40 दिन तक जलाएं अखंड ज्योत, गाजियाबाद के इस हनुमान मंदिर की है खास मान्यता
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गाजियाबाद के संजय नगर में स्थित दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है. करीब 45 से 50 साल पुराने इस मंदिर में 40 दिन तक देसी घी की अखंड ज्योत जलाने की परंपरा है. मान्यता है कि पूरी श्रद्धा के साथ ज्योत जलाने से भक्तों की मनोकामना पूरी होती है. यही वजह है कि यहां गाजियाबाद के अलावा दिल्ली और आसपास के इलाकों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं.
गाजियाबाद के संजय नगर के एफ ब्लॉक, सेक्टर-23 में स्थित दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर करीब 45 से 50 साल पुराना बताया जाता है. मंदिर में लंबे समय से सेवा कर रहीं मुकेश देवी के मुताबिक, यहां वर्षों से श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं. मंदिर की मान्यता और यहां होने वाली पूजा के कारण गाजियाबाद के साथ दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों के लोग भी दर्शन करने आते हैं.
इस मंदिर की खास पहचान यहां 40 दिन तक अखंड ज्योत जलाने की परंपरा है. श्रद्धालु अपनी मनोकामना लेकर मंदिर पहुंचते हैं और हनुमान जी के सामने देसी घी का दीपक जलाते हैं. मंदिर से जुड़ी मान्यता है कि लगातार 40 दिन तक पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ ज्योत जलाने से भक्तों की मनोकामना पूरी होती है.
मंदिर में 40 दिन की ज्योत की जिम्मेदारी लेने वाला व्यक्ति अपनी श्रद्धा के अनुसार उसकी सेवा करता है. मुकेश देवी के मुताबिक, कुछ श्रद्धालु इस दौरान विशेष संकल्प भी लेते हैं. कई बार ज्योत साधने वाला व्यक्ति 40 दिन तक अन्न का सेवन नहीं करता और फल व दूध लेकर रहता है. हालांकि यह व्यक्तिगत आस्था और संकल्प का विषय है.
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मंदिर से जुड़े लोगों के अनुसार, श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूरी होने के बाद दोबारा हनुमान जी के दर्शन करने पहुंचते हैं. भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार बजरंगबली को चोला और वस्त्र चढ़ाते हैं. इसके अलावा भगवान को भोग लगाया जाता है और कुछ श्रद्धालु भंडारे का आयोजन भी कराते हैं. कई भक्त सवामनी भी कराते हैं.
मंदिर से जुड़े लोगों का कहना है कि यहां श्रद्धालु अलग-अलग मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हैं. कुछ भक्त नौकरी मिलने की कामना करते हैं तो कुछ संतान प्राप्ति के लिए हनुमान जी के दरबार में आते हैं. मंदिर की मान्यता के अनुसार, मनोकामना पूरी होने के बाद कई श्रद्धालु अपने परिवार के साथ दोबारा दर्शन करने पहुंचते हैं.
मंदिर में सुबह से ही पूजा-अर्चना और दीपक जलाने का सिलसिला शुरू हो जाता है. मंगलवार और शनिवार को यहां श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ जाती है. गाजियाबाद के अलावा दिल्ली और आसपास के दूसरे इलाकों से भी लोग दर्शन करने पहुंचते हैं. भक्तों के लिए यह मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं, बल्कि उनकी आस्था और विश्वास से जुड़ा धार्मिक स्थल है.