हमसफर एक्सप्रेस क्या है, क्यों और कहां चलती है ये ट्रेन? ऐसा नाम रखने का मतलब क्या, बाकी से कैसे अलग

हमसफर एक्सप्रेस क्या है, क्यों और कहां चलती है ये ट्रेन? ऐसा नाम रखने का मतलब क्या, बाकी से कैसे अलग


Humsafar Express: भारतीय रेलवे का नेटवर्क समय के साथ मॉडर्न और हाई टेक होता जा रहा है. देश के आम नागरिकों को आरामदायक, सुरक्षित और प्रीमियम सफर का अनुभव कराने के लिए रेलवे ने कई नई कैटेगरी की ट्रेनों की शुरुआत की गई. इनमें से ही एक बहुत लोकप्रिय और खास ट्रेन है हमसफर एक्सप्रेस. आज से करीब 10 साल पहले देश में पहली हमसफर ट्रेन चली थी. समझते हैं कि ये हमसफर ट्रेन क्या है, इसकी शुरुआत क्यों की गई और यह दूसरी ट्रेनों से किस तरह अलग है?

हमसफर ट्रेन क्या है?
हमसफर एक्सप्रेस भारतीय रेलवे द्वारा ऑपरेट की जाने वाली एक प्रीमियम और पूरी तरह से एयर कंडीशन लंबी दूरी की ट्रेन सेवा है. इस ट्रेन के सभी डिब्बे आधुनिक सुविधाओं से लैस होते हैं. हालांकि, इसकी शुरुआत मुख्य रूप से थर्ड एसी और कुछ चुनिंदा रूट्स पर स्लीपर कोच के साथ की गई थी.

इसकी शुरुआत क्यों हुई थी?
भारतीय रेलवे ने देश में लंबी दूरी के सफर को अधिक आरामदायक, सुविधाजनक और मॉडर्न बनाने के मकसद से हमसफर ट्रेन की परिकल्पना की थी. अक्सर लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों को साफ-सफाई, खान-पान और सुरक्षा को लेकर शिकायतें रहती थीं. इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने वर्ल्ड क्लास सुविधाओं वाली एक ऐसी ट्रेन सेवा शुरू की, जो यात्रियों को एक लग्जरी सफर का अहसास करा सके.

इसका नाम हमसफर क्यों पड़ा?
‘हमसफर’ एक उर्दू शब्द है, जिसका शाब्दिक अर्थ होता है सहयात्री यानी को-पैसेंजर. इसका मतलब होता है साथ सफर करने वाला साथी. चूंकि यह ट्रेन यात्रियों के लंबे सफर में एक बेहतरीन और आरामदायक साथी की तरह काम करती है और हर कदम पर उनकी सुख-सुविधा का ख्याल रखती है, इसलिए इसका नाम हमसफर एक्सप्रेस रखा गया.

हमसफर बाकी ट्रेनों से कैसे अलग है?
हमसफर ट्रेन अपनी खासियतों और आधुनिक फीचर्स की वजह से आम एक्सप्रेस या मेल ट्रेनों से काफी अलग और आधुनिक है. इनमें क्या खासियत होती है, आइए जानते हैं.

  • फायर एंड स्मोक डिटेक्शन: ट्रेन के कोचों में आग और धुएं का पता लगाने वाले ऑटोमैटिक सेंसर लगे हैं, जिससे किसी भी अनहोनी से बचा जा सकता है. इन्हें फायर ऐंड स्मोक डिटेक्शन सिस्टम कहा जाता है.
  • GPS आधारित सिस्टम: यात्रियों की सुविधा के लिए इसमें जीपीएस आधारित पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम लगा है, जो अगली आने वाले स्टेशन और ट्रेन की स्पीड की जानकारी देता है.
  • मोबाइल और लैपटॉप चार्जिंग: इसमें हर बर्थ पर अलग से चार्जिंग पॉइंट दिए गए हैं, यहां तक कि साइड की बर्थ पर भी चार्जिंग की पूरी व्यवस्था है.
  • बेबी नैपकिन बदलने की सुविधा: इस ट्रेन के कोचों में छोटे बच्चों के साथ सफर करने वाली महिलाओं के लिए डायपर बदलने की खास टेबल दी गई है.
  • सीसीटीवी कैमरे: सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए हर कोच के गलियारे में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं.
  • कचरे के लिए डस्टबिन: ट्रेन के हर कोच में कचरे के खास इंतजाम रहता है. इसके लिए हर केबिन में डस्टबिन की सुविधा मिलती है.
  • मूक बधिर के लिए ब्रेल लिपि: ऐसे यात्री जो देखने और सुनने में असमर्थ होते हैं, उनके लिए बर्थ के नंबर को ब्रेल लिपि में लिखा जाता है. इससे कि उन्हें असुविधा ना हो.

इन सबके साथ ही हर एक बर्थ पर रीडिंग लाइट, पर्दों की व्यवस्था, बायो-टॉयलेट, कोचों पर विनाइल कोटिंग की जाती है जिससे यह बाहर से हमेशा चमकदार और आकर्षक दिखती है.

सबसे पहली हमसफर ट्रेन कहां से कहां तक चली थी?
भारत की सबसे पहली हमसफर एक्सप्रेस की शुरुआत 16 दिसंबर 2016 को हुई थी. यह ट्रेन यूपी के गोरखपुर जंक्शन से दिल्ली के आनंद विहार टर्मिनल के बीच चलाई गई थी. यह सर्विस अभी भी जारी है.

हमसफर ट्रेनें कहां से कहां तक चलती हैं?
हमसफर ट्रेनें भारत के तमाम बड़े महानगरों, बिजनेस सेंटर और धार्मिक स्थलों को आपस में जोड़ने के लिए लंबी दूरी के व्यस्त रूट्स पर चलाई जाती हैं. जैसे अगरतला से बेंगलुरु, सियालदह से जम्मू तवी, अहमदाबाद से चेन्नई, नई दिल्ली के आनंद विहार से प्रयागराज तक के लिए.

भारतीय रेलवे के अलग-अलग जोन के तहत समय-समय पर रूट्स की मांग को देखते हुए दर्जनों हमसफर एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन देश के अलग-अलग हिस्सों में किया जा रहा है. ये 30 से अधिक जोड़े में चलती हैं.



Source link