NTA latest reforms, NEET Paper leak: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA पिछले कुछ समय से लगातार बदलाव के दौर से गुजर रही है.परीक्षाओं में पेपर लीक के आरोपों और खासकर 2024 की NEET-UG परीक्षा को लेकर हुए विवाद के बाद एजेंसी की परीक्षा कराने की व्यवस्था, सुरक्षा और काम करने के तरीके पर कई सवाल उठे थे.अब NTA अपने ढांचे से लेकर कर्मचारियों, सुरक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रक्रिया तक में बड़े बदलाव कर रहा है.एजेंसी की ओर से दाखिल हालिया हलफनामे में इन बदलावों की मौजूदा स्थिति के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है. इंडियन एक्सप्रेस में छपी रिपोर्ट के मुताबिक NTA का कामकाज अब दिल्ली के मिंटो रोड स्थित भारत सरकार प्रेस भवन में नए कार्यालय से चल रहा है.एजेंसी को यहां करीब 55,524.53 वर्गफुट तक जगह मिली है दूसरी ओर संवेदनशील और गोपनीय कामकाज वाले हिस्से की सुरक्षा के लिए 39 CISF जवान तैनात किए गए हैं.
NTA के संगठनात्मक ढांचे में भी बदलाव किया जा रहा है. परीक्षा के हिसाब से कर्मचारियों को अलग-अलग बांटने के बजाय अब विशेषज्ञता और काम के क्षेत्र के आधार पर फंक्शनल वर्टिकल बनाए जा रहे हैं.इसके साथ ही वरिष्ठ अधिकारियों की संख्या बढ़ाने की तैयारी है. वहीं NEET-UG को भविष्य में पेन-पेपर मोड से हटाकर कंप्यूटर-बेस्ड टेस्टिंग यानी CBT में कराने का विकल्प भी विचाराधीन है हालांकि इस पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है.
पेपर लीक विवादों के बाद क्यों बदला जा रहा है NTA?
NTA का यह ओवरहॉल ऐसे समय में हो रहा है जब पिछले कुछ वर्षों में एजेंसी की परीक्षा व्यवस्था कई विवादों के बीच रही है. पेपर लीक के आरोपों और कुछ परीक्षाओं में दोबारा परीक्षा कराने जैसी स्थितियों ने परीक्षा संचालन की व्यवस्था पर गंभीर ध्यान खींचा. 2024 की NEET-UG परीक्षा भी इसी वजह से खास तौर पर चर्चा में रही.इन घटनाओं के बाद परीक्षाओं की व्यवस्था को मजबूत करने के लिए हाई-लेवल कमेटी ऑन एग्जामिनेशन यानी HLCE का गठन किया गया था. इस कमेटी की सिफारिशों को लागू करने की निगरानी के लिए हाई-पावर्ड स्टीयरिंग कमेटी यानी HPSC बनाई गई है. इसकी अध्यक्षता डॉ.के.राधाकृष्णन कर रहे हैं.NTA के डायरेक्टर जनरल समय-समय पर इस हाई-पावर्ड कमेटी के सामने सुधारों की प्रगति की जानकारी देते रहे हैं. हालिया हलफनामा मूल रूप से यह बताता है कि HLCE की सिफारिशों को लागू करने की प्रक्रिया फिलहाल किस स्थिति में पहुंची है.
काम की विशेषज्ञता के आधार पर होगा ढांचा
NTA के काम करने के तरीके में सबसे बड़े बदलावों में से एक उसके संगठनात्मक ढांचे से जुड़ा है.अभी तक एजेंसी में एक तरह का ‘एग्जाम-वाइज वर्टिकल’ सिस्टम था यानी अलग-अलग कर्मचारी और अधिकारी खास परीक्षाओं के हिसाब से जिम्मेदारी संभालते थे.अब इसे बदलकर फंक्शनल वर्टिकल व्यवस्था की ओर ले जाया जा रहा है. इसमें कर्मचारियों और अधिकारियों को परीक्षा के बजाय उनकी विशेषज्ञता और काम के क्षेत्र के आधार पर व्यवस्थित किया जाएगा.इस बदलाव का मकसद NTA के भीतर अलग-अलग क्षेत्रों में गहरी और विशेषज्ञता आधारित क्षमता तैयार करना है यानी किसी एक परीक्षा तक सीमित रहने के बजाय अधिकारियों और कर्मचारियों की विशेषज्ञता उस पूरे कामकाज में विकसित की जाए जिसके लिए वे जिम्मेदार हैं.
डायरेक्टर जनरल का पद भी होगा अपग्रेड
NTA के शीर्ष नेतृत्व में भी बदलाव की तैयारी चल रही है. डायरेक्टर जनरल के पद को ज्वाइंट सेक्रेटरी स्तर से बढ़ाकर एडिशनल सेक्रेटरी स्तर का करने का प्रस्ताव सरकार के सक्रिय विचाराधीन है.इसके साथ ही NTA में पांच नए ज्वाइंट सेक्रेटरी स्तर के पद बनाने का प्रस्ताव भी रखा गया है. इसका उद्देश्य एजेंसी के नेतृत्व और प्रशासनिक क्षमता को मजबूत करना है.
कई अधिकारी NTA से जुड़े
संगठनात्मक बदलाव केवल कागज पर नहीं हैं बल्कि अधिकारियों की नियुक्ति भी शुरू हो चुकी है. मई 2026 में सेंट्रल स्टाफिंग स्कीम के तहत दो ज्वाइंट डायरेक्टर NTA में तैनात किए गए.इसके बाद अगस्त 2026 में अकेले 14 अधिकारी NTA में शामिल हुए. इनमें ज्वाइंट सेक्रेटरी से लेकर असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर स्तर तक के अधिकारी शामिल हैं.इन अधिकारियों में अलग-अलग सरकारी सेवाओं से आने वाले अधिकारी हैं. इनमें IAS, IPS, इंडियन रेवेन्यू सर्विस यानी IRS और इंडियन स्टैटिस्टिकल सर्विस यानी ISS समेत कई सेवाओं के अधिकारी शामिल हैं.इस तरह NTA में अलग-अलग सेवाओं और अलग-अलग विशेषज्ञता वाले अधिकारियों को शामिल किया जा रहा है. यह भी HLCE की उस सिफारिश से जुड़ा है जिसमें मल्टी-डिसिप्लिनरी और क्रॉस-कैडर लीडरशिप टीम तैयार करने पर जोर दिया गया था.
NTA का नया ऑफिस, 55 हजार वर्गफुट से ज्यादा जगह
NTA की व्यवस्था में भी बड़ा बदलाव हुआ है.पिछले एक महीने में एजेंसी का कामकाज दिल्ली के मिंटो रोड स्थित गवर्नमेंट ऑफ इंडिया प्रेस बिल्डिंग में नए आवंटित कार्यालय में शिफ्ट किया गया है.
इस बिल्डिंग की पांचवीं मंजिल और चौथी तथा छठी मंजिल के कुछ हिस्से NTA को दिए गए हैं.उपलब्ध हलफनामे के मुताबिक एजेंसी को अधिकतम 55,524.53 वर्गफुट तक का स्थान आवंटित किया गया है.यह बदलाव सिर्फ कार्यालय बदलने तक सीमित नहीं है.नए परिसर में गोपनीय कामकाज वाले हिस्से की सुरक्षा को भी मजबूत और एक जगह पर केंद्रित किया जा रहा है.इसके लिए पूरी सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ा एक व्यापक प्रोटोकॉल तैयार किया जा रहा है.
39 CISF जवान संभाल रहे हैं सुरक्षा
मिंटो रोड स्थित नए कार्यालय की सुरक्षा को लेकर भी खास इंतजाम किए गए हैं.गृह मंत्रालय यानी MHA के आदेश के बाद इस बिल्डिंग में CISF की सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई.इसके बाद यहां 39 CISF जवानों की तैनाती की गई है.इनका काम सिर्फ सामान्य सुरक्षा तक सीमित नहीं है.संवेदनशील और गोपनीय क्षेत्र में आने-जाने वाले लोगों की एक्सेस कंट्रोल और स्क्रीनिंग भी इनकी जिम्मेदारी में है.गोपनीय क्षेत्र के सभी प्रवेश और निकास बिंदुओं पर जांच की व्यवस्था की गई है.इसमें सामान की एक्स-रे जांच और डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर यानी DFMD के जरिए फ्रिस्किंग भी शामिल है यानी NTA जिस हिस्से में संवेदनशील परीक्षा संबंधी काम होता है वहां आने-जाने की प्रक्रिया को पहले के मुकाबले ज्यादा नियंत्रित और सुरक्षित बनाने की कोशिश की जा रही है.
प्रश्नपत्र तैयार होने से रिजल्ट तक SOP बदले जाएंगे
NTA ने परीक्षा प्रक्रिया को भी एक तय तरीके से चलाने के लिए कई नए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर यानी SOP तैयार किए हैं.ये SOP HLCE की सिफारिशों के आधार पर विकसित किए गए हैं.इनमें परीक्षा के पूरे चक्र को शामिल किया गया है.इसमें प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर उसका ट्रांसलेशन, प्रिंटिंग, पैकिंग, ट्रैकिंग और एक जगह से दूसरी जगह भेजने तक की प्रक्रिया शामिल है.इसके बाद परीक्षा के दिन की पूरी व्यवस्था भी इन SOP का हिस्सा है.इसमें ट्रंक खोलने की प्रक्रिया, परीक्षा केंद्र की सुरक्षा व्यवस्था और परीक्षा का रिजल्ट तैयार करने की अंतिम प्रक्रिया तक को शामिल किया गया है.इसका मकसद यह है कि परीक्षा से जुड़े हर चरण के लिए एक तय प्रक्रिया हो और अलग-अलग स्तर पर काम करने वाले लोगों के लिए नियम स्पष्ट रहें.
परीक्षा केंद्रों पर भी कई स्तर की सुरक्षा
NTA के नए सुरक्षा और परीक्षा संचालन ढांचे में तकनीक का इस्तेमाल भी बढ़ाया जा रहा है.हलफनामे में आधार आधारित बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन और फेस ऑथेंटिकेशन जैसी व्यवस्थाओं का जिक्र किया गया है.इसके साथ ही मल्टी-लेयर फ्रिस्किंग यानी कई स्तरों पर जांच, परीक्षा केंद्रों पर मोबाइल जैमर और CCTV मॉनिटरिंग जैसी व्यवस्थाएं भी शामिल हैं.एजेंसी परीक्षा की निगरानी में AI आधारित टूल्स का भी इस्तेमाल कर रही है.इसके अलावा परीक्षा मॉनिटरिंग के लिए पांच स्तरों वाली ओवरसाइट व्यवस्था का प्रावधान किया गया है.हलफनामे में इन उपायों का विस्तृत विवरण दूसरी जगह दिए जाने की बात कही गई है, इसलिए वहां इन्हें दोबारा विस्तार से नहीं दोहराया गया है.
NEET-UG को CBT कराने पर अभी फैसला बाकी
NTA के सुधारों में सबसे महत्वपूर्ण और बड़े संभावित बदलावों में NEET-UG का मोड बदलना हो सकता है.फिलहाल NEET-UG पेन-पेपर मोड में आयोजित होता है लेकिन इसे कंप्यूटर-बेस्ड टेस्टिंग यानी CBT में बदलने की संभावना पर विचार चल रहा है.इसके लिए एक हाई-पावर्ड टास्क फोर्स यानी HPTF इस पूरे मामले की जांच कर रही है.टास्क फोर्स यह देख रही है कि NEET-UG को पेन-पेपर से कंप्यूटर-बेस्ड परीक्षा में बदला जाए या नहीं.अगर बदलाव किया जाता है तो इसे किस क्रम में लागू किया जाएगा और इसके लिए किस तरह के इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होगी इसका भी आकलन किया जा रहा है.इसलिए फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि NEET-UG निश्चित रूप से CBT मोड में चला जाएगा.अभी यह विकल्प जांच और विचार के स्तर पर है.