US Sanction on Indian Companies: India-Iran| हार से और बौखलाए ट्रंप? अब भारतीय कंपनियों पर अमेरिका ने ठोका सैंक्शन ईरान से दोस्ती निभाने पर एक्शन

US Sanction on Indian Companies: India-Iran| हार से और बौखलाए ट्रंप? अब भारतीय कंपनियों पर अमेरिका ने ठोका सैंक्शन ईरान से दोस्ती निभाने पर एक्शन


Agency:एजेंसियां

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US Slaps Sanctions on Indian-Turkish Companies: अमेरिका में मिडटर्म चुनाव खत्म होने के बाद अब तक ये सोचा ही जा रहा है कि प्रशासनिक नीतियों में क्या बदलाव होंगे, इसी बीच एक ऐसी खबर भारत के लिए आई है, जो कतई खुश करने वाली नहीं है. प्रशासन ने भारतीय कंपनियों और कारोबारियों पर पाबंदी लगा दी है क्योंकि उन पर ईरान की मदद का आरोप लगाया गया है.

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डोनाल्ड ट्रंप. (रॉयटर्स)

US action on India: अमेरिका में राजनीतिक बवाल चल रहा है और इसी बीच ट्रंप प्रशासन ने कुछ ऐसा किया है, जो भारत और तुर्की के कारोबारियों को झटका देना वाला है. ईरान तनाव की आंच इन दोनों देशों तक आ रही है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने ईरान की मदद करने के आरोप में भारत और तुर्किये से जुड़े कई लोगों और कंपनियों पर नए प्रतिबंध लगाए हैं. अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने भारत के कारोबारी सुनील कुमार शर्मा, उनकी पत्नी जसप्रीत प्रीति शाहिद और उनसे जुड़ी कंपनियों को निशाना बनाया है. अमेरिका का आरोप है कि इन लोगों ने फर्जी दस्तावेज और जहाजों के गलत रजिस्ट्रेशन के जरिए ईरान को प्रतिबंधों से बचकर तेल बेचने में मदद की.

अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने बुधवार को नए प्रतिबंधों की घोषणा की. यह कार्रवाई ट्रंप प्रशासन के ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ के तहत की गई है. इस अभियान का उद्देश्य ईरान की तेल से होने वाली कमाई रोकना और उसकी आर्थिक गतिविधियों पर दबाव बढ़ाना है. अमेरिका ने भारत में रहने वाले सुनील कुमार शर्मा और उनकी पत्नी जसप्रीत प्रीति शाहिद को इस कथित नेटवर्क का प्रमुख बताया है. इनके अलावा दो अन्य भारतीय नागरिकों और शर्मा से जुड़ी नौ कंपनियों और संस्थाओं पर भी प्रतिबंध लगाए गए हैं.

फर्जी रजिस्ट्रेशन से ईरान को कैसे मिल रही थी मदद?

अमेरिकी वित्त मंत्रालय का आरोप है कि शर्मा और उनके सहयोगियों ने कई देशों के नाम पर फर्जी समुद्री रजिस्ट्रेशन और प्रमाणपत्र तैयार किए थे. इसके जरिए ईरान का तेल ले जाने वाले प्रतिबंधित जहाज अपनी असली पहचान छिपाकर अंतरराष्ट्रीय नियमों से बच सकते थे. अमेरिका के मुताबिक इस नेटवर्क ने गयाना, इस्वातिनी और लाओस जैसे देशों के नाम पर जहाजों को झूठे झंडे और प्रमाणपत्र उपलब्ध कराए. इन जहाजों में कुछ ऐसे भी थे जो ईरानी सेना और उससे जुड़े संगठनों के लिए काम कर रहे थे. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की गतिविधियों से ईरान को प्रतिबंधों के बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपना तेल पहुंचाने में मदद मिल रही थी.

कंपनियों पर ईरान के प्रतिबंधित तेल को बेचने का आरोप. (सांकेतिक तस्वीर)

तुर्किये की कंपनी पर भी कार्रवाई

अमेरिका ने केवल भारत से जुड़े लोगों और कंपनियों को ही निशाना नहीं बनाया है. तुर्किये की कंपनी फुगो ग्राउंड सर्विसेज इंक पर भी प्रतिबंध लगाए गए हैं. अमेरिका का आरोप है कि यह कंपनी प्रतिबंधित ईरानी एयरलाइंस को एयरपोर्ट पर जरूरी सेवाएं और ग्राउंड हैंडलिंग की सुविधा उपलब्ध करा रही थी.

ट्रंप प्रशासन की ईरान पर आर्थिक घेराबंदी

अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने साफ कहा है कि ईरान की मदद करने वाले लोगों और कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी. उन्होंने चेतावनी दी कि जमीन, समुद्र या हवाई रास्ते से ईरान की मदद करने वालों को भी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है. अमेरिका का दावा है कि उसकी कार्रवाई से ईरान की अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव पड़ा है. वहां की मुद्रा रियाल रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई है और महंगाई करीब 90 प्रतिशत तक होने का दावा किया गया है.

क्या भारत के खिलाफ है कार्रवाई?

इस कार्रवाई से साफ है कि ट्रंप प्रशासन ईरान पर दबाव बनाने के लिए अब केवल ईरानी संस्थानों तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि दूसरे देशों में मौजूद कथित मददगार नेटवर्क पर भी कार्रवाई कर रहा है. हालांकि इन प्रतिबंधों को भारत सरकार के खिलाफ कार्रवाई नहीं माना जाना चाहिए. फिलहाल निशाने पर अमेरिकी आरोपों से जुड़े विशेष व्यक्ति और कारोबारी संस्थाएं हैं.



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