APEC Summit 2026 : जिनपिंग, पुतिन और ट्रंप की महा-मुलाकात, क्या है शैनजेन APEC समिट का खेल, 3 सुपरपावर्स पलटने वाले हैं ग्लोबल ऑर्डर?

APEC Summit 2026 : जिनपिंग, पुतिन और ट्रंप की महा-मुलाकात, क्या है शैनजेन APEC समिट का खेल, 3 सुपरपावर्स पलटने वाले हैं ग्लोबल ऑर्डर?


दक्षिण एशिया से लेकर पश्चिमी देशों की राजनीति में इन दिनों एक ही नाम की सबसे ज्यादा चर्चा है और वो है, शैनजेन APEC शिखर सम्मेलन (APEC Summit). इस महासम्मेलन में अब महज दो हफ्ते का वक्त बचा है. लेकिन अभी तक अमेरिका, चीन और रूस ने सस्पेंस का दरवाजा नहीं खोला है. दुनिया भर की कूटनीतिक निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक साथ एक ही मेज पर आमने-सामने बैठेंगे? अगर ये तीनों सुपरपावर्स आमने-सामने आएंगे तो कौन से मुद्दे रखे जाएंगे?

चीन-अमेरिका और रूस के बीच चल क्या रहा है?

फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बीजिंग, मॉस्को और वॉशिंगटन के बड़े अधिकारी दुनिया की इन तीनों महाशक्तियों के शीर्ष नेताओं के बीच एक ऐतिहासिक त्रिपक्षीय बैठक आयोजित करने के लिए पर्दे के पीछे गंभीर बातचीत कर रहे हैं. अगर ये महा-मुलाकात सचमुच होती है, तो ये मॉडर्न इतिहास का सबसे बड़ा कूटनीतिक मोड़ साबित हो सकता है. लेकिन बड़ा सवाल ये है कि क्या ये G3 जैसी महा-बैठक वाकई मुमकिन है, या फिर तीनों देशों के अपने-अपने राजनीतिक पेंच इसमें सबसे बड़ा रोड़ा बनेंगे?

APEC Summit में ‘त्रिकोण महा-वार्ता’ की तैयारी

रूस के राष्ट्रपति भवन क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने हाल ही में इस बात की पुष्टि की है कि शी जिनपिंग, पुतिन और ट्रंप के बीच इस बैठक को आयोजित करने की दिशा में तेजी से ‘काम जारी’ है.

रिपोर्ट्स बताती हैं कि वॉशिंगटन और मॉस्को दोनों ही चीन पर लगातार दबाव बना रहे हैं कि वो इस त्रिपक्षीय बैठक के लिए अपनी हरी झंडी दे दे. हालांकि, दूसरी तरफ चीनी विदेश मंत्रालय का रुख अब तक काफी सधा हुआ, नपा-तुला और सतर्क रहा है. चीन का कहना है कि वो सभी संबंधित पक्षों के साथ संपर्क में है, लेकिन उसने अभी तक कोई पक्का और ठोस वादा नहीं किया है. बीजिंग फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है क्योंकि वो जानता है कि इस खेल के नफे-नुकसान बहुत बड़े हैं.

बीजिंग के लिए बड़ा कूटनीतिक दांव: क्या चीन पलटना चाहता है विश्व राजनीति का पासा?

अगर ये बैठक चीन के शैनजेन शहर में सफल हो जाती है, तो इसका सबसे बड़ा सियासी और कूटनीतिक फायदा सीधे तौर पर शी जिनपिंग को मिलेगा. अपनी खुद की सरज़मीं पर दुनिया के दो सबसे ताकतवर और चर्चित नेताओं की मेजबानी करके चीन पूरी दुनिया को ये संदेश देना चाहता है कि अब ग्लोबल पॉलिटिक्स की धुरी पश्चिम से खिसककर पूरी तरह पूर्व की ओर झुक चुकी है.

लेकिन चीन के लिए ये राह इतनी सीधी भी नहीं है. बीजिंग इस बात से अच्छी तरह वाकिफ है कि ट्रंप और पुतिन जैसे अनिश्चित स्वभाव वाले नेताओं के साथ एक ही मंच साझा करने से अंतरराष्ट्रीय मीडिया का पूरा ध्यान मुख्य APEC एजेंडे से हटकर इन तीनों नेताओं की निजी केमिस्ट्री और तनातनी पर टिक जाएगा. चीन नहीं चाहता कि उसकी घरेलू अर्थव्यवस्था से जुड़ा ये बड़ा मंच किसी दूसरे ड्रामे का अखाड़ा बन जाए.

तीन महाशक्तियां, तीन बिल्कुल अलग प्राथमिकताएं

कूटनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भले ही ये बैठक किसी तरह हो जाए, लेकिन किसी बहुत बड़े और ठोस नतीजे पर पहुंच पाना लगभग नामुमकिन सा लगता है. इसकी सबसे बड़ी वजह ये है कि इन तीनों ही देशों की अपनी-अपनी प्राथमिकताएं एक-दूसरे से कोसों दूर हैंय

  1. अमेरिका (ट्रंप का नजरिया): डोनाल्ड ट्रंप का पूरा फोकस व्यापार घाटे, भारी-भरकम टैरिफ और वैश्विक बाजारों पर अमेरिका का पुराना दबदबा बनाए रखने पर होगा. वो हर बैठक को एक ‘डील’ की तरह देखते हैं.
  2. रूस (पुतिन का नजरिया): व्लादिमीर पुतिन पश्चिमी देशों द्वारा थोपी गई पाबंदियों को ढीला करवाने और यूक्रेन संकट के बाद रूस की खोई हुई ग्लोबल इमेज को दोबारा चमकाने का मौका तलाश रहे हैं.
  3. चीन (शी जिनपिंग का नजरिया): शी जिनपिंग का मुख्य ध्यान अपनी सुस्त पड़ती घरेलू अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने, अमरीकी ट्रेड वॉर से राहत पाने और ताइवान के संवेदनशील मुद्दे पर अपनी लक्ष्मण रेखा खींचने पर है.

वो ‘एक बड़ी बात’ जो इस महा-मुलाकात को आखिरी वक्त में रद्द करवा सकती है

अब बात करते हैं उस सबसे बड़े रोड़े की, जो शी जिनपिंग, पुतिन और ट्रंप की इस ऐतिहासिक मुलाकात को ऐन मौके पर भी फुस्स कर सकता है और वो है आपसी अविश्वास और एजेंडे पर आम सहमति का पूरी तरह अभाव.

चीन इस बात को लेकर बेहद डरा हुआ है कि ट्रंप का बेहद अप्रत्याशित स्वभाव किसी भी पहले से तय समझौते या शालीनता को एक मिनट में मटियामेट कर सकता है. अगर बीजिंग को जरा भी ये शक हुआ कि ट्रंप इस मंच का इस्तेमाल अपने घरेलू वोटर्स को लुभाने या चीन को दुनिया के सामने नीचा दिखाने के लिए करेंगे, तो चीन इस त्रिपक्षीय बैठक से हाथ खींच लेगा. ऐसे में वो सिर्फ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकों तक ही खुद को सीमित रखने का सुरक्षित रास्ता चुनेगा.

क्या सच होगी ये ऐतिहासिक मुलाकात या महज एक प्रोपेगैंडा?

APEC समिट से ठीक दो हफ्ते पहले चल रही ये कूटनीतिक रस्साकशी ये चीख-चीख कर कह रही है कि भले ही तीनों देशों के बीच छत्तीस का आंकड़ा हो, लेकिन सत्ता के खेल में संवाद के दरवाजे कभी पूरी तरह बंद नहीं होते.

ये महा-मुलाकात आखिरकार एक त्रिपक्षीय ‘G3’ मंच का रूप लेगी या फिर सिर्फ अलग-अलग कमरों में होने वाली औपचारिक वार्ताओं में सिमट कर रह जाएगी, इसका फैसला आने वाले कुछ ही दिनों में हो जाएगा. लेकिन इतना तय है कि शैनजेन का ये समंदर किनारे बसा शहर 2026 की सबसे बड़ी और सबसे रोमांचक कूटनीतिक बिसात बनने जा रहा है, जिस पर पूरी दुनिया की नजरें गड़ी हुई हैं.



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