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IAS Officer Shikhar Agrawal Villa Case: राजस्थान के अलवर जिले के अजबगढ़ स्थित अनंता रिसॉर्ट में IAS अधिकारी शिखर अग्रवाल और उनके परिवार की ओर से 20 विला खरीदने का मामला चर्चा में है. सरिस्का टाइगर रिजर्व के नजदीक बने इस रिसॉर्ट के खिलाफ पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन को लेकर NGT में याचिका दायर हुई थी. जांच के दौरान संयुक्त समिति को रिसॉर्ट में 144 कमरे और 19,377.91 वर्ग मीटर निर्मित क्षेत्र मिला. रिपोर्ट में चार बोरवेल से भूजल निकालने की अनुमति और पहले के अनधिकृत दोहन के मामले में 1.44 करोड़ रुपये जमा कराने का भी जिक्र है. NGT ने 16 अक्टूबर 2026 को याचिका का निस्तारण किया.
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अलवर. राजस्थान के IAS अधिकारी शिखर अग्रवाल और उनके परिवार के अलवर जिले के अजबगढ़ स्थित अनंता रिसॉर्ट में 20 विला खरीदने का मामला चर्चा में है. जिस रिसॉर्ट में विला खरीदने की बात सामने आई है, वह पहले भी पर्यावरण से जुड़े विवाद को लेकर सुर्खियों में रहा है. सरिस्का टाइगर रिजर्व के नजदीक बने इस रिसॉर्ट के खिलाफ नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में याचिका दायर की गई थी. इसमें रिसॉर्ट के निर्माण और जमीन के इस्तेमाल से लेकर भूजल निकालने तक पर सवाल उठाए गए थे.
अजबगढ़ के अनंता रिसॉर्ट को लेकर हेमराज मीणा ने NGT में याचिका दायर की थी. शिकायत में पर्यावरणीय स्वीकृति नहीं लेने, नियमों के खिलाफ भूजल का इस्तेमाल करने और गैर मुमकिन नाले की जमीन पर कब्जा करने जैसे आरोप लगाए गए थे. याचिका में यह सवाल उठाया गया था कि सरिस्का टाइगर रिजर्व के इतने नजदीक बने रिसॉर्ट में निर्माण और दूसरे काम पर्यावरण के नियमों के मुताबिक हो रहे हैं या नहीं. खास तौर पर रिसॉर्ट के निर्माण का कुल क्षेत्रफल, पानी निकालने के लिए बोरवेल का इस्तेमाल और नाले की जमीन पर किसी तरह के निर्माण को लेकर जांच की मांग की गई थी. मामले को गंभीरता से लेते हुए NGT ने एक संयुक्त समिति गठित कर जांच के निर्देश दिए. समिति को मौके पर जाकर रिसॉर्ट की स्थिति देखने और शिकायत में लगाए गए आरोपों की पड़ताल करने को कहा गया.
जांच में मिले 144 कमरे, इतना था निर्माण का क्षेत्रफल
NGT के निर्देश पर गठित संयुक्त समिति ने रिसॉर्ट का निरीक्षण किया. जांच में वहां कुल 144 कमरे मिले. इसके अलावा रिसॉर्ट का निर्मित क्षेत्रफल 19,377.91 वर्ग मीटर पाया गया. पर्यावरणीय स्वीकृति को लेकर समिति की रिपोर्ट में एक अहम बात सामने आई. रिपोर्ट के मुताबिक रिसॉर्ट का निर्माण 20,000 वर्ग मीटर से कम क्षेत्र में था. इसी वजह से इस निर्माण के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति लेना जरूरी नहीं था. यानी शिकायत में पर्यावरणीय स्वीकृति नहीं लेने का जो मुद्दा उठाया गया था, उस पर समिति ने निर्माण के कुल क्षेत्रफल को आधार बनाया. जांच में मिले आंकड़ों के मुताबिक रिसॉर्ट का निर्मित क्षेत्र 20 हजार वर्ग मीटर की तय सीमा से नीचे था.
चार बोरवेल से पानी निकालने की मिली अनुमति
रिसॉर्ट में भूजल के इस्तेमाल को लेकर भी शिकायत की गई थी. संयुक्त समिति की जांच में सामने आया कि रिसॉर्ट के पास प्रदूषण नियंत्रण मंडल की संचालन सहमति मौजूद थी. इसके अलावा चार बोरवेल से भूजल निकालने की अनुमति भी मिली. समिति की रिपोर्ट में सामने आया कि पहले बिना वैध अनुमति के भूजल निकालने का मामला रहा था. इस मामले में रिसॉर्ट प्रबंधन से करीब 1.44 करोड़ रुपये का पर्यावरणीय मुआवजा और शुल्क जमा कराया जा चुका था. इस तरह जांच में एक तरफ मौजूदा अनुमति से जुड़े दस्तावेज मिले, तो दूसरी तरफ पुराने समय में बिना वैध अनुमति भूजल निकालने के मामले में जमा कराई गई बड़ी रकम का भी जिक्र आया.
नाले की जमीन पर कब्जे के आरोपों पर क्या मिला?
हेमराज मीणा की याचिका में गैर मुमकिन नाले की जमीन पर अतिक्रमण का आरोप भी लगाया गया था. यह शिकायत का एक अहम हिस्सा था, क्योंकि प्राकृतिक नालों का अपना रास्ता होता है और इनके आसपास निर्माण को लेकर सवाल उठते रहे हैं. संयुक्त समिति ने इस पहलू की भी जांच की. रिपोर्ट के मुताबिक नाले की जमीन पर किसी तरह का स्थायी निर्माण होने के प्रमाण नहीं मिले. इसके साथ ही प्राकृतिक जल संसाधनों का व्यावसायिक इस्तेमाल किए जाने के भी सबूत नहीं मिले.
16 अक्टूबर 2026 को NGT ने किया याचिका का निस्तारण
संयुक्त समिति की रिपोर्ट सामने आने के बाद NGT ने 16 अक्टूबर 2026 को इस याचिका का निस्तारण कर दिया. यानी पर्यावरणीय शिकायत पर समिति की जांच और रिपोर्ट के आधार पर ट्रिब्यूनल ने मामले की सुनवाई पूरी कर दी. इस पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि NGT का फैसला अनंता रिसॉर्ट के खिलाफ लगाए गए पर्यावरणीय आरोपों और उनकी जांच से जुड़ा है. इसे IAS शिखर अग्रवाल और उनके परिवार की ओर से 20 विला खरीदने के मामले में क्लीन चिट या किसी तरह की जांच का फैसला नहीं माना जा सकता.