मुरादाबाद: समूह से जुड़कर बदली 52 महिलाओं की जिंदगी, घर पर बैठे हर महीने कमा रहीं अच्छा मुनाफा

मुरादाबाद: समूह से जुड़कर बदली 52 महिलाओं की जिंदगी, घर पर बैठे हर महीने कमा रहीं अच्छा मुनाफा


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Moradabad News: मुरादाबाद की महिलाओं ने घर बैठे हाथों के हुनर को कमाई का जरिया बना लिया है. यहां एक समूह से जुड़ी 52 महिलाएं मिलकर पीतल, एल्युमिनियम, स्टील और बुनाई से जुड़ी कई तरह की चीजें तैयार कर रही हैं. इनमें टोकरी, पल्ले और ढलाई के सामान शामिल हैं. समूह की शुरुआत 10 महिलाओं ने की थी, लेकिन काम बढ़ने के साथ गांव की दूसरी महिलाएं भी इससे जुड़ती गईं. महिलाएं घर पर ही कच्चे माल से बुनाई और फिनिशिंग का काम करती हैं और मेहनत के हिसाब से कमाई करती हैं. समूह की महीने भर की आमदनी लाखों रुपये तक पहुंच जाती है.

मुरादाबाद: मुरादाबाद की महिलाएं अब घर पर ही अलग-अलग तरह के सामान तैयार करके अच्छी आमदनी कर रही हैं. यहां महिलाओं के एक समूह से शुरुआत में 10 महिलाएं जुड़ी थीं, लेकिन धीरे-धीरे इस काम से गांव की 52 महिलाएं जुड़ गईं. ये सभी महिलाएं मिलकर पीतल, एल्युमिनियम, स्टील और लोहे के सामान के साथ कपड़े की बुनाई से जुड़ी चीजें, टोकरियां और ढलाई के सामान तैयार करती हैं.

इस काम से महिलाओं को रोजगार मिला है और वे अपनी मेहनत के हिसाब से पैसे कमा रही हैं. समूह की अध्यक्ष अनवरा खान के मुताबिक, समूह की मुख्य सदस्य 20 हजार रुपये से अधिक तक की आमदनी कर लेती हैं. वहीं, दूसरी महिलाएं रोजाना 200 से 500 और कुछ महिलाएं 600 रुपये तक कमा लेती हैं. पूरे समूह की महीने की कमाई लाखों रुपये तक पहुंच जाती है.

10 महिलाओं के साथ शुरू किया था समूह

समूह की अध्यक्ष और समूह सखी अनवरा खान ने बताया कि उन्होंने करीब 7 साल पहले इस समूह से जुड़कर काम शुरू किया था. उस समय ब्लॉक की टीम उनके गांव आई थी. टीम ने महिलाओं को समूह के बारे में जानकारी दी और इससे जुड़ने की सलाह दी. इसके बाद उन्होंने 10 महिलाओं के साथ मिलकर समूह बनाया और काम शुरू किया. अनवरा ने बताया कि शुरुआत में समूह को 1 लाख 10 हजार रुपये की धनराशि मिली थी. इसी पैसे से उन्होंने अपना कारोबार शुरू किया. धीरे-धीरे काम बढ़ने लगा और गांव की दूसरी महिलाएं भी इससे जुड़ती गईं. आज उनके साथ कुल 52 महिलाएं काम कर रही हैं.

दिल्ली से मंगवाती हैं कच्चा माल

अनवरा खान ने बताया कि उनके समूह में पीतल, एल्युमिनियम और स्टील समेत कई तरह के सामान तैयार किए जाते हैं. महिलाएं अलग-अलग तरह की टोकरियां, ढलइयां और बुनाई से जुड़ी चीजें बनाती हैं. इसके लिए कच्चा माल दिल्ली से मंगवाया जाता है. इसके बाद महिलाएं घर पर ही सामान की बुनाई और फिनिशिंग का काम करती हैं.

मेहनत के हिसाब से मिलती है कमाई

अनवरा के मुताबिक, समूह से जुड़ी सभी महिलाओं की कमाई एक जैसी नहीं है. कोई महिला 100 रुपये कमाती है तो कोई 500 रुपये तक. यह उनकी मेहनत और काम पर निर्भर करता है. समूह की मुख्य सदस्य 20 हजार रुपये से अधिक की आमदनी कर लेती हैं. वहीं, दूसरी महिलाएं रोजाना 200 से 500 रुपये और कुछ 600 रुपये तक कमा लेती हैं. उन्होंने बताया कि सभी महिलाएं मिलकर काम करती हैं और इससे पूरे समूह की महीने की आमदनी लाखों रुपये तक पहुंच जाती है. महिलाएं अपनी मेहनत से अच्छी कमाई कर रही हैं और समूह से जुड़कर खुश हैं.



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