हेरोइन-कोकीन दो, पेट्रोल-डीजल, आटा लो, तस्करों ने ‘पुष्पा’ को भी छोड़ा पीछे, ईडी की 38 रेड के बाद खुलासा  

हेरोइन-कोकीन दो, पेट्रोल-डीजल, आटा लो, तस्करों ने ‘पुष्पा’ को भी छोड़ा पीछे, ईडी की 38 रेड के बाद खुलासा  


भारत में पड़ोसी देशों से ड्रग तस्करी का अनोखा तरीका सामने आया है. यहां ड्रग तस्कर एकदम पुराने तरीके से नशे का का कारोबार कर रहे हैं. लोगों को भनक भी नहीं लगती और डग्स सीमा के उस पार से इस पार आसानी से आ रही है. ईडी की 38 से ज्यादा छापेमारियों में व्यापार के इस तरीके की पोल खुली है.

टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक म्यांमार, थाईलैंड और लाओस के गोल्डन ट्रायंगल इलाके से चलने वाले अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्कर अब पुराने तरीके से भारत में ड्रग्स की खेप पहुंचाने का काम कर रहे हैं. ये गिरोह हेरोइन और मेथामफेटामाइन जैसी नशीली दवाएं भारत के पूर्वोत्तर राज्यों की खुली सीमाओं से भेजते हैं. इनका तरीका इतना पुराना है कि नई-नई तकनीकों के जमाने में कोई उसके बारे में सोच भी नहीं सकता.

भारत से इन नशीली दवाओं के बदले में नकदी नहीं दी जाती, बल्कि पेट्रोल, डीजल, आटा, तेल, किराना सामान, दवाएं, जूते और कपड़े दिए जाते हैं. ईडी की जांच में इस बात का खुलासा हुआ है कि ड्रग्स की सप्लाई के बदले में सीमा पार कोई पैसा नहीं जाता. सारा लेन-देन सामान के रूप में होता है. इनमें पेट्रोल-डीजल की मांग सबसे ज्यादा है. इसके बाद आटा, तेल जैसी बेसिक घरेलू जरूरतों के सामानों को भी बार्टर सिस्टम के तहत दिया जाता है.

रिपोर्ट में हुआ खुलासा 

ईडी ने पिछले हफ्ते पूर्वोत्तर के 38 जगहों पर छापेमारी की थी. उसके बाद बनी रिपोर्ट में यह तरीका उजागर हुआ है. म्यांमार अब अफगानिस्तान से आगे निकलकर दुनिया का सबसे बड़ा अवैध अफीम पैदा करने वाला इलाका बन गया है. रिपोर्ट के मुताबिक भारत से कुछ केमिकल म्यांमार भेजे जाते हैं. वहां नशीली दवाएं बनती हैं. इनमें तैयार हेरोइन, ब्राउन शुगर और सिंथेटिक गोलियां आदि हैं.

ऐसे होती है सप्लाई 

नशीली दवाएं तिआउ नदी पार कर जोखावथर नाम की जगह से भारत आती हैं. यह जगह म्यांमार के खावमावी के सामने है. वहां से माल चम्फाई में जमा होता है. फिर चम्फाई-आइजोल रोड और हाईवे के रास्ते आइजोल, वाइरेंगते होते हुए असम और देश के बाकी हिस्सों में पहुंच जाता है.ईडी ने उन बिचौलियों का पता लगा लिया है जो म्यांमार के गिरोहों को सामान सप्लाई करते थे.

270 करोड़ से ज्यादा के लेनदेन की पहचान 

ईडी के मुताबिक अभी तक 1400 से ज्यादा बैंक खाते फ्रीज कर दिए गए हैं. ये खाते ज्यादातर उन व्यापारियों के थे जो सामान खरीदकर नेटवर्क को देते थे. अब तक 270 करोड़ रुपये से ज्यादा के सामान के लेन-देन की पहचान हो चुकी है. इन मामलों में छह लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है. चम्फाई के हवाला वाले इन लेन-देन को संभालते थे. इनमें असम, नागालैंड, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा और दिल्ली से आए 125 करोड़ रुपये नकद भी शामिल हैं. खास बात यह है कि आइजोल और चम्फाई के हवाला खातों में पहुंचने वाला पैसा काफी हद तक दिल्ली, कोलकाता और मुंबई से आता था. अवैध पैसे को साधारण सामान में बदल दिया जाता है. फिर यह सामान मिजोरम के सीमावर्ती कस्बों में भेजा जाता है और वहां से म्यांमार पहुंच जाता है.

पैसों का इस्तेमाल सिर्फ भारत में 

ईडी के मुताबिक बैंक का इस्तेमाल सिर्फ भारत के अंदर के लेन-देन के लिए होता है. वहां जीएसटी बिल लगाकर सामान्य व्यापार जैसा दिखाया जाता है. सीमा पार सिर्फ सामान जाता है, इसलिए कोई पैसों का निशान नहीं बचता. पेट्रोल, आटा और किराना सामान अब ड्रग सप्लायरों के लिए मुद्रा बन गए हैं.

फिलहाल जांच अभी जारी है. सीमावर्ती इलाकों में माल लेने वाले, सामान पार कराने वाले, म्यांमार में बैठे लोग, पेट्रोल पंप, दुकानें और हवाला वालों की पहचान की जा रही है. ईडी ड्रग तस्करी को चलाने वाले पैसे के जाल को तोड़ने की कोशिश में है  और ज्यादा संपत्ति जब्त करने की प्रक्रिया चला रहा है.



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