Israel Iran Live News : नेतन्याहू का ‘ईरान तबाही’ का नया प्लान लीक, जिससे खत्म किया हिजबुल्लाह, चलाएंगे वही हथियार

Israel Iran Live News : नेतन्याहू का ‘ईरान तबाही’ का नया प्लान लीक, जिससे खत्म किया हिजबुल्लाह, चलाएंगे वही हथियार


पश्चिम एशिया में एक बार फिर चारों तरफ बारूद की गंध फैलने वाली है. अमेरिकी मिडटर्म चुनावों की सरगर्मियों के बीच इजराइल की तरफ से एक ऐसा सीक्रेट प्लान लीक हुआ है, जिसने पूरी दुनिया की सांसें अटका दी हैं. रिपोर्ट्स की मानें तो इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनकी खुफिया एजेंसी मोसाद ईरान को घुटनों पर लाने के लिए एक बेहद खौफनाक रणनीति पर काम कर रहे हैं. इस नए प्लान को विशेषज्ञ ‘पेजर अटैक 2.0’ का नाम दे रहे हैं. ये वही खौफनाक और हाई-टेक रणनीति है, जिसका इस्तेमाल करके इजराइल ने लेबनान में हिजबुल्लाह को रातों-रात अपाहिज बना दिया था.

क्या है ‘पेजर अटैक 2.0’ और क्यों कांप रहा है ईरान?

न्यूयॉर्क पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अगर अमेरिकी चुनावों के तुरंत बाद पश्चिम एशिया में दोबारा जंग छिड़ती है, तो इजराइल बिना कोई बड़ा मिसाइल हमला किए, सीधे ईरान की रीढ़ तोड़ने की तैयारी में है.

इस बार निशाने पर कोई आम सैन्य ठिकाना या परमाणु भट्टी नहीं, बल्कि ईरान की असली सत्ता चलाने वाले सबसे टॉप मिलिट्री जनरल हैं. मोसाद के पूर्व डिप्टी हेड, ग्लोबल ऑपरेशन्स ओदेद ऐलम ने हिंट दी है कि इजराइल ईरान की मिलिट्री लीडरशिप का खात्मा करने के लिए 2024 जैसे ही किसी सरप्राइज ऑपरेशन को अंजाम दे सकता है.

2024 का वो ‘पेजर अटैक’ जिसने हिजबुल्लाह को कर दिया था पंगु

ईरान पर होने वाला ये हमला कितना खौफनाक होगा, इसे समझने के लिए हमें 2024 में हिजबुल्लाह के खिलाफ हुए उस ऐतिहासिक ऑपरेशन की डीटेल में जाना होगा.

  • कम्युनिकेशन डिवाइसेज में बारूद: इजराइल ने बेहद चालाकी से हिजबुल्लाह द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले हजारों पेजर और वॉकी-टॉकी के नए शिपमेंट में सेंध लगाई थी. उनके भीतर सूक्ष्म विस्फोटक और छोटे डिटोनेटर छिपा दिए गए थे.
  • एक क्लिक और चारों तरफ धमाके: सितंबर 2024 के मध्य में एक ही सेकंड के भीतर हजारों पेजर में एक साथ विस्फोट कराया गया. जैसे ही हिजबुल्लाह कमांडरों ने मैसेज देखने के लिए पेजर उठाया, धमाके हो गए.
  • तबाही का मंजर: इस हमले में दर्जनों लोगों की जान चली गई थी और हजारों लड़ाके अपनी आंखें और हाथ गंवा बैठे थे. इस हमले ने हिजबुल्लाह के कम्युनिकेशन नेटवर्क को पूरी तरह तबाह कर दिया था.

अब मोसाद इसी तर्ज पर ईरान की लीडरशिप के आधुनिक कम्युनिकेशन और टेक्नोलॉजी डिवाइसेज में सेंध लगाकर उन्हें निशाना बनाने की ताक में है.

अमेरिका की तीन-तीन कैरियर टास्क फोर्स तैनात, ट्रंप का बड़ा दावा

ईरान के खिलाफ इस बैकग्राउंड में अमेरिका की सैन्य मौजूदगी ने आग में घी डालने का काम किया है. अमेरिकी नौसेना का विशालकाय निमिट्ज़-क्लास एयरक्राफ्ट कैरियर USS थिओडोर रूजवेल्ट तेजी से पश्चिम एशिया की तरफ बढ़ रहा है.

वहां पहले से ही USS जॉर्ज वाशिंगटन और USS जॉर्ज डब्लू बुश के साथ दो अमेरिकी कैरियर टास्क फोर्स तैनात हैं. समुद्र में तीन-तीन अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर्स की मौजूदगी इस बात का साफ इशारा है कि पर्दे के पीछे से बहुत बड़ा मिलिट्री ऑपरेशन प्लान किया जा चुका है.

दूसरी ओर, डोनाल्ड ट्रंप ने मिसौरी के ‘KCMO’ रेडियो स्टेशन से बातचीत में दावा किया कि ये युद्ध ‘जल्द ही खत्म होने वाला है’. वहीं रिपब्लिकन सीनेटर रॉजर मार्शल ने बेहद आक्रामक अंदाज में कहा कि चुनाव खत्म होने के दो-तीन दिनों के भीतर कोई भी इंसान ईरान के आसपास या उसके पास नहीं रहना चाहेगा.

वाशिंगटन में हड़कंप: ‘ये प्लान पूरी तरह से पागलपन भरा है’

जहां एक तरफ हमले की रणनीति पर काम चल रहा है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी संसद में इसे लेकर तीखा विरोध शुरू हो गया है. कनेक्टिकट से डेमोक्रेटिक सीनेटर क्रिस मर्फी ने चेतावनी दी है कि इज़राइल और अमेरिका का ये प्लान बेहद घातक साबित हो सकता है.

सीनेटर मर्फी के मुताबिक, उन्हें संभावित मिलिट्री प्लान की एक सीक्रेट ब्रीफिंग मिली है. उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा कि ये प्लान पूरी तरह पागलपन से भरा है. इससे युद्ध की आग भड़क जाएगी और कानून के शासन का पूरी तरह सर्वनाश हो जाएगा. मर्फी ने ये गंभीर चिंता भी जताई कि इस ऑपरेशन की जद में आम नागरिकों का ढांचा भी आ सकता है, जिससे लंबा चलने वाला विनाशकारी युद्ध छिड़ जाएगा.

ईरान के असली सर्वेसर्वा: इजराइल के निशाने पर मौजूद 4 बड़े जनरल

मोसाद के पूर्व अधिकारी ओदेद ऐलम का दावा है कि ईरान में राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान, विदेश मंत्री अब्बास अराघची, संसद अध्यक्ष मोहम्मद गालिबाफ और यहां तक कि सुप्रीम लीडर मोजतबा खमेनेई केवल नाममात्र के चेहरे हैं. असली सत्ता ईरान का सैन्य गुट चलाता है. इजराइल के ‘क्रॉसहेयर’ यानी सीधे निशाने पर ईरान के ये 4 सबसे शक्तिशाली जनरल हैं.

  1. अहमद वाहिदी : इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कमांडर-इन-चीफ. आतंकवाद और परमाणु कार्यक्रम के आरोपों को लेकर इन पर अमेरिका और यूरोपीय संघ के कड़े प्रतिबंध लगे हुए हैं.
  2. हुसैन तायब: बासिज पैरामिलिट्री फोर्स के कमांडर. इन्हें बासिज की इंटेलिजेंस क्षमता और ताकत को कई गुना बढ़ाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है.
  3. अली अब्दुल्लाही: ईरानी सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ स्टाफ. अमेरिका द्वारा प्रतिबंधित ये जनरल वाशिंगटन का साथ देने वाले खाड़ी देशों को खुलेआम अंजाम भुगतने की धमकियाँ दे चुके हैं.
  4. मोहसेन रजाई: सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव. 1994 में अर्जेंटीना के ब्यूनस आयर्स में यहूदी कम्युनिटी सेंटर पर हुए बम धमाके, जिसमें 85 लोग मारे गए थे. उसमें शामिल होने के शक में इनके खिलाफ इंटरपोल का रेड नोटिस जारी है.

दावा ये भी है कि इन्हीं जनरलों ने जनवरी में ईरान में हुए व्यापक विरोध प्रदर्शनों को बेरहमी से कुचला था. इज़राइल का मानना है कि अगर इन चार जनरलों का सफाया कर दिया जाए, तो ईरान का मिलिट्री ढांचा एक ही झटके में धराशायी हो जाएगा.

‘पेजर अटैक 2.0’ के बाद क्या होगा?

पश्चिम एशिया एक बार फिर बारूद के ऐसे ढेर पर खड़ा है जहां एक छोटी सी चिंगारी पूरे इलाके को भस्म कर सकती है. यदि इज़राइल अपने ‘पेजर अटैक 2.0’ के जरिए ईरान के इन शीर्ष जनरलों को निशाना बनाता है, तो ईरान की तरफ से होने वाला पलटवार एक महायुद्ध को पैदा कर सकता है. दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि अमेरिकी चुनावों के ठीक बाद नेतन्याहू का ये लीक हुआ प्लान क्या रंग दिखाता है?



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