गोवर्धन पर्वत का आकार है मोर जैसा, जानें राधाकुंड-श्यामकुंड से जुड़ी 5 हैरान करने वाली बातें

गोवर्धन पर्वत का आकार है मोर जैसा, जानें राधाकुंड-श्यामकुंड से जुड़ी 5 हैरान करने वाली बातें


Govardhan Mountain 5 Facts: गोवर्धन पर्वत का नाम आते ही भगवान श्रीकृष्ण की वह लीला याद आती है, जिसमें उन्होंने अपनी छोटी उंगली पर पूरा पहाड़ उठा लिया था. मथुरा के पास स्थित गोवर्धन पर्वत हिंदू धर्म में बेहद खास जगह रखता है. यहां हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन और परिक्रमा के लिए पहुंचते हैं.

लेकिन क्या आप जानते हैं कि गोवर्धन पर्वत से जुड़ी कुछ ऐसी मान्यताएं और कथाएं भी हैं, जिनके बारे में बहुत कम लोग बात करते हैं? इसकी लंबाई, धार्मिक महत्व, गिरिराज नाम और गोवर्धन पूजा से जुड़ी परंपराओं के पीछे कई रोचक बातें छिपी हैं.

गोवर्धन पर्वत से जुड़ी 5 और हैरान करने वाली बातें

1. मोर के आकार का है गोवर्धन पर्वत, आंखों की जगह हैं दो कुंड!

गोवर्धन पर्वत को लेकर एक बेहद दिलचस्प धार्मिक मान्यता है. कहा जाता है कि गिरिराज पर्वत का आकार मोर जैसा है. राधाकुंड और श्यामकुंड को मोर की आंखें, दानघाटी को उसकी गर्दन और पूंछड़ी के लौठा को उसकी पूंछ से जोड़कर देखा जाता है. यानी गोवर्धन के आसपास मौजूद धार्मिक स्थलों को मोर के शरीर के अलग-अलग हिस्सों के रूप में समझा जाता है.

2. श्रीकृष्ण ने अपनी मां के लिए धरती पर प्रकट की थी गंगा!

गोवर्धन में स्थित मानसी गंगा को लेकर भी एक रोचक कथा प्रचलित है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, एक बार नंद बाबा और यशोदा मैया गंगा स्नान करना चाहते थे, लेकिन उनके लिए इतनी दूर जाना आसान नहीं था. तब श्रीकृष्ण ने अपनी शक्ति से गोवर्धन में ही गंगा को प्रकट कर दिया. इसे मानसी गंगा इसलिए कहा गया क्योंकि मान्यता के अनुसार यह श्रीकृष्ण के मन से प्रकट हुई थी.

3. श्रीकृष्ण और राधा ने अपने हाथों से बनवाए थे दो कुंड!

गोवर्धन के पास मौजूद राधाकुंड और श्यामकुंड की कहानी भी बेहद दिलचस्प है. वैष्णव धार्मिक कथा के अनुसार, श्रीकृष्ण ने अरिष्टासुर नाम के बैल के रूप में आए राक्षस का वध किया था. इसके बाद राधा रानी ने उनसे पवित्र तीर्थों में स्नान करने की बात कही. तब श्रीकृष्ण ने अपनी एड़ी से जमीन पर प्रहार किया और वहां श्यामकुंड प्रकट हुआ. इसके बाद राधा रानी और उनकी सखियों ने अपने कंगनों से जमीन खोदकर राधाकुंड बनाया. मान्यता है कि बाद में दोनों कुंडों का जल आपस में मिल गया.

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4. रामायण काल में हनुमान जी भी लेकर आए थे गोवर्धन पर्वत!

गोवर्धन पर्वत से जुड़ी एक दूसरी लोककथा इसे भगवान राम और हनुमान जी से भी जोड़ती है. इस कथा के अनुसार, जब रामसेतु बनाने के लिए पहाड़ों और पत्थरों की जरूरत थी, तब हनुमान जी गोवर्धन पर्वत को लेकर जा रहे थे. रास्ते में उन्हें सूचना मिली कि सेतु का निर्माण पूरा हो चुका है. इसके बाद उन्होंने गोवर्धन पर्वत को ब्रज में ही रख दिया. मान्यता है कि गोवर्धन इस बात से दुखी हुए तो भगवान राम ने उन्हें अगले जन्म में श्रीकृष्ण के रूप में दर्शन देने का वचन दिया. हालांकि, इसे धार्मिक लोककथा के रूप में ही देखना चाहिए.

5. हर दिन एक तिल के बराबर छोटा हो रहा है गोवर्धन पर्वत!

गोवर्धन पर्वत से जुड़ी एक ऐसी मान्यता भी है, जो लोगों को हैरान कर देती है. कहा जाता है कि ऋषि पुलस्त्य गोवर्धन पर्वत को अपने साथ काशी ले जाना चाहते थे. पर्वत ने शर्त रखी थी कि रास्ते में जहां भी उसे जमीन पर रखा जाएगा, वह वहीं रुक जाएगा. ब्रज पहुंचने पर ऋषि ने उसे नीचे रखा, लेकिन फिर उठा नहीं पाए. एक पौराणिक मान्यता के अनुसार इससे नाराज होकर ऋषि ने उसे हर दिन एक तिल के बराबर छोटा होने का श्राप दे दिया.

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)



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