चीन और जापान के बीच तनाव बढ़ता दिख रहा है. चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी यानी PLA के ईस्टर्न थिएटर कमांड की एयरफोर्स यूनिट को गोबी रेगिस्तान में अभ्यास के लिए भेजा गया. यहां HQ-9 लंबी दूरी की वायु रक्षा मिसाइल प्रणालियों को रेगिस्तानी रंग में रंगकर तैनात किया गया. यह अभ्यास ऐसे समय हुआ है जब जापान में अमेरिकी Typhon मिसाइल सिस्टम की तैनाती को लेकर चीन और रूस दोनों ने आपत्ति जताई है.
HQ-9 का बदल दिया रंग
चीनी सेना के मुताबिक, ईस्टर्न थिएटर कमांड की यूनिट को अचानक नए इलाके में अभ्यास के लिए रवाना किया गया. सैनिकों ने अपने वाहनों को तेजी से तैयार किया, उन्हें सैन्य ट्रेनों में लादा और एक्सरसाइज वाले इलाके की तरफ रवाना हो गए. गोबी रेगिस्तान पहुंचते ही यूनिट ने अपने उपकरणों का रंग और छिपाने की व्यवस्था इलाके के हिसाब से बदली. तस्वीरों में HQ-9 लॉन्चर पहले जंगल वाले हरे-काले रंग में नजर आए, लेकिन रेगिस्तान पहुंचने के बाद उन पर पीले रंग की रेगिस्तानी पेंटिंग कर दी गई.
ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक चीनी सैन्य मामलों के विशेषज्ञ सोंग झोंगपिंग ने कहा कि अलग-अलग इलाकों में तेजी से ढलने की क्षमता अब आधुनिक सैन्य इकाइयों के लिए जरूरी है. उनके मुताबिक, किसी युद्ध क्षेत्र में उपकरणों को छिपाना और अपनी ताकत को सुरक्षित रखना अहम हो सकता है.
अभ्यास में क्या-क्या हुआ?
अभ्यास सिर्फ मिसाइल लॉन्चर खड़े करने तक सीमित नहीं रहा. चीनी सेना ने बताया कि इसमें ड्रोन से हमला किए जाने, उपकरणों में खराबी आने, अचानक दिशा बदलने और दूसरी आपात स्थितियों जैसे परिदृश्य बनाए गए. यानी सैनिकों को ऐसी परिस्थितियों के लिए तैयार किया गया, जहां मैदान में हालात लगातार बदलते रहें. अलग-अलग विशेषज्ञ इकाइयों ने मिलकर इन चुनौतियों का जवाब दिया. चीन के मुताबिक, इससे सैनिकों की आपात प्रतिक्रिया और साथ मिलकर अभियान चलाने की क्षमता को परखा गया.
HQ-9 कितना खास है?
चीन का कहना है कि HQ-9 उसकी तीसरी पीढ़ी की मध्यम से लंबी दूरी वाला एयर डिफेंस सिस्टम है. इसे अलग-अलग मौसम और भारी इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग के बीच हवाई हमलों से निपटने के लिए डिजाइन किया गया है. चीन का दावा है कि यह विमान, ड्रोन और सटीक गाइडेंस वाले हथियारों के खिलाफ इस्तेमाल की जा सकती है.
ईस्टर्न थिएटर कमांड की सीमा सिर्फ ताइवान तक नहीं?
इस अभ्यास का एक और पहलू चीन के लिए महत्वपूर्ण है. ईस्टर्न थिएटर कमांड का मुख्य फोकस चीन के पूर्वी हिस्से और ताइवान जलडमरूमध्य से जुड़ा माना जाता है. लेकिन इस यूनिट को देश के पूर्व से हजारों किलोमीटर दूर उत्तर-पश्चिम के रेगिस्तानी इलाके में भेजना चीन की क्षेत्रीय सैन्य गतिशीलता दिखाने की कोशिश के तौर पर देखा जा सकता है. चीनी सैन्य विशेषज्ञ सोंग झोंगपिंग ने कहा कि भविष्य के युद्ध सिर्फ एक इलाके तक सीमित नहीं रह सकते. अलग-अलग थिएटर कमांड के बीच सैनिकों और हथियारों की तेजी से आवाजाही इसलिए महत्वपूर्ण हो सकती है.
जापान में Typhon तैनाती के बीच चीन का विरोध
इस सैन्य अभ्यास की टाइमिंग भी ध्यान खींचती है. जापान के क्यूशू द्वीप पर अमेरिकी Typhon मिसाइल सिस्टम की तैनाती को लेकर चीन ने हाल में जापान के सामने राजनयिक विरोध दर्ज कराया है. चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने 21 सितंबर को कहा कि बीजिंग ने जापान को राजनयिक नोट भेजकर अपना विरोध दोहराया है. Typhon सिस्टम की तैनाती को लेकर रूस भी जापान से विरोध जता चुका है. अमेरिकी और जापानी सेनाएं सितंबर में जापान में चल रहे ‘ईस्टर्न शील्ड-26’ अभ्यास के दौरान Typhon सिस्टम से जुड़े प्रशिक्षण में शामिल हैं.
चीन ने Typhon को रणनीतिक आक्रामक हथियार बताते हुए कहा है कि जापान में इसकी तैनाती से सैन्य टकराव और हथियारों की होड़ का जोखिम बढ़ सकता है. बीजिंग ने जापान से अपनी सैन्य नीति पर पुनर्विचार करने की अपील भी की है.