डीग में परिक्रमा के दौरान अनोखी परंपरा: पशुओं और बंदरों के लिए चने, मूंगफली और सब्जियां दान करते हैं श्रद्धालु

डीग में परिक्रमा के दौरान अनोखी परंपरा: पशुओं और बंदरों के लिए चने, मूंगफली और सब्जियां दान करते हैं श्रद्धालु


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Deeg Rajasthan Parikrama unique tradition: राजस्थान के डीग में श्रीनाथ जी मंदिर के पास परिक्रमा के दौरान जीव सेवा की अनोखी परंपरा देखने को मिलती है. श्रद्धालु अपनी परिक्रमा यात्रा के साथ बेजुबान पशु-पक्षियों और बंदरों के लिए चने, मूंगफली और हरी सब्जियों का दान करते हैं. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यात्रा के दौरान जीवों को भोजन कराने से परिक्रमा का पुण्य बढ़ता है और यात्रा सफल मानी जाती है. यह परंपरा भारतीय संस्कृति में पूजा-पाठ के साथ जीव दया, संवेदनशीलता और प्रकृति प्रेम के सुंदर संदेश को जीवंत रखती है.

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डीग: राजस्थान के डीग में धार्मिक आस्था के साथ-साथ जीव सेवा की एक अत्यंत सुंदर और अनोखी परंपरा देखने को मिलती है. यहां स्थित प्रसिद्ध श्रीनाथ जी मंदिर के पास परिक्रमा करने वाले श्रद्धालु अपनी धार्मिक यात्रा के दौरान पशु-पक्षियों और बंदरों के लिए विशेष रूप से दान-पुण्य करते हैं. इस पावन परंपरा के तहत श्रद्धालु अपने साथ चने, मूंगफली और ताज़ी हरी सब्जियां लेकर पहुंचते हैं और रास्ते में मिलने वाले बेजुबान जीवों को बड़े प्रेम भाव से खिलाते हैं.

इस परंपरा की खास बात यह है कि यहां आने वाले अधिकतर श्रद्धालु अपने साथ ही खाद्य सामग्रियां लेकर चलते हैं, ताकि परिक्रमा मार्ग में मिलने वाले पशुओं और पक्षियों को भूखा न रहना पड़े. श्रद्धालु इसे केवल एक साधारण दान नहीं, बल्कि बेजुबान जीवों की निस्वार्थ सेवा और अक्षय पुण्य कमाने का एक प्रमुख माध्यम मानते हैं.

धार्मिक मान्यता और आध्यात्मिक महत्व
स्थानीय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, परिक्रमा के दौरान बेजुबान जीवों के लिए भोजन का प्रबंध और दान करना विशेष आध्यात्मिक महत्व रखता है. ऐसी जनधारणा है कि पशु-पक्षियों और बंदरों की सेवा करने से परिक्रमा का पुण्य कई गुना बढ़ जाता है और धार्मिक यात्रा पूरी तरह सफल मानी जाती है. इसी अडिग विश्वास के चलते श्रद्धालु अपनी सामर्थ्य और श्रद्धा अनुसार चने, मूंगफली और हरी सब्जियों का दान करते हैं.

संस्कृति और मानवता का संदेश
इस अनोखी परंपरा में धर्म, आस्था और प्रकृति के प्रति अगाध प्रेम का सुंदर मेल देखने को मिलता है. जहां एक ओर श्रद्धालु भगवान के दर्शन और मंत्रोच्चार के साथ परिक्रमा पूरी करते हैं, वहीं दूसरी ओर बेजुबान जीवों की भूख मिटाकर समाज को दया, संवेदनशीलता और मानवता का सीख भरा संदेश देते हैं.

भारतीय संस्कृति की जीवंत मिसाल
परिक्रमा मार्ग पर चलने वाली ये गतिविधियां हर किसी को जीवों के प्रति दया भाव रखने की प्रेरणा देती हैं. विशेषकर बंदरों और पक्षियों के लिए भोजन की व्यवस्था करना अब यहां की आस्था का एक अटूट हिस्सा बन चुका है. यह परंपरा इस बात का सशक्त प्रमाण है कि भारतीय धार्मिक संस्कृति में पूजा-पाठ के साथ-साथ जीव सेवा को सर्वोपरि स्थान दिया गया है.



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