160 साल पुरानी दुश्मनी! डेमोक्रेटिक-रिपब्लिकन में जिसे भी मौका मिला, बिगाड़ दी राष्ट्रपति की दशा, निक्सन से क्लिंटन तक हो चुके हैं शिकार

160 साल पुरानी दुश्मनी! डेमोक्रेटिक-रिपब्लिकन में जिसे भी मौका मिला, बिगाड़ दी राष्ट्रपति की दशा, निक्सन से क्लिंटन तक हो चुके हैं शिकार


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ट्रंप फंसे! डेमोक्रेट-रिपब्लिकन में जिसे मौका मिला, बिगाड़ी राष्ट्रपति की दशा

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Donald Trump Trouble : डोनाल्ड ट्रंप बुरी मुसीबत में फंसे हैं, वह पहले कार्यकाल में दो बार महाभियोग झेल चुके हैं. अब डेमोक्रेटिक के एक बार फिर दोनों सदनों में ताकतवर होने के बाद ये तय माना जा रहा है कि ट्रंप को हटाने की कोशिशें हो सकती हैं. विभाजित सरकार में अक्सर ऐसा होता आया है.

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ट्रंप को इम्पीच करना आसान है, लेकिन हटाना मुश्किल.

अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी दोनों सदनों में बहुमत हार चुकी है. ट्रंप बौखलाए हुए हैं और दुनिया इस अनिश्चितता में है कि अब क्या होने वाला है. हालांकि अमेरिका के लिए ये पहला मौका नहीं है. इतिहास में ऐसा कई बार हो चुका है जब राष्ट्रपति किसी और पार्टी का रहा और दोनों सदनों में बहुमत विपक्षी पार्टी के पास रहा. अमेरिका में इसे डिवाइडेड गवर्नमेंट कहा जाता है. अगर विपक्षी दल किसी एक सदन में बहुमत हासिल कर ले, तब भी इसी टर्म का प्रयोग होता है.

डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन में दरअसल 160 साल से ज्यादा पुरानी दुश्मनी है. दरअसल सबसे पहले 1865 में ऐसा हुआ था जब अमेरिका में विभाजित सरकार बनी थी.  तब से ये पार्टियां एक-दूसरे के खिलाफ पूरी ताकत के साथ चुनाव में उतरती हैं. मिड टर्म चुनाव में जिसे भी मौका मिलता है वो दूसरे दल के राष्ट्रपति की दशा बिगाड़ देता है. अमेरिकी इतिहास में निक्सन से लेकर क्लिंटन तक इसका शिकार हो चुके हैं. अब यही संकट ट्रंप के सामने भी है. अपने पहले कार्यकाल में दो बार उनके खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव लाया जा चुका है. हालांकि सीनेट में पर्याप्त सीटें न होने की वजह से डेमोक्रेट्स को हर बार नाकामी हाथ लगती थी. इस बार मामला अलग है.

निक्सन और फोर्ड ने बिना बहुमत चलाई सरकार

अमेरिका में सबसे लंबी विभाजित सरकार 1969 से लेकर 1977 तक चली थी जब लगातार दो बार रिपब्लिकन पार्टी के निचर्ड निक्ससन और जेराल्ड फोर्ड राष्ट्रपति रहे. हालांकि दोनों सदनों में बहुमत डेमोक्रेट्स के पास रहा. यह विभाजित सरकार का सबसे लंबा दौर था. इससे पहले 1955 से 1961 तक ऐसा हुआ था जब जाइजनहावर रिपब्लिक राष्ट्रपित थे, लेकिन लगातार दोनों सदनों में डेमोक्रेट्स का कंट्रोल रहा. ऐसा ही 1995 से 2001 तक बिलक्लिंटन के दौर में रहा था जब रिपब्लिकन पार्टी दोनों सदनों में बहुमत में रही थी. . इसके बाद जॉर्ज डब्ल्यू बुश और ओबामा के दौर में भी विभाजित सरकारों के दौर रहे हैं.

विभाजित सरकार का सबसे बड़ा असर क्या होता है?

  • विभाजित सरकार की वजह से राष्ट्रपति के लिए अपनी पार्टी के एजेंडे से जुड़े विधेयक पास कराना मुश्किल हो जाता है.
  • बजट और सरकारी खर्च को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव के हालात बन जाते हैं.
  • कांग्रेस के दोनों सदनों में जिसके पास बहुमत होता है वह राष्ट्रपित प्रशासन की जाचं करा सकता है, निगरानी रख सकता है.
  • राष्ट्रपति को किसी भी तरह के कानून बनाने में मुश्किल का सामना करना पड़ता है.
  • राष्ट्रपति के पास वीटो का अधिकार होता है. इसे तभी पलटा जा सकता है जब दोनों सदनों में दो तिहाई बहुमत से विरोध में वोटिंग हो.

अमेरिका में कब-कब राष्ट्रपति की मुसीबत बनी विभाजित सरकार?

वॉटरगेट कांड: ये 1973 के दौर में हुआ था जब अमेरिका के राष्ट्रपति रिपब्लिकन पार्टी के रिचर्ड निक्सन थे. हालांकि 1969 से लेकर 1977 तक कांग्रेस के दोनों सदनों में डेमोक्रेटिक पार्टी के पास बहुमत रहा. जून 1972 में वॉटरगेट कमेटी ने जांच शुरू की और व्हाइट हाउस की भूमिका पर गंभीर सवाल उठे. निक्सन ने जांच से जुड़े टेप देने से इंकार किया. आखिरकार उनके खिलाफ डेमोक्रेटिक महाभियोग के तीन प्रताव लाए. 9 अगस्त 1974 को प्रतिनिधि सभा में वोटिंग से पहले ही निक्सन ने इस्तीफा दे दिया. वह अमेरिका इतिहास के पहले राष्ट्रपित थे, जिन्होंने महाभियोग की वजह से इस्तीफा दिया.

बिल क्लिंटन पर महाभियोग : 1994 के मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिक पार्टी ने हाउस और सीनेट पर कंट्रोल हासिल कर लिया. राष्ट्रपित डेमोक्रेटिक पार्टी के बिल क्लिंटन थे. 1998 में लेविंस्की प्रकरण की वजह से उन पर महाभियोग की कार्रवाई शुरू हुई. रिपब्लिकन बहुमत वाली प्रतिनिधि सभा ने क्लिंटन के खिलाफ महाभियोग के दो प्रस्ताव पारित किए. मामला सीनेट पहुंचा मगर वहां पर्याप्त वोट न मिलने की वजह से प्रस्ताव ढह गया.

जब 21 दिन तक ठप रही थी अमेरिकी सरकार

विभाजित सरकार का सबसे बड़ा असर 1995 में सामने आया था जब पहले पांच दिन और उसके बाद लगातार 21 दिन तक सरकार का कामकाज इप रहा था. इस दौरान 8 लाख सरकारी कर्मचारी अस्थायी रूप से काम से दूर रहे थे. दरअसल 1994 में जब रिपब्लिकन ने दोनों सदनों में बहुमत हासिल कर लिया तो दोनों दलों के बीच टकराव खुलकर सामने आया. क्लिंटन प्रशासन ने रिपब्लिकन प्रस्तावों का विरोध किया. बजट और खर्च पर सहमति नहीं बनी. आखिरकार अमेरिका में शटडाउन हो गया जो इतिहास का सबसे काला शटडाउन माना जाता है.



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