कब्र क्यों खोद रही है अमेरिकी सेना? ट्रेनिंग में जुट गए फौजी, हर घंटे 100 बॉडी दफनाने की तैयारी

कब्र क्यों खोद रही है अमेरिकी सेना? ट्रेनिंग में जुट गए फौजी, हर घंटे 100 बॉडी दफनाने की तैयारी


होमताजा खबरनॉलेज

कब्र क्यों खोद रही है अमेरिकी सेना? ट्रेनिंग में जुटे फौजी, हर घंटे 100 बॉडी!

Last Updated:

अमेरिकी सैनिकों को युद्ध के मैदान में मारे जाने वाले जवानों के लिए सामूहिक अस्थायी कब्रें तैयार करने की ट्रेनिंग दी जा रही है. इसके लिए बुलडोजर, खुदाई करने वाली मशीनों और इंजीनियरिंग यूनिट की मदद ली जा रही है. सवाल है कि दुनिया की सबसे ताकतवर सेनाओं में गिनी जाने वाली अमेरिकी सेना को अचानक इतनी बड़ी संख्या में सैनिकों की मौत की आशंका क्यों सता रही है?

Zoom

इमेज साभार- X

अमेरिका की सेना एक ऐसी तैयारी में जुटी है, जिसे उसने कोरियाई युद्ध के बाद बड़े पैमाने पर दोबारा जरूरी नहीं समझा था. अमेरिकी सैनिकों को युद्ध के मैदान में मारे जाने वाले जवानों के लिए सामूहिक अस्थायी कब्रें (Mass Burial Sites) तैयार करने की ट्रेनिंग दी जा रही है. इसके लिए बुलडोजर, खुदाई करने वाली मशीनों और इंजीनियरिंग यूनिट की मदद ली जा रही है. सवाल है कि दुनिया की सबसे ताकतवर सेनाओं में गिनी जाने वाली अमेरिकी सेना को अचानक इतनी बड़ी संख्या में सैनिकों की मौत की आशंका क्यों सता रही है? क्या यह ईरान के साथ बढ़ते सैन्य तनाव से जुड़ा है या अमेरिका किसी बड़े युद्ध की तैयारी कर रहा है?

अमेरिकी सेना की यह कवायद इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इराक और अफगानिस्तान जैसे पिछले सैन्य अभियानों के दौरान अमेरिका को इस लेवल पर कब्रों की व्यवस्था करने की जरूरत नहीं पड़ी थी. अब करीब सात दशक बाद इस तरह की ट्रेनिंग फिर शुरू की गई है. इसका मकसद युद्ध में बड़ी संख्या में सैनिकों के मारे जाने की स्थिति में उनके शवों को सुरक्षित रखना, उनकी पहचान सुनिश्चित करना और बाद में उन्हें उनके परिवारों तक पहुंचाना है.

24 घंटे में 2400 शवों को दफनाने की तैयारी

हाल ही में अमेरिकी सेना की थर्ड कोर सस्टेनमेंट कमांड और इंजीनियर टीमों ने एक अभ्यास पूरा किया. इस दौरान नकली कंकालों और पानी से भरे कंटेनरों का इस्तेमाल कर भारी बुलडोजर मशीनों से लंबी ट्रेंच खोदी गईं. प्रैक्टिस के बाद अमेरिकी सेना ने अनुमान जताया है कि उनकी एक इंजीनियर कंपनी बिना रुके काम करे, तो 24 घंटे में 2400 शवों के लिए अस्थायी कब्रें खोदकर उन्हें दफना सकती है. इस तरह के प्रैक्टिस में 20 से भी अधिक सालों में पहली बार सेना के पादरियों को भी ट्रेनिंग दिया गया कि युद्ध के मैदान में बिना किसी देरी के धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ जमीन को कैसे पवित्र किया जाए.

अचानक इस तैयारी की जरूरत क्यों पड़ी?

बीते दो-तीन दशकों में अमेरिका ने जितने भी युद्ध लड़े जैसे इराक या अफगानिस्तान. उनमें अमेरिकी सैनिकों के मरने की संख्या इतनी कम थी कि शवों को तुरंत विमानों से अमेरिका उनके घर भेज दिया जाता था. लेकिन अब ग्लोबल हालात पूरी तरह बदल चुके हैं.

  • महाशक्ति से सीधे टकराव का खतरा: अमेरिकी सैन्य एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर चीन, रूस या ईरान के साथ कोई बड़ा युद्ध छिड़ता है, तो पहले ही दिन हजारों की संख्या में सैनिक मारे जा सकते हैं.
  • सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक्स की नाकेबंदी: युद्ध के दौरान एयरस्पेस बंद हो सकता है या ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट की कमी पड़ सकती है. ऐसे में हजारों शवों को तुरंत अमेरिका वापस ले जाना नामुमकिन होगा.
  • स्वास्थ्य और सम्मानजनक प्रक्रिया: युद्ध के मैदान में शवों को सड़ांध और बीमारियों से बचाने के लिए उन्हें अस्थायी रूप से पहचान दर्ज करके तुरंत दफनाना अनिवार्य हो जाता है. ऐसा इसलिए क्योंकि जंग के खत्म होने के बाद उन्हें निकालकर उनके परिवारों को सौंपा जा सके.

‘अगर कल जंग हुई, तो हम अंधेरे में तीर चला रहे होंगे’

थर्ड कोर के ऑफिसर सार्जेंट फर्स्ट क्लास डेलबर्ट रुएडे ने इस स्थिति की गंभीरता को बयान करते हुए कहा, “अगर हम कल जंग के मैदान में उतर जाएं, तो बिना इस ट्रेनिंग के हम सिर्फ अंदाजे ही लगा रहे होते.

सेना के मैन्युअल में यह भी पाया गया कि पुरानी गाइडलाइन के मुताबिक कब्रों की पंक्तियों के बीच 7 फीट की दूरी रखने को कहा गया था, जो आधुनिक भारी बुलडोजर चलाने के लिए काफी कम थी. इस अभ्यास के बाद अब अमेरिकी सेना अपने नियमों में बदलाव करने जा रही है.

क्या हैं इसके मायने?
जानकारों के मुताबिक, अमेरिका का यह कदम दिखाता है कि पेंटागन आने वाले समय में किसी छोटे-मोटे आतंकवादी संगठन से नहीं, बल्कि तेज क्षमता वाली जंग की आशंका को ध्यान में रखकर तैयारियां कर रहा है. सेना का अगला फेज साल 2027 में शुरू होगा, जिसमें मेडिकल सुविधाओं और डेडबॉडी को रखने की प्रैक्टिस किया जाएगा.



Source link