श्रीराम के मुकाबले श्रीकृष्ण को ‘टेढ़ा’ बताकर बुरे फंसे धीरेंद्र शास्त्री, चुनावी सीजन में अखिलेश यादव ने कर दी ये बड़ी डिमांड

श्रीराम के मुकाबले श्रीकृष्ण को ‘टेढ़ा’ बताकर बुरे फंसे धीरेंद्र शास्त्री, चुनावी सीजन में अखिलेश यादव ने कर दी ये बड़ी डिमांड


कथावाचक पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री उर्फ बागेश्वर धाम सरकार की ओर से भगवान श्रीकृष्ण को ‘टेढ़े’ कहे जाने पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बिना नाम लिए घोर आपत्ति जताई है. धीरेंद्र शास्त्री की ओर से अपने इस बयान पर माफी मांगने के बाद भी सपा अध्यक्ष ने इसे विदेशी या आंतरिक ताकतों से मदद लेकर हिंदू धर्म को बदनाम करने की साजिश बताया है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट लिखकर उचित कानूनी कार्रवाई करने की मांग रख दी है.

‘सनातनियों के बीच कौन बिगाड़ रहा सामाजिक सौहार्द’

अखिलेश यादव ने लिखा- ‘ये बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और आपत्तिजनक समाचार है कि कोई राजनीतिक प्रश्रय प्राप्त ‘लघु-बंधु’ बनकर घूम रहा व्यक्ति सनातन समाज की एकता को तोड़ने का अति निंदनीय कार्य कर रहा है. ये गहरी जांच का विषय है कि सनातनियों के बीच सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का षड्यंत्र कौन कर रहा है, क्या इसके पीछे कोई बाहरी शक्ति है या आंतरिक, इसकी पड़ताल अपरिहार्य है.

‘जानबूझकर हमारे अवतारों की तुलना की जा रही’

सपा अध्यक्ष ने कहा- ‘हमारे पूज्य अवतारों के बीच नकारात्मक भाव से जानबूझकर अपमानजनक तुलना की जा रही है. एक अवतार के मुकाबले दूसरे अवतार को बेहतर बताने की साजिश सनातन समाज के विरुद्ध चली जा रही बहुत गहरी चाल है. हर सच्चा सनातनी इन दोनों अवतारों का उपासक होता है. नवमी-अष्टमी का भेद किसी के मन में नहीं होता है. इस अवांछित तुलना से सनातन समाज इतना आहत हुआ है कि दोनों अवतारों के नाम का उल्लेख करके हम उसे और आहत नहीं करना चाहते हैं. सनातन समाज के अतिरिक्त भी अन्य समाज और वैश्विक संगठन भी घोर आहत महसूस कर रहे हैं.

अखिलेश यादव ने आगे कहा- ‘लोकरक्षक’ और ‘लोकरंजक’ दोनों ही एक ही के अवतार हैं, दोनों की लीलाएं अपने समय-काल के अनुरूप घटित हुई हैं फिर ऐसी गरिमाहीन तुलना का तर्क क्या है और उसके पीछे क्या मंसूबा है ये स्पष्ट किया जाए.

‘हिंदूओं के अवतारों की तुलना करना अक्षम्य पाप’

ईशनिंदा का अपराध करने वाले ऐसे व्यक्ति के पीछे, उसके किसी संगी-साथी की कुटिल मंशा कार्यरत दिखती है. ऐसे निंदात्मक विषय पर तो हर राजनीतिक दल और उसके समर्थक भी इस तथाकथित वाचक के विरुद्ध एकजुट हो गये हैं. अगर इसे नहीं रोका गया तो इससे समाज में अशांति और असंतोष का वैमनस्यकारी वातावरण बनेगा. ये अक्षम्य पाप है, ऐसे व्यक्ति को समाज, सनातन, देश हित में निरुद्ध-अवरुद्ध करना ही एकमात्र उपाय है.

पूजनीय देवी अहिल्याबाई होल्कर जी की मूर्ति का अपमान, मणिकर्णिका घाट का तोड़ा जाना, जगह-जगह मंदिरों को तोड़ना, परमपूज्य शंकारचार्य जी पर निकृष्टतम आरोप लगाना और उनके बटुकों पर प्रहार करना, जन्माष्टमी मनाने पर रोक लगाते हुए तोड़फोड़ करना, ये सब अनायास ही नहीं हो रहा है, इसके पीछे कोई तो है जो इस छल-कुचक्र को रच रहा है. अब वो सब कहां हैं जो अपने को सनातन का ठेकेदार मानते हैं, क्या वो अपने परंपरागत भूमिगत निवास में जाकर छिप गये हैं. हर धर्म-मज़हब-संप्रदाय या उसके आराध्यों-महापुरुषों के प्रति किसी भी प्रकार का विष-वमन कदापि स्वीकार्य नहीं है. सर्वोच्च स्तर पर संज्ञान लेकर दंडात्मक कार्रवाई हो.

सॉफ्ट हिंदुत्व की राह पर हैं अखिलेश यादव

2027 विधानसभा चुनाव में बीजेपी से मुकाबला करने के लिए सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव सॉफ्ट हिंदुत्व की राह पकड़े नजर आते हैं. अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी पर मजबूती से सवाल उठाने के साथ ही वह वहां जाकर वहां जाकर श्रीमद् भागवत कथा में शामिल होते दिखते हैं. वह कथा के मंच पर त्रिशुल, गदा और सुदर्शन चक्र थामे हुए तस्वीरें क्लिक करते दिखे. इससे पहले प्रयागराज में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के चरणों में बैठे दिखे थे. इसका अलावा उन्होंने बयान दिया कि समाजवादी ही सनातनी हैं.

दरअसल, बीजेपी लगातार नैरेटिव बनाए रखना चाहती है कि सपा हिंदू विरोधी है और मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति करती है. अखिलेश यादव इस नैरेटिव को बदलने के लिए लगातार प्रयास में दिख रहे हैं. दूसरा यादव+मुस्लिम सपा का कोर वोटर माना जाता है. यादव खुद को भगवान श्रीकृष्ण के वंशज बताते हैं. इसी वजह से अखिलेश यादव भगवान श्रीकृष्ण और भगवान शंकर की एक विशालकाय मूर्ति भी बनवा रहे हैं. ऐसे में कथा वाचक धीरेंद्र शास्त्री के बयान पर पलटवार करना जरूरी हो जाता है.

पंडित धीरेंद्र शास्त्री

श्रीकृष्ण पर अपने बयान पर क्या बोले धीरेंद्र शास्त्री

भगवान श्रीराम से भगवान श्रीकृष्ण की तुलना और ठाकुरजी को टेढ़ा कहे जाने वाले अपने बयान पर पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने क्षमा मांग लिया है. एक वीडियो संदेश में उन्होंने कहा- ‘श्री बागेश्वर धाम की जय, श्री वृंदावन की जय, श्री बांकेबिहारी लाल की जय. एक वीडियो जो हमने भाव में विहबल होकर, भावपूर्ण उलाहना श्रीठाकुर जी को दिया था- हमारे राम जी सीधे हैं और ठाकुरजी टेढ़े हैं. इसपर बहुत लोगों ने अर्थ का अनर्थ निकालकर बहुत जगहों पर अनरगल प्रलाप प्रारंभ किया.

हम एक विनयी भाव में निवेदन कर रहे हैं कि हम खुद ठाकुर जी के भक्त हैं. हम स्वंय ब्रज के भक्त हैं. हम जब भी प्रार्थना करते हैं तो कहते हैं कि हमें बृजवास मिले. हम स्वंय श्रीमद् भागवत कथा को जैसी भी वाणी से बनती है कह लेते हैं. ठाकुरजी के गुणगान गाते.

उन्होंने कहा कि हम भगवान राम और भगवान श्रीकृष्ण में भेद उत्पन्न करना नहीं चाह रहे. जैसे सखियां श्रीराम को गारी देकर उलाहना देतीं, जैसे गोपियां ठाकुरश्रीकृष्ण कन्हैया को उलाहना देतीं, जैसे बिंदु जी महाराज, बृज के संत श्रीकोकिल साईं जी उलाहना देते, वैसे ही हमने भाव में एक पद था किसी संत का, जो बहुप्रचलित है, बंशी का बजाना तो खेल ही है, पर धनुष को उठाना खेल नहीं, तो हम उसी भाव की व्याख्या कर रहे थे. बहुत सारे लोगों ने आधी वीडियो देखकर हमें कृष्ण विरोधी घोषित कर दिया. हम कृष्ण विरोधी नहीं है, वो हमारे ठाकुजी हैं. हम बार-बार श्रीकृष्ण जन्मभूमि के लिए आवाज उठाते. मेरे नाम में भी उनका नाम लगा हुआ है. हमारी इस बात से हमारी व्याख्या से अगर किसी को ठेस पहुंची हो तो मैं विनती भाव से क्षमाप्रार्थी हैं.’



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