सरकारी स्कूलों में बच्चों के लिए चल रही योजनाओं में गड़बड़ी का एक मामला सामने आया है. शिवहर प्रखंड के राजकीय मध्य विद्यालय कटसरी जागीर में बच्चों को अंडे की जगह बिस्कुट दिए जाने का आरोप लगा है. हैरानी की बात यह है कि स्कूल के रजिस्टर में अंडे की खरीद का बिल दर्ज है. इस मामले का खुलासा डीएम प्रतिभा रानी के औचक निरीक्षण के दौरान हुआ. डीएम ने स्कूल से अटेंडेंस रजिस्टर, मिड डे मिल से जुड़े दस्तावेज और अन्य फाइलें जब्त कर ली हैं.
दरअसल सरकारी स्कूलों में मिड डे मिल योजना के तहत बच्चों को खाना दिया जाता है. इस योजना में तय दिन पर बच्चों को उबला हुआ अंडा भी दिया जाना है. इसके लिए सरकार की ओर से अलग से फंड दिए जाते हैं. लेकिन शिवहर के इस स्कूल में बच्चों को अंडा मिलने के बजाय बिस्कुट दिए जाने की बात सामने आई है.
डीएम के सामने बच्चों ने बताई सच्चाई
डीएम प्रतिभा रानी जब राजकीय मध्य विद्यालय कटसरी जागीर पहुंचीं, तो उन्होंने स्कूल की व्यवस्था का जायजा लिया. इस दौरान उन्होंने बच्चों से पूछा कि स्कूल में उन्हें अंडा मिलता है या नहीं. बच्चों ने बताया कि उन्हें अंडा नहीं दिया जाता है. उसकी जगह बिस्कुट दिया जाता है. बच्चों के इस जवाब से डीएम हैरान रह गईं. उन्होंने स्कूल के शिक्षकों से इस बारे में सवाल किया. लेकिन शिक्षक कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके. इसके बाद डीएम ने मिड डे मिल योजना से जुड़े डॉक्यूमेंट्स की जांच शुरू की.
रजिस्टर में अंडे का बिल, बच्चों को नहीं मिला अंडा
दस्तावेजों की जांच के दौरान सामने आया कि स्कूल के रिकॉर्ड में अंडे की खरीद का बिल दर्ज था. वहीं, बच्चों का कहना था कि उन्हें अंडे की जगह बिस्कुट दिया जाता है. ऐसे में स्कूल के रिकॉर्ड और बच्चों के बयान में अंतर सामने आया है. इस मामले को गंभीरता से लेते हुए डीएम ने स्कूल का हाजिरी रजिस्टर, एमडीएम स्टॉक रजिस्टर, कैश बुक और अन्य जरूरी फाइलें जब्त कर लीं. अब इन दस्तावेजों की जांच की जाएगी. इससे यह पता लगाने की कोशिश होगी कि स्कूल में अंडे की खरीद के नाम पर कितनी राशि खर्च की गई और बच्चों को वास्तव में क्या दिया गया.
बच्चों की कम उपस्थिति पर भी डीएम नाराज
निरीक्षण के दौरान स्कूल में बच्चों की कम उपस्थिति का मामला भी सामने आया. डीएम ने इस पर नाराजगी जताई. अब स्कूल में दर्ज बच्चों की कुल संख्या और रोजाना स्कूल आने वाले बच्चों की संख्या की भी जांच की जाएगी. इससे यह पता लगाया जाएगा कि स्कूल के रजिस्टर में दर्ज बच्चों की संख्या और वास्तविक उपस्थिति में कितना अंतर है. साथ ही यह भी देखा जाएगा कि बच्चों की कम उपस्थिति के पीछे क्या कारण हैं.
सरकारी योजनाओं की व्यवस्था पर उठे सवाल
इस मामले ने सरकारी स्कूलों में बच्चों के लिए चलाई जा रही योजनाओं की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. सरकार बच्चों को पौष्टिक भोजन देने के लिए राशि खर्च करती है. लेकिन अगर बच्चों को अंडे की जगह बिस्कुट दिया जा रहा है और रिकॉर्ड में अंडे की खरीद दर्ज है, तो यह गंभीर मामला है.