Last Updated:
Ground Report Deepotsav 2026 : अयोध्या में 10वें दीपोत्सव की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं. राम की पैड़ी से लेकर सरयू नदी के घाटों तक दीप सजाए जाने लगे हैं. सात नवंबर को होने वाले दीपोत्सव में इस बार 30 लाख से अधिक दीप प्रज्वलित कर नया विश्व कीर्तिमान बनाने का लक्ष्य है. इसके लिए अवध विश्वविद्यालय के करीब 35 हजार स्वयंसेवक दिन-रात जुटे हुए हैं. स्वयंसेवक निर्धारित दूरी और मानकों के अनुसार दीपों को व्यवस्थित तरीके से बिछा रहे हैं, ताकि दीप प्रज्वलन के समय किसी प्रकार की परेशानी न हो. पिछले दीपोत्सव में 26 लाख 17 हजार 512 दीप जलाए गए थे. प्रशासन और विश्वविद्यालय की कोशिश है कि निर्धारित समय से पहले सभी तैयारियां पूरी कर ली जाएं.
अयोध्या. रामनगरी अयोध्या में 10वें दीपोत्सव को लेकर तैयारियां युद्ध स्तर पर शुरू हो गई हैं. राम की पैड़ी से लेकर सरयू नदी के घाटों तक दीप सजाने का काम तेजी से चल रहा है. घाटों पर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड की टीम की ओर से निर्धारित मानकों के अनुरूप दीपक बिछाए जा रहे हैं. सात नवंबर को आयोजित होने वाले दीपोत्सव में इस बार 30 लाख से अधिक दीप प्रज्वलित कर नया विश्व कीर्तिमान बनाने का लक्ष्य रखा गया है. इस ऐतिहासिक आयोजन को सफल बनाने के लिए अवध विश्वविद्यालय के करीब 35 हजार स्वयंसेवक दिन-रात जुटे हुए हैं. उपराष्ट्रपति के मुख्य अतिथि के रूप में अयोध्या आगमन से इस बार का दीपोत्सव और भी खास होने जा रहा है.
पांच नवंबर तक बिछ जाएंगे दीपक
दीपोत्सव की तैयारियों के बीच रामनगरी के घाटों पर उत्सव का माहौल दिखाई देने लगा है. राम की पैड़ी सहित कई घाटों पर दीपक सजाने का काम शुरू हो चुका है. स्वयंसेवक निर्धारित दूरी और मानकों के अनुसार दीपों को व्यवस्थित तरीके से बिछा रहे हैं, ताकि दीप प्रज्वलन के समय किसी प्रकार की परेशानी न हो. चार और पांच नवंबर को घाटों पर दीपक बिछाने का काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. इसके बाद छह नवंबर तक दीपों में बाती लगाने और तेल भरने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी. सात नवंबर को दीपोत्सव पर एक साथ लाखों दीप प्रज्वलित कर पूरी अयोध्या को रोशनी से जगमग किया जाएगा.
पिछले रिकॉर्ड को तोड़ने की तैयारी
अयोध्या दीपोत्सव में हर साल नया इतिहास रचने का प्रयास किया जाता है. पिछले दीपोत्सव में 26 लाख 17 हजार 512 दीप प्रज्वलित कर विश्व कीर्तिमान स्थापित किया गया था. इस बार आयोजन को और भव्य बनाने के लिए 30 लाख से अधिक दीप जलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए अवध विश्वविद्यालय प्रशासन के साथ हजारों स्वयंसेवक जुटे हुए हैं. विश्वविद्यालय परिसर से लेकर दीपोत्सव के लिए निर्धारित घाटों तक दीपों की व्यवस्था की जा रही है. स्वयंसेवकों को अलग-अलग घाटों की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिससे दीप सजाने का काम समय से पूरा किया जा सके.
अलग-अलग टीमें बनाई
अवध विश्वविद्यालय की ओर से घाट संख्या एक से 35 और भजन संध्या स्थल पर पहले ही दीपक पहुंचाए जा चुके हैं. शेष घाटों पर भी दीपक पहुंचाने का काम जारी है. दीपों को निर्धारित क्रम में सजाने के बाद उनमें बाती और तेल डालने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी. इसके लिए स्वयंसेवकों की अलग-अलग टीमें बनाई गई हैं. प्रशासन और विश्वविद्यालय की कोशिश है कि निर्धारित समय से पहले सभी तैयारियां पूरी कर ली जाएं.
आगे का प्लान
अवध विश्वविद्यालय के एक स्वयंसेवक ने लोकल 18 को बताया कि इस बार दीपोत्सव में उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन के आगमन को लेकर सभी लोग बेहद उत्साहित हैं. आज से घाटों पर दीपक लगाने का काम किया जा रहा है. अगले दो दिनों तक दीप सजाएंगे. इसके बाद दीपों में बाती डालेंगे और फिर तेल भरने का काम किया जाएगा. इस ऐतिहासिक आयोजन का हिस्सा बनकर हम काफी उत्साहित हैं. 35 हजार स्वयंसेवकों की मेहनत, प्रशासन की तैयारियों और लाखों दीपों की रोशनी के बीच अयोध्या सात नवंबर को एक बार फिर दुनिया का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने की तैयारी में है.