भूकंप पर 24 घंटे निगरानी, देश में बनेंगे 100 नए ऑब्‍जर्वेटरी, जानें क्‍या होगा फायदा


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भूकंप पर 24 घंटे निगरानी, देश में बनेंगे 100 नए ऑब्‍जर्वेटरी, जानें फायदा

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भारत के कई इलाके भूकंप जोन में आते हैं, ऐसे में प्राकृतिक घटना पर चौबीसों घंटे निगरानी करना जरूरी है. इसका उद्देश्‍य समय रहते इसका पता लगाना और किसी भी तरह के नुकसान को कम करना है.

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भारत में 100 नए भूकंप ऑब्‍जर्वेटरी बनाए जाएंगे. (फाइल फोटो)

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय देशभर में 100 नई भूकंप वेधशालाएं (earthquake observatories) स्थापित करने की योजना बना रहा है. इनमें जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में चार-चार वेधशालाएं शामिल होंगी. इस विस्तार से भूकंप निगरानी व्यवस्था मजबूत होगी और 2.5 तीव्रता तक के भूकंपों का पता लगाने में मदद मिलेगी. मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी. पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव श्रीनिवास कुमार तुम्माला ने किश्तवाड़ में देश की 183वीं भूकंप ऑब्‍जर्वेटरी के उद्घाटन के दौरान यह घोषणा की. केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने इस वेधशाला का उद्घाटन किया.

तुम्माला ने कहा कि मंत्रालय राष्ट्रीय भूकंप निगरानी नेटवर्क का विस्तार करने की दिशा में काम कर रहा है. इसके तहत देशभर में 100 अतिरिक्त भूकंप ऑब्‍जर्वेटरी स्थापित की जाएंगी. इनमें जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में चार-चार नई वेधशालाएं शामिल हैं. उन्होंने कहा कि इस विस्तार से हम भूकंप का पता लगाने की सीमा को 2.5 तीव्रता तक कम कर सकेंगे. इससे छोटे भूकंपों का भी पता लगाना संभव होगा.

मंत्रालय के सचिव ने बताया कि राष्ट्रीय भूकंप निगरानी नेटवर्क में पिछले वर्षों के दौरान उल्लेखनीय विस्तार हुआ है. वर्ष 2014 में इस नेटवर्क में 84 स्टेशन थे, जिनकी संख्या अब बढ़कर 183 हो गई है. इस तरह नेटवर्क में सेंसर और निगरानी केंद्रों की संख्या दोगुने से अधिक हो गई है. उन्होंने कहा कि यह नेटवर्क देशभर में 24 घंटे भूकंप की निगरानी करता है. इसमें हिमालयी क्षेत्र और सीमावर्ती इलाके भी शामिल हैं.

तुम्माला के अनुसार, वर्ष 2014 में नेटवर्क की क्षमता चार या उससे अधिक तीव्रता के भूकंपों का पता लगाने तक सीमित थी. अब इसकी क्षमता बढ़कर तीन या उससे अधिक तीव्रता के भूकंपों का पता लगाने की हो गई है. प्रस्तावित विस्तार के बाद 2.5 तीव्रता तक के भूकंपों की निगरानी संभव होगी. उन्होंने कहा कि किश्तवाड़ में स्थापित नई वेधशाला में डिजिटल रिकॉर्डिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया है. यह पुरानी एनालॉग प्रणाली की जगह लेगी और भूकंप संबंधी आंकड़ों को अधिक प्रभावी तरीके से दर्ज करने में मदद करेगी.

मंत्रालय आपदा तैयारियों को मजबूत करने के लिए भूकंपीय माइक्रोजोनेशन अध्ययन भी करा रहा है. सचिव ने बताया कि राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र पांच शहरों में यह अध्ययन पूरा कर चुका है. इनमें श्रीनगर भी शामिल है. आठ अन्य शहरों की अध्ययन रिपोर्ट जल्द जारी की जाएगी. उन्होंने कहा कि भूकंप संबंधी जानकारी आम लोगों तक पहुंचाने के लिए डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल किया जा रहा है. राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र की वेबसाइट और ‘भूकंप’ मोबाइल एप के जरिए वास्तविक समय की जानकारी उपलब्ध है. इसके अलावा एसएमएस, ईमेल और सोशल मीडिया के माध्यम से भी लोगों को जानकारी दी जाती है.

तुम्माला ने कहा कि किश्तवाड़ की नई वेधशाला चिनाब घाटी और आसपास के हिमालयी क्षेत्र में भूकंप निगरानी को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान देगी. उन्होंने मौसम निगरानी और पूर्वानुमान व्यवस्था में सुधार का भी उल्लेख किया. उनके अनुसार, मौसम संबंधी अवलोकन नेटवर्क, रडार और स्वचालित मौसम केंद्रों का विस्तार किया जा रहा है, जिससे मौसम की निगरानी और पूर्वानुमान क्षमता बेहतर होगी.



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