Russia Ukraine War: 1200 दिन की जंग और ‘सुपर स्ट्राइक’: रूस के सबसे भयानक हमले के बीच शांति वार्ता या आर-पार की लड़ाई?

Russia Ukraine War: 1200 दिन की जंग और ‘सुपर स्ट्राइक’: रूस के सबसे भयानक हमले के बीच शांति वार्ता या आर-पार की लड़ाई?


यूक्रेन युद्ध को शुरू हुए 1200 से भी ज्यादा दिन बीत चुके हैं, लेकिन तबाही की आग ठंडी होने के बजाय और ज्यादा भड़क गई है. रूस ने यूक्रेन पर अब तक का सबसे बड़ा और भयानक हवाई हमला किया है. एक तरफ जहां मिसाइलों और ड्रोन के धमाकों से यूक्रेन का कोना-कोना थर्रा उठा है, वहीं अस्पताल और पावर ग्रिड ध्वस्त होने से लाखों लोग अंधेरे और दहशत के साए में जीने को मजबूर हैं. दूसरी तरफ, वाशिंगटन से लेकर अबू धाबी तक कूटनीतिक गलियारों में जंग रोकने की सुगबुगाहट भी तेज हो गई है. ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि इस हमले के पीछे पुतिन की एक छुपी हुई चाल है.

अस्पताल पर बारूद और बुझती रोशनियां: खारकीव में तबाही का नजारा

2 नवंबर की रात यूक्रेन के लिए किसी भयावह सपने से कम नहीं थी. रूस ने खारकीव के एक बड़े सिटी क्लिनिकल अस्पताल पर सीधे मिसाइल दाग दी. ये धमाका सीधे कार्डियोलॉजी विभाग में हुआ, जहां गंभीर मरीज अपना इलाज करा रहे थे.

73 लोग घायल: राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की के मुताबिक, इस अस्पताल हमले में कम से कम 73 लोग घायल हुए हैं.

1000 से ज्यादा खिड़कियां चकनाचूर: खारकीव के मेयर इहोर तेरेखोव ने बताया कि बमबारी इतनी तीव्र थी कि अस्पताल की इमारतों के हजार से अधिक कांच टूटकर हवा में बिखर गए.

लेकिन तबाही यहीं नहीं रुकी. अस्पताल को निशाना बनाने के साथ-साथ रूस ने यूक्रेन के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को तबाह करने का एक सुनियोजित ‘कॉम्प्लेक्स अटैक’ शुरू किया.

289 ड्रोन और 76 मिसाइलें: एक ही रात में आसमान से बरसा बारूद

यूक्रेनी रक्षा बलों के अनुसार, रूस ने इस हमले में अपनी पूरी ताकत झोंक दी. यूक्रेन के ओडेसा, चेरकासी, जितोमिर, विन्नित्सिया, खारकीव, नीप्रो, चेरनिव्त्सी, चेरनिहिव और रिवने जैसे 9 बड़े क्षेत्रों की बिजली सप्लाई को निशाना बनाया गया. जितोमिर क्षेत्र के गवर्नर विटाली बुनेचको के अनुसार, हमले के तुरंत बाद 1.8 लाख से अधिक लोग बिना बिजली के अंधेरे में रहने को मजबूर हो गए. ओडेसा में ग्रिड को ढहने से बचाने के लिए ब्लैकआउट के कड़े नियम लागू करने पड़े हैं.

  • 289 सुसाइड ड्रोन
  • 17 बैलिस्टिक मिसाइलें
  • 59 क्रूज मिसाइलें

हालांकि, रूस के रक्षा मंत्रालय ने इस हमले की पुष्टि करते हुए अपना रुख साफ किया. उनका दावा है कि उन्होंने केवल उन बिजली सुविधाओं को निशाना बनाया है जो यूक्रेन की सेना और रक्षा कारखानों को बिजली सप्लाई कर रही थीं.

UN की सख्त फटकार: ‘ये अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन’

इस घातक हमले से महज एक दिन पहले रूस ने एक मानवीय सहायता वितरण केंद्र पर भी हमला किया था, जिसमें 33 बेकसूर लोगों की जान चली गई थी. संयुक्त राष्ट्र (UN) के मानवाधिकार मिशन ने इन हमलों पर बेहद कड़ा रुख अपनाया है. यूएन मिशन की प्रमुख डेनिएल बेल ने कहा ‘मानवीय सहायता बांटने की जगह और समय की जानकारी पहले से सार्वजनिक थी. या तो रूसी सेना को अच्छी तरह पता था कि वहां आम नागरिक मौजूद हैं, या फिर उन्होंने हमले से पहले ये बुनियादी जांच करने की जहमत ही नहीं उठाई’.

यूएन का मानना है कि आम नागरिकों और अस्पतालों को इस तरह निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का सीधा उल्लंघन हो सकता है.

यूक्रेन का पलटवार: रूस की रिफाइनरी में लगी आग

ऐसा नहीं है कि जंग सिर्फ एक तरफा चल रही है. यूक्रेन ने भी रूसी सीमा के भीतर जासूसी और हमलावर ड्रोन भेजकर करारा जवाब दिया है.

रूस के यारोस्लाव्ल क्षेत्र में स्थित एक प्रमुख तेल रिफाइनरी पर यूक्रेनी ड्रोन ने सटीक निशाना साधा. क्षेत्रीय गवर्नर मिखाइल येवरायेव के मुताबिक, इस हमले के बाद रिफाइनरी में भीषण आग लग गई और दो कर्मचारी गंभीर रूप से घायल हो गए. यूक्रेन लगातार रूस के ईंधन और ऊर्जा ठिकानों को नुकसान पहुंचाकर उसकी युद्ध क्षमताओं को कमजोर करने की रणनीति पर काम कर रहा है.

अबू धाबी में शांति की उम्मीद या सिर्फ दिखावा?

इस भीषण गोलाबारी और तबाही के बीच, पर्दे के पीछे शांति की मेज सजाई जा रही है. अमेरिका अब इस 1200 दिनों से चले आ रहे बवाल को खत्म करने के लिए बेहद सक्रिय नजर आ रहा है.

अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने जानकारी दी है कि अगले हफ्ते अबू धाबी में अमेरिका, रूस और यूक्रेन के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच एक अहम बैठक होने जा रही है. टेबल पर होंगे ये 4 बड़े मुद्दे होंगे-

  1. युद्ध विराम और डी-एस्केलेशन : सीमाओं पर सैन्य तनाव घटाना.
  2. युद्धोत्तर सुरक्षा इंतजाम : युद्ध खत्म होने के बाद यूक्रेन और यूरोप का सुरक्षा ढांचा कैसा होगा.
  3. मानवीय सहायता : बंदियों की रिहाई और नागरिक राहत.
  4. पुनर्निर्माण: तबाह हुए यूक्रेन को आर्थिक रूप से फिर से खड़ा करने की योजना.

इसके अलावा, अमेरिकी वार्ताकार ब्रुसेल्स में फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, यूरोपीय संघ और NATO के प्रतिनिधियों से भी सुरक्षा गारंटी पर चर्चा करने वाले हैं.

अमेरिकी राजनीति और यूक्रेन का भविष्य

कीव में मौजूद सामरिक विशेषज्ञों का मानना है कि रूस का ये अचानक आक्रामक होना अमेरिकी राजनीति के बदलते समीकरणों से भी जुड़ा है. अमेरिका में हालिया सत्ता परिवर्तन के बाद से यूक्रेन को मिलने वाली बड़ी सैन्य मदद पर ब्रेक सा लग गया है.

जहां बाइडेन प्रशासन के दौरान यूक्रेन को 60 अरब डॉलर तक के भारी सैन्य पैकेज मिलते थे, वहीं ट्रंप प्रशासन और रिपब्लिकन बहुमत वाली अमेरिकी संसद के आने के बाद से अमेरिका से नई सैन्य मदद ठप पड़ी है. हालांकि यूरोप ने इस खाली जगह को भरने की कोशिश की है, लेकिन जेलेंस्की जानते हैं कि अमेरिकी हथियारों के बिना रूस को लंबे समय तक रोके रखना आसान नहीं होगा.

क्या कभी रुकेगी रूस-यूक्रेन की जंग?

1200 दिनों के लंबे और दर्दनाक दौर के बाद, यूक्रेन युद्ध एक नाजुक मोड़ पर खड़ा है. एक तरफ जहां शांति वार्ता का मंच तैयार हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ जमीन पर रूसी बारूद की मार पहले से कहीं ज्यादा घातक हो चुकी है. क्या अबू धाबी की बैठक में कोई ठोस रास्ता निकलेगा या फिर आने वाले दिनों में ये जंग और खतरनाक रूप लेगी? दुनिया की नजरें अब अगले हफ्ते होने वाली बातचीत और अमेरिकी विदेश नीति के अगले कदम पर टिकी हैं.



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