Indian Engineer: आमतौर पर किसी बड़ी टेक कंपनी के पुराने सॉफ्टवेयर को बदलने की जिम्मेदारी अनुभवी इंजीनियरों की बड़ी टीम को दी जाती है लेकिन अमेरिकी टेक कंपनी सिस्को ने इस बार अलग रास्ता चुना है. कंपनी ने महज 27 साल के इंजीनियर पद्मनाभन कृष्णमूर्ति पर भरोसा जताया है. उन्हें अगले 24 महीनों यानी दो साल में कंपनी के करीब 98 फीसदी पुराने सॉफ्टवेयर कोड को नए सिरे से तैयार करने और आधुनिक बनाने का लक्ष्य दिया गया है.
इस पहल की खास बात सिर्फ कृष्णमूर्ति की उम्र नहीं है, बल्कि इसे पूरा करने का तरीका भी है. कंपनी के प्रेसिडेंट जीतू पटेल इस काम में उन्हें पूरा समर्थन दे रहे हैं. यहां तक कि पुराने कोड में सुधार और बदलाव के लिए उन्हें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI टूल्स के इस्तेमाल की पूरी छूट दी गई है. इस प्रोजेक्ट की शुरुआत भी बड़ी टीम के बजाय सिर्फ दो लोगों के साथ करने की योजना से हुई थी. ऐसे में यह मामला बताता है कि बड़ी टेक कंपनियां अब अपने पुराने सॉफ्टवेयर को बदलने के लिए युवा इंजीनियरों और नई टेक्नोलॉजी पर भरोसा कर रही हैं.
कौन हैं पद्मनाभन कृष्णमूर्ति?
पद्मनाभन कृष्णमूर्ति सॉफ्टवेयर इंजीनियर और उद्यमी हैं. उन्होंने साल 2023 में रियल टाइम ट्रांसलेशन यानी तुरंत भाषा अनुवाद करने वाले स्टार्टअप ‘ईजडब्स’ की सह-स्थापना की थी. इस स्टार्टअप का काम अलग-अलग भाषाओं में बातचीत और अनुवाद को आसान बनाना था. साल 2025 में सिस्को ने ईजडब्स को खरीद लिया. इसी के बाद कृष्णमूर्ति सिस्को का हिस्सा बन गए.कृष्णमूर्ति की कहानी इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि कंपनी में आने के बाद शुरुआत में वह जीतू पटेल से पांच स्तर नीचे की भूमिका पर थे. फॉर्च्यून की रिपोर्ट के मुताबिक उन्हें जो काम दिया गया था उसे पटेल बहुत अहम या रणनीतिक जिम्मेदारी वाला काम नहीं मानते थे लेकिन बाद में दोनों के बीच हुई एक बातचीत ने उनके काम की दिशा बदल दी.सिस्को के सैन फ्रांसिस्को ऑफिस के दौरे के दौरान जीतू पटेल की कृष्णमूर्ति से मुलाकात हुई. बातचीत में कंपनी के पुराने सॉफ्टवेयर कोड को आधुनिक बनाने की संभावना पर चर्चा हुई. इसी बातचीत से यह विचार निकला कि सिर्फ दो लोगों की टीम इस बड़े काम की शुरुआत कर सकती है.
चार हफ्ते में साबित करना था कि इतना बड़ा काम संभव है
इस प्रोजेक्ट की शुरुआत में पहले यह साबित करने पर ध्यान दिया गया कि इस तरीके से काम करना संभव है. कृष्णमूर्ति और उनकी छोटी टीम को शुरुआती तौर पर चार हफ्तों के भीतर यह दिखाना था कि कंपनी के पुराने सॉफ्टवेयर कोड को नए तरीके से आधुनिक बनाया जा सकता है.इस शुरुआती प्रयोग के बाद बड़ा लक्ष्य तय किया गया. योजना के मुताबिक अगले 24 महीनों यानी दो साल के भीतर सिस्को के करीब 98 फीसदी पुराने कोड को आधुनिक बनाने का लक्ष्य रखा गया है. यह काम सिर्फ पुराने कोड में छोटे-मोटे बदलाव करने तक सीमित नहीं है, बल्कि कंपनी के मौजूदा सॉफ्टवेयर सिस्टम को नए दौर की जरूरतों के हिसाब से दोबारा तैयार करने से जुड़ा है.
इस प्रोजेक्ट का पैमाना बताता है कि कंपनी अपने पुराने टेक्नोलॉजी सिस्टम को बदलने के लिए कितना बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रही है हालांकि 98 फीसदी कोड को बदलने का लक्ष्य अभी एक महत्वाकांक्षी योजना है. इसे पूरा करने में कितना समय लगेगा और इसके अंतिम नतीजे क्या होंगे, यह आने वाले समय में ही साफ होगा.
जीतू क्यों दे रहे हैं आगे बढ़ने का मौका?
सिस्को के प्रेसिडेंट जीतू पटेल का मानना है कि किसी भी टीम में नए विचार तभी सामने आते हैं जब लोग पुराने तरीकों पर सवाल उठाने और अलग नजरिया रखने की हिम्मत करते हैं.उनका कहना है कि विचारों के बीच मतभेद और बहस होना अच्छी बात है, क्योंकि इससे बेहतर समाधान निकल सकते हैं.उनका जोर इस बात पर है कि मतभेद विचारों को लेकर होने चाहिए, न कि लोगों के व्यक्तित्व या आपसी रिश्तों को लेकर.पटेल ने कहा कि तनाव अच्छा होता है. वह जानबूझकर अपनी टीमों में विचारों को लेकर बहस और असहमति की गुंजाइश रखते हैं, क्योंकि नए विचारों को बेहतर बनाने के लिए उनके बीच टकराव जरूरी है लेकिन यह टकराव लोगों के आपसी रिश्तों या व्यक्तित्व को लेकर नहीं होना चाहिए. कृष्णमूर्ति को इतनी बड़ी जिम्मेदारी देना भी इसी सोच का हिस्सा माना जा रहा है. कंपनी युवा कर्मचारियों को सिर्फ निर्देशों का पालन करने तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि उन्हें पुराने तरीकों को चुनौती देने और नए प्रयोग करने का मौका देना चाहती है.
AI टूल्स के इस्तेमाल की खुली छूट, पटेल ने क्या कहा?
इस प्रोजेक्ट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की भूमिका भी काफी अहम है. पुराने कोड को दोबारा व्यवस्थित करने और आधुनिक बनाने के लिए कृष्णमूर्ति को AI टूल्स के इस्तेमाल की खुली छूट दी गई है.जीतू पटेल ने इस बारे में कहा कि उन्होंने कृष्णमूर्ति को कोड में सुधार और बदलाव के लिए AI टूल्स के इस्तेमाल की असीमित सुविधा दी है. उनका कहना था कि वह इस काम में जितना चाहें, इन टूल्स का इस्तेमाल कर सकते हैं.इस बयान का मतलब है कि पटेल ने कृष्णमूर्ति के लिए AI टूल्स के इस्तेमाल पर कोई छोटी सीमा नहीं रखी है. उन्होंने उन्हें इस काम के लिए खुलकर प्रयोग करने की आजादी दी है.यह पहल ऐसे समय में हो रही है जब सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट के क्षेत्र में AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. कोड लिखने, उसमें गलतियां खोजने, पुराने कोड को समझने और उसे नए सिस्टम में बदलने जैसे कामों में AI की मदद ली जा रही है. सिस्को का यह प्रोजेक्ट भी दिखाता है कि कंपनी AI को सिर्फ सहायक टूल के रूप में नहीं, बल्कि बड़े टेक्नोलॉजी बदलाव के लिए इस्तेमाल करना चाहती है.
कैसा रहा कृष्णमूर्ति का सफर?
पद्मनाभन कृष्णमूर्ति के करियर में पढ़ाई, रिसर्च और स्टार्टअप शुरू करने का अनुभव शामिल है. उनकी लिंक्डइन प्रोफाइल के मुताबिक वह फिलहाल सिस्को में प्रेसिडेंट के टेक्निकल असिस्टेंट के पद पर काम कर रहे हैं. इस भूमिका में वह कंपनी के प्रेसिडेंट जीतू पटेल के साथ जुड़े हुए हैं.सिस्को में मौजूदा जिम्मेदारी से पहले वह कोलंबिया यूनिवर्सिटी में ग्रेजुएट रिसर्चर के रूप में काम कर चुके हैं. इसके अलावा उन्होंने जून से सितंबर 2022 के बीच सिस्को में चार महीने की इंटर्नशिप भी की थी यानी कंपनी से उनका जुड़ाव 2025 में ईजडब्स को खरीदने के बाद ही शुरू नहीं हुआ था, बल्कि इससे पहले भी वह वहां इंटर्न के तौर पर काम कर चुके थे.उनके करियर में ‘हेलेन AI’ में को-फाउंडर और रिसर्चर के तौर पर काम करना भी शामिल है. इसके अलावा ईजडब्स की स्थापना ने उन्हें टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में स्टार्टअप शुरू करने का अनुभव दिया. इस तरह उनके पास रिसर्च, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट और अपना स्टार्टअप शुरू करने का अनुभव है.
भारत के स्कूल से हांगकांग और फिर अमेरिका तक की पढ़ाई
पद्मनाभन कृष्णमूर्ति ने अपनी शुरुआती पढ़ाई भारत के बिशप कॉटन बॉयज स्कूल से पूरी की. स्कूल के बाद वह हांगकांग यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी पहुंचे. यहां से उन्होंने कंप्यूटर साइंस में बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की.इसके बाद उन्होंने अमेरिका की कोलंबिया यूनिवर्सिटी से कंप्यूटर साइंस में मास्टर डिग्री की पढ़ाई की. इस तरह उनकी पढ़ाई भारत, हांगकांग और अमेरिका के संस्थानों में हुई है.कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई के साथ-साथ रिसर्च और स्टार्टअप के अनुभव ने उन्हें टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में आगे बढ़ने का मौका दिया. अब यही अनुभव सिस्को के एक बड़े सॉफ्टवेयर मॉडर्नाइजेशन प्रोजेक्ट में काम आ सकता है.