करौली. राजस्थान में पंचायत चुनाव चल रहे हैं और करौली की एक सीट को लेकर ऐसी कहानी सामने आई है, जिसकी चर्चा इस वक्त पूरे राजस्थान में हो रही है. करौली जिले की एक छोटी सी ग्राम पंचायत में ऐसा सियासी दांव खेला गया कि विपक्ष भी देखता रह गया. ये कहानी जुगाड़ की नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और कानूनी समझ की है. मामला करौली जिले की 57 सादौली ग्राम पंचायत के गुडला गांव का है. इस पंचायत में सरपंच का पद इस बार ST (अनुसूचित जनजाति) वर्ग के लिए आरक्षित कर दिया गया.
आरक्षण की लिस्ट आते ही गुडला गांव में सन्नाटा छा गया. वजह थी कि यह गांव गुर्जर बाहुल्य है. पिछले कई सालों से यहां गुर्जर समाज का ही सरपंच बनता आ रहा था. लेकिन आरक्षित सीट होने की वजह से अब जनरल या ओबीसी समाज का कोई भी व्यक्ति चुनाव नहीं लड़ सकता था. गांव के बुजुर्गों की बैठक बुलाई गई. चर्चा हुई कि अब क्या किया जाए. गांव की सत्ता हाथ से न जाए, इसके लिए कोई न कोई रास्ता निकालना था. इसी बैठक में एक युवक का नाम सामने आया जो राहुल गुर्जर था.
राहुल गुर्जर की शादी बनी रणनीति
राहुल गुर्जर की हाल ही में शादी हुई थी. उनकी पत्नी का नाम नैना धानका है. नैना धानका एसटी समाज से आती हैं. बस, यहीं से पूरे खेल ने नया मोड़ ले लिया. ग्रामीणों और समाज के प्रबुद्ध लोगों ने कानून की एक बारीकी पर ध्यान दिया. देश के सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, शादी के बाद भी किसी महिला की जाति नहीं बदलती है. वह अपने पिता की जाति की ही रहती है. यानी शादी के बाद भी नैना धानका एसटी ही रहेंगी. इसी कानूनी बिंदु को आधार बनाकर गुर्जर समाज और धानका समाज ने मिलकर एक योजना बनाई. तय हुआ कि गुडला से सरपंच पद के लिए नैना धानका को चुनाव लड़ाया जाएगा.
दोनों समाज आए साथ तो मिली ऐतिहासिक जीत
इसके बाद जो हुआ, वह एक मिसाल बन गया. गुर्जर समाज ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी, वहीं धानका समाज ने भी अपनी बेटी को समर्थन दिया. गांव-गांव जाकर प्रचार किया गया. लोगों को समझाया गया कि यह चुनाव सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि दो समाजों की एकता का प्रतीक है. चुनाव परिणाम आया तो सब चौंक गए. नैना ने अपने प्रतिद्वंद्वी को बड़े अंतर से शिकस्त दी. उन्हें 2,107 वोट मिले, जबकि दूसरे नंबर पर रहे हरिओम मीणा को सिर्फ 243 वोट हासिल हुए. यानी नैना ने 1,864 वोटों से जीत दर्ज की. कुल 11 प्रत्याशियों के मैदान में होने के बावजूद जीत का इतना बड़ा अंतर गांव के चुनाव को खास बना गया. नैना की जीत के बाद गांव में जश्न का माहौल बन गया. गाड़ियों पर नैना धानका और राहुल गुर्जर सरपंच” के पोस्टर लगाए गए और पूरे गांव में जुलूस निकाला गया.
कौन हैं नैना धानका?
नैना धानका एक युवा और शिक्षित महिला हैं. ग्रामीणों का कहना है कि वह गांव के विकास के लिए काम करना चाहती हैं. हालांकि गांव में चर्चा यह भी है कि व्यावहारिक रूप से सरपंच का कामकाज उनके पति राहुल गुर्जर ही देखेंगे, जिसे ग्रामीण इलाकों में अक्सर “सरपंच पति” कहा जाता है.
क्यों हो रही है पूरे राजस्थान में चर्चा?
इस पूरे मामले की चर्चा इसलिए हो रही है, क्योंकि अक्सर देखा जाता है कि आरक्षित सीट आने पर गांवों में तनाव या गुटबाजी बढ़ जाती है. लेकिन गुडला गांव ने इसका हल शांतिपूर्ण और कानूनी तरीके से निकाला. ग्रामीणों ने मिलकर दिखाया कि अगर समाज में एकता हो और कानून की सही समझ हो तो हर समस्या का समाधान निकल सकता है. फिलहाल, गुडला गांव की यह कहानी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है और लोग इसे राजस्थान के पंचायत चुनाव की सबसे दिलचस्प कहानियों में से एक बता रहे हैं.