जगतार हवारा को पंजाब शिफ्ट किया तो बिगड़ सकता है चुनावी माहौल?
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Jagtar Singh Hawara News: बेअंत सिंह के कत्ल के मुजरिम और बब्बर खालसा के कुख्यात आतंकी जगतार सिंह हवारा की जेल बदली पर IB की एक गोपनीय रिपोर्ट ने नया सियासी व सुरक्षा बवंडर खड़ा कर दिया है. दिल्ली की तिहाड़ जेल से पंजाब शिफ्ट होने की हवारा की अर्जी का कड़ा विरोध करते हुए आईबी ने सुप्रीम कोर्ट को आगाह किया है कि उसे पंजाब भेजना सूबे के आगामी विधानसभा चुनावों की फिजा बिगाड़ सकता है.
आईबी ने कहा कि जगतार सिंह को पंजाब भेजने से चुनावों पर बड़ा असर पड़ेगा. (पीटीआई)
Jagtar Singh Hawara Case: खुफिया ब्यूरो (आईबी) ने 3 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट से कहा कि बेअंत सिंह हत्याकांड के दोषी जगतार सिंह हवारा को दिल्ली की तिहाड़ जेल से पंजाब की किसी जेल में ट्रांसफर करने से आगामी विधानसभा चुनावों पर बड़ा असर पड़ सकता है. आईबी ने शीर्ष अदालत को यह भी बताया कि हवारा उच्च जोखिम वाले कैदियों की श्रेणी में आता है इसलिए उसे पंजाब स्थानांतरित नहीं किया जाना चाहिए.
जस्टिस एम एम सुंदरेश और जस्टिस पी बी वराले की पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता एस मुरलीधर से कहा कि एजेंसी की रिपोर्ट बेहद गंभीर है. इस पर मुरलीधर ने कहा, ‘‘अगर चुनावों को लेकर चिंता है तो इस मामले पर तीन महीने बाद विचार किया जा सकता है.’’ शीर्ष अदालत ने मामले को अगले साल फरवरी में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया. पंजाब की 117 सदस्यों वाली विधानसभा के लिए चुनाव अगले साल की शुरुआत में होने हैं.
इससे पहले शीर्ष अदालत ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया था कि वह तिहाड़ जेल से पंजाब की किसी भी जेल में स्थानांतरित किए जाने की हवारा की याचिका पर खुफिया ब्यूरो (आईबी) से राय ले. बब्बर खालसा का यह आतंकवादी, अगस्त 1995 में पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है.
दिल्ली सरकार की ओर से पेश हुईं अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि हवारा जेल से भागने की घटना में शामिल था और हत्या के मामले में उसकी मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया गया था. भाटी ने दलील दी कि उसे दूसरी जेल में स्थानांतरित किए जाने से उसके फरार होने की आशंका बढ़ सकती है. उन्होंने इस संबंध में उच्च जोखिम वाले कैदियों को स्थानांतरित करने पर केंद्रीय गृह मंत्रालय के एक परामर्श का भी हवाला दिया.
उन्होंने पंजाब सरकार द्वारा दाखिल एक हलफनामे का भी जिक्र किया और कहा कि हवारा का दूसरी जेल में स्थानांतरण राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति को प्रभावित कर सकता है. भाटी ने बताया कि हवारा को चंडीगढ़ जेल में सुरंग खोदने के एक मामले में दोषी ठहराया गया था. पिछले साल 27 सितंबर को शीर्ष अदालत ने हवारा की याचिका पर केंद्र, चंडीगढ़ प्रशासन और दिल्ली एवं पंजाब सरकारों को नोटिस जारी किया था. हवारा 31 अगस्त 1995 को चंडीगढ़ में सिविल सचिवालय के प्रवेश द्वार पर हुए विस्फोट के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है. इस विस्फोट में बेअंत सिंह और 16 अन्य लोगों की मौत हो गई थी.
शीर्ष अदालत में दायर याचिका में कहा गया है कि जनवरी 2004 में जेल से फरार होने की घटना को छोड़कर जेल में हवारा का आचरण बिल्कुल बेदाग रहा है. याचिका में कहा गया है कि उसे तिहाड़ जेल से पंजाब की किसी दूसरी जेल में स्थानांतरित किया जाना चाहिए क्योंकि राष्ट्रीय राजधानी में उसके खिलाफ कोई मामला लंबित नहीं है. हवारा, परमजीत सिंह भ्योरा, तारा और हत्या के एक मामले में दोषी देवी सिंह 22 जनवरी 2004 को चंडीगढ़ की उच्च सुरक्षा वाली बुड़ैल जेल से लगभग 100 फुट लंबी सुरंग खोदकर भागने में सफल रहे थे.
अगले दो वर्षों के भीतर हवारा और भ्योरा को फिर से गिरफ्तार कर लिया गया. इस मामले में भगोड़ा घोषित तारा को थाईलैंड में गिरफ्तार किया गया जबकि देवी सिंह अब भी फरार है और उसे भी भगोड़ा घोषित किया जा चुका है. याचिका में कहा गया है, “याचिकाकर्ता (हवारा) फिलहाल पंजाब राज्य में दर्ज एक मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है… वह पंजाब के फतेहगढ़ साहिब जिले का निवासी है इसलिए उसे पंजाब की ही किसी जेल में रखा जाना चाहिए.”