US Midterm Election Results: अमेरिकी संसद में ताकत के होंगे दो फाड़! क्‍या होगा अगर हाउस में डेमोक्रेट्स और सीनेट पर होगा र‍िपब्‍ल‍िकन का कब्‍जा?

US Midterm Election Results: अमेरिकी संसद में ताकत के होंगे दो फाड़! क्‍या होगा अगर हाउस में डेमोक्रेट्स और सीनेट पर होगा र‍िपब्‍ल‍िकन का कब्‍जा?


अमेरिका के 2026 के मिडटर्म इलेक्‍शन्‍स की काउंट‍िंग जारी है. यह पहले से ही अंदेशा लगाया जा रहा था कि इस बार का म‍िडटर्म ट्रंप के लिए भारी पड़ने वाला है. शुरुआती नतीजे कुछ ऐसा बता भी रहे हैं. फ्लोरिडा और जॉर्जिया में ऐतिहासिक नतीजे आ चुके हैं. जॉर्ज‍िया में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार कीशा लांस बॉटम्स अमेरिका के इतिहास में पहली अश्वेत महिला गवर्नर बनने जा रही हैं. वहीं फ्लोरिडा में रिपब्लिकन सांसद बायरन डोनाल्ड्स ने गवर्नर चुनाव जीत लिया है. ये भी फ्लोरिडा के पहले अश्वेत गवर्नर होंगे. इन शुरुआती नतीजों से रिपब्लिकन पार्टी को झटके लगने शुरू हो गए हैं. इस बीच कांग्रेस के दोनों सदनों में अलग-अलग पार्टियों का नियंत्रण होने की संभावना लगातार बढ़ती जा रही है. डेमोक्रेट्स प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) पर रिपब्लिकन के नियंत्रण को चुनौती दे रहे हैं, जबकि सीनेट की लड़ाई कहीं ज्यादा पेचीदा बनी हुई है. ये सारे हालात ट्रंप की म‍िडटर्म के बाद की राजनीति को काफी प्रभावित करने वाले हैं.

क्‍या है अमेरिकी राजनीति की तस्‍वीर?
2026 के मिडटर्म चुनावों में प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों और सीनेट की 100 में से 35 सीटों पर चुनाव हो रहा है. चुनाव से पहले दोनों सदनों पर रिपब्लिकन का नियंत्रण था, लेकिन प्रतिनिधि सभा में उनकी मामूली बढ़त के कारण वहां उनकी स्थिति कमजोर मानी जा रही थी. प्रतिनिधि सभा पर कब्जा करने के लिए डेमोक्रेट्स को कुल तीन सीटों का फायदा चाहिए था, जबकि सीनेट में बहुमत हासिल करने के लिए उन्हें चार एक्‍स्‍ट्रा सीटें जीतनी थीं. ऊपरी सदन यानी सीनेट में रिपब्लिकन के पास पहले से 53-47 की बढ़त थी.

शुरुआती नतीजों ने डेमोक्रेट्स के खेमे में खुशी का माहौल जरूर बनाया है. लेकिन मतगणना अभी पूरी नहीं हुई है. रिपोर्ट्स में कहा गया है कि कांग्रेस पर किस पार्टी का नियंत्रण होगा, इसका अंतिम फैसला आने में कई दिन लग सकते हैं. इसकी वजह डाक से आए वोट, अस्थायी वोट और बेहद करीबी मुकाबले हैं, जिनकी गिनती और पुष्टि में समय लग सकता है.

पर बड़ा सवाल ये है कि अगर अमेरिकी सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में अगर सत्ता बंट गई तो अमेरिकी राजनीति में क्‍या हालात बनेंगे. चल‍िए इसे समझते हैं.

शुरुआती नतीजों ने डेमोक्रेट्स के खेमे में खुशी का माहौल जरूर बनाया है.
(Image- REUTERS)

प्रतिनिधि सभा के एजेंडे पर डेमोक्रेट्स का नियंत्रण होगा
इसका सबसे बड़ा असर प्रतिनिधि सभा के कंट्रोल में बदलाव होगा. जिस पार्टी के पास बहुमत होता है, उसे सदन का स्पीकर चुनने, समितियों के अध्यक्ष नियुक्त करने, यह तय करने कि कौन-सा बिल सदन में पेश होगा और विधायी कामकाज का कैलेंडर तय करने में काफी ताकत मिलती है. इसलिए अगर प्रतिनिधि सभा पर डेमोक्रेट्स का नियंत्रण हो जाता है, तो ट्रंप और कांग्रेस में मौजूद रिपब्लिकन के लिए अपनी विधायी प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाना काफी मुश्किल हो सकता है.

इमिग्रेशन, टैक्स, सरकारी खर्च और घरेलू नीतियों से जुड़े रिपब्लिकन समर्थित विधेयकों का डेमोक्रेट्स विरोध कर सकते हैं. भले ही किसी विधेयक को प्रतिनिधि सभा में पर्याप्त समर्थन मिल जाए, लेकिन उसे राष्ट्रपति के पास पहुंचने से पहले रिपब्लिकन के नियंत्रण वाली सीनेट से भी मंजूरी लेनी होगी.

ट्रंप प्रशासन के खिलाफ जांच तेज हो सकती है
डेमोक्रेट्स की लीडरशिप में कांग्रेस की निगरानी और जांच की भूमिका फिर से तेज हो जाए. प्रतिनिधि सभा की समितियों के पास संघीय सरकार के कामकाज की जांच करने, अधिकारियों को गवाही के लिए बुलाने, दस्तावेज मांगने और निगरानी के तहत समन जारी करने जैसे अधिकार होते हैं. डेमोक्रेट्स का बहुमत बनने पर ट्रंप के राष्ट्रपति कार्यकाल से जुड़े कई विवादित मामलों की जांच दोबारा शुरू हो सकती है या नई जांच शुरू की जा सकती है. इनमें इमिग्रेशन पर कार्रवाई, सरकारी खर्च, कार्यकारी आदेश, सरकारी नियुक्तियां और घरेलू व अंतरराष्ट्रीय मामलों को संभालने के प्रशासन के तरीकों पर भी सवाल उठ सकता है, जांच हो सकती है.

हालांकि इन जांचों से ट्रंप पर कोई कानूनी कार्रवाई हो ये जरूरी नहीं, लेकिन ऐसी सुनवाई के कारण ट्रंप प्रशासन लगातार जनता की नजरों में बना रह सकता है.

अहम नियुक्तियों पर रिपब्लिकन का नियंत्रण बना रहेगा
डेमोक्रेट्स को प्रतिनिधि सभा में काफी ताकत मिल सकती है, लेकिन अगर सीनेट पर रिपब्लिकन का कब्जा बना रहता है तो उनके पास वॉशिंगटन की सबसे अहम शक्तियों में से एक बरकरार रहेगी. यह शक्ति है राष्ट्रपति की नियुक्तियों को मंजूरी देना. इनमें सुप्रीम कोर्ट के जजों की न‍ियुक्‍ति भी शाम‍िल है. यानी ट्रंप के लिए अपने पसंदीदा उम्मीदवारों को मंजूरी दिलाने का रास्ता अपेक्षाकृत आसान बना रहेगा, बशर्ते उन्हें रिपब्लिकन सीनेटरों का पर्याप्त समर्थन मिलता रहे.

बड़ा सवाल ये है कि अगर अमेरिकी सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में अगर सत्ता बंट गई तो अमेरिकी राजनीति में क्‍या हालात बनेंगे. (फोटो साभार- रायटर्स)

क्या डेमोक्रेट्स ट्रंप के खिलाफ महाभियोग चला सकते हैं?
अमेरिकी संविधान के तहत राष्ट्रपति और दूसरे संघीय अधिकारियों के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करने का विशेष अधिकार प्रतिनिधि सभा के पास है. अगर प्रतिनिधि सभा पर डेमोक्रेट्स का नियंत्रण हो जाता है, तो वे महाभियोग की जांच शुरू कर सकते हैं, सुनवाई कर सकते हैं और पर्याप्त समर्थन मिलने पर महाभियोग के प्रस्तावों पर मतदान भी करा सकते हैं. पर महाभियोग के मुकदमे की सुनवाई सीनेट में होती है. राष्ट्रपति को दोषी ठहराकर पद से हटाने के लिए मौजूद सीनेटरों के दो-तिहाई समर्थन की जरूरत होती है. अगर सीनेट पर रिपब्लिकन का नियंत्रण बना रहता है, तो ट्रंप को पद से हटाने के लिए जरूरी वोट जुटाना बेहद मुश्किल होगा. ऐसा तभी संभव हो सकता है, जब रिपब्लिकन पार्टी के भीतर कोई असाधारण राजनीतिक बदलाव हो.

सरकारी कामकाज और बजट पर होगा टकराव
कांग्रेस के बंटे हुए नियंत्रण का एक और बड़ा असर सरकारी फंडिंग पर पड़ सकता है. सरकार के खर्च से जुड़े कानूनों को मंजूरी देना कांग्रेस की जिम्मेदारी है. किसी भी फंडिंग प्रस्ताव को राष्ट्रपति के पास भेजने से पहले प्रतिनिधि सभा और सीनेट, दोनों की सहमति जरूरी होती है. अगर प्रतिनिधि सभा पर डेमोक्रेट्स का नियंत्रण हो जाता है, तो वे कुछ मांगें पूरी होने तक रिपब्लिकन समर्थित खर्च प्रस्तावों को मंजूरी देने से इनकार कर सकते हैं.

हेल्थकेयर योजनाओं, रक्षा बजट, इमिग्रेशन पर खर्च और सरकारी एजेंसियों के बजट को लेकर दोनों पार्टियों के बीच टकराव बढ़ सकता है. अगर कांग्रेस जरूरी फंडिंग कानून पास नहीं कर पाती, तो संघीय सरकार के कुछ हिस्सों का कामकाज ठप हो सकता है.

ट्रंप के बचे हुए दो सालों पर इसका क्या असर होगा?
अगर डेमोक्रेट्स प्रतिनिधि सभा जीत जाते हैं और सीनेट पर रिपब्लिकन का नियंत्रण बना रहता है, तो ट्रंप के राष्ट्रपति कार्यकाल के बाकी समय में कांग्रेस की ताकत बंट जाएगी. डेमोक्रेट्स के लिए निचले सदन पर जीत अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने, ट्रंप प्रशासन को चुनौती देने और यह दिखाने का मौका होगी कि वे एक प्रभावी विपक्ष के तौर पर काम कर सकते हैं. वहीं, सीनेट पर नियंत्रण बनाए रखने से रिपब्लिकन को ट्रंप की नियुक्तियों को रोकने या उनकी नीतियों की दिशा में बड़े बदलाव करने की डेमोक्रेट्स की कोशिशों के खिलाफ सुरक्षा मिलेगी.

इसका असर 2028 के राष्ट्रपति चुनाव पर भी पड़ सकता है. आमतौर पर मिडटर्म चुनावों को मौजूदा राष्ट्रपति के कामकाज पर जनता की राय के तौर पर देखा जाता है. ऐसे में प्रतिनिधि सभा पर डेमोक्रेट्स की जीत को ट्रंप प्रशासन से मतदाताओं की नाराजगी के संकेत के रूप में देखा जा सकता है.



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