US Startup sell Sunlight: खरीदनी है रात में सूरज की रोशनी! अमेर‍िकी कंपनी बेचने को तैयार, पर इस ब‍िजनेस-मॉडल से क्‍यों है ‘मुसीबत’ का कनेक्‍शन?

US Startup sell Sunlight: खरीदनी है रात में सूरज की रोशनी! अमेर‍िकी कंपनी बेचने को तैयार, पर इस ब‍िजनेस-मॉडल से क्‍यों है ‘मुसीबत’ का कनेक्‍शन?


होमताजा खबरनॉलेज

ब‍िकेगी सूरज की रोशनी, पर इस ब‍िजनेस-मॉडल से क्‍यों है ‘मुसीबत’ का कनेक्‍शन?

Last Updated:

कैलिफोर्निया की कंपनी रिफ्लेक्ट ऑर्बिटल (Reflect Orbital) की योजना 18×18 मीटर आकार के शीशों को पृथ्वी की निचली कक्षा (Low Earth Orbit) में भेजने की है. इन शीशों को इस तरह नियंत्रित किया जा सकेगा कि सूरज डूबने के बाद भी उनकी मदद से चुने हुए इलाकों में सूरज की रोशनी पहुंचाई जा सके.

Zoom

इस ब‍िजनेस की असली कीमत चुकाएगी प्रकृति? (Image – AI)

अमेरिका और चीन के लगातार कॉम्‍पटीशन लगा हुआ है कि अंतरिक्ष में कौन पहले और क‍ितने दूर तक जा रहा है. इसी बीच अमेर‍िका की एक स्‍पेस स्‍टार्टअप कंपनी ने कुछ अनोखा ही कर डाला है. इस कंपनी सूरज की रोशनी को बेचने की तैयारी कर रही है. कैलिफोर्निया की कंपनी रिफ्लेक्ट ऑर्बिटल (Reflect Orbital) सूरज की रोशनी को जरूरत के हिसाब से उपलब्ध कराई जाने वाली सेवा में बदलना चाहती है. इससे सोलर फार्म लंबे समय तक बिजली बना सकेंगे. साथ ही आपदा प्रभावित इलाकों में, जहां रोशनी नहीं पहुंच पा रही, वहां बचाव अभियानों में भी इससे मदद मिल सकती है. कंपनी का प्‍लान है कि वो अंतरिक्ष में बड़े-बड़े शीशे लॉन्च करेगी, जो रात होने के बाद भी सूरज की रोशनी को धरती पर वापस भेज सकेंगे.

रिफ्लेक्ट ऑर्बिटल की योजना पहली नजर में बहुत फायदेमंद लगती है. रात में भी सोलर पैनल बिजली बना सकेंगे, आपदा प्रभावित इलाकों में रोशनी पहुंचाई जा सकेगी और रेस्क्यू ऑपरेशन आसान हो सकते हैं. लेकिन इस तकनीक का दूसरा पहलू भी है जो काफी डरावना है. यही वजह है कि कई पर्यावरणविद इसके खतरे भी भांप रहे हैं. पहले समझते हैं कि आखिर इस कंपनी का प्‍लान क्‍या है?

क्‍या है इस कंपनी का प्‍लान?
एनडीटीवी की रिपोर्ट बताती है कि रिफ्लेक्ट ऑर्बिटल की योजना 18×18 मीटर आकार के शीशों को पृथ्वी की निचली कक्षा (Low Earth Orbit) में भेजने की है. इन शीशों को इस तरह नियंत्रित किया जा सकेगा कि सूरज डूबने के बाद भी उनकी मदद से चुने हुए इलाकों में सूरज की रोशनी पहुंचाई जा सके. तकनीक के शुरुआती परीक्षण में इस्तेमाल होने वाले शीशे करीब पांच किलोमीटर के दायरे वाले इलाके में रोशनी पहुंचाएंगे. कंपनी इन शीशों की दिशा और स्थिति को लगातार एडजस्ट करती रहेगी, ताकि जिन इलाकों के लिए ग्राहकों ने पैसे दिए हैं, वहां लगातार सूरज की रोशनी पहुंचती रहे.

रिफ्लेक्ट ऑर्बिटल की योजना 2035 तक 50,000 सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेजने की है. (Image- AI)

इस मिशन की पहली लॉन्चिंग 2027 की दूसरी तिमाही में करने का लक्ष्य रखा गया है. रिफ्लेक्ट ऑर्बिटल की योजना 2035 तक 50,000 सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेजने की है. कंपनी का कहना है कि इनसे परावर्तित होने वाली रोशनी चांदनी के बराबर होगी. जैसे-जैसे सैटेलाइट की संख्या बढ़ेगी, यह रोशनी और तेज होती जाएगी और ज्यादा देर तक बनी रहेगी. इस प्रोजेक्ट में डेमोन्‍स्‍ट्रेशनर के लिए इरेन्डिल-1 (Earendil-1) नाम के सैटेलाइट का इस्तेमाल किया जाएगा. इसके जरिए ग्राहक अपने ऐप से उस इलाके को चुन सकेंगे, जहां उन्हें रोशनी चाहिए.

img

खबरें पढ़ने का बेहतरीन अनुभव

QR स्कैन करें, डाउनलोड करें News18 ऐप या वेबसाइट पर जारी रखने के लिए यहां क्लिक करें

QR Code

login



Source link