राहुल को PM बनना था तो मनमोहन सिंह की जगह क्यों नहीं बने? किसने खोली कुंडली
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Ramdas Athawale on Rahul Gandhi: राहुल गांधी की रैलियों और चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष के प्रदर्शनों पर केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने जमकर सवाल उठाए हैं’ सवाल के साथ ही तंज भी कसा है.उन्होंने कहा कि आंदोलन से सरकार नहीं बदलती. अगर राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनना था तो मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री रहते यह मौका था. इसके साथ ही आठवले ने 2029 के चुनाव, ममता बनर्जी और वोट चोरी के आरोपों पर भी कांग्रेस और विपक्ष को घेरा है. जानते हैं पूरी बात.
राहुल गांधी की रैलियों से क्यों नहीं बदलेगी सरकार? रामदास आठवले ने कांग्रेस को मनमोहन सिंह की याद क्यों दिलाई?
Rahul Gandhi: केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी कितनी भी रैलियां निकाल लें इससे नरेंद्र मोदी की सरकार नहीं बदलने वाली. उनका कहना है कि देश का माहौल प्रधानमंत्री मोदी और एनडीए के पक्ष में है. इसके साथ ही आठवले ने राहुल गांधी को मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री रहते ही पीएम बनने की सलाह देते हुए सवाल किया कि उस समय उन्होंने यह जिम्मेदारी क्यों नहीं संभाली. उन्होंने विपक्ष के चुनाव आयोग पर लगाए जा रहे आरोपों को भी गलत बताया है. आखिर रामदास अठावले ने किन-किन मामलों पर क्या-क्या कहा? आइए जानते हैं.
राहुल को PM बनना था तो पहले बनते
मीडिया में छपी खबर के मुताबिक, रामदास आठवले ने कहा कि राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनना था तो उन्हें उस समय बनना चाहिए था, जब मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने थे. अभी कांग्रेस को बहुमत मिलने वाला नहीं है. उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान का भी जिक्र किया. आठवले के मुताबिक, अमित शाह ने कहा है कि जब तक एनडीए मजबूत है, राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाने का सपना पूरा नहीं होगा.
रैलियों से नहीं बदलती सरकार
आठवले ने कहा कि राहुल गांधी को रैली निकालने का पूरा अधिकार है. लेकिन लोकतंत्र में लगातार प्रदर्शन करने से सरकार नहीं बदलती. अगर कांग्रेस को सरकार बदलनी है तो उसे 2029 के चुनाव में यह मुद्दा उठाना चाहिए. उन्होंने चुनाव आयोग के खिलाफ बयानबाजी और प्रदर्शनों पर भी नाराजगी जताई. उनका कहना है कि चुनाव आयोग ने मतदाता सूची ठीक करने के लिए कुछ नाम हटाए हैं. ऐसे में जानबूझकर विवाद खड़ा करना सही नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि 2014 में जब बीजेपी की सरकार बनी थी, तब मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति कांग्रेस के शासनकाल में हुई थी. प्रधानमंत्री मोदी के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल करने से कांग्रेस की प्रतिष्ठा खराब हो रही है.
दीपावली से पहले रैली पर उठाए सवाल
आठवले ने कहा कि दीपावली से पहले इस तरह की रैली नहीं निकालनी चाहिए थी. व्यापारियों ने भी इससे होने वाले नुकसान को लेकर अपील की थी, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई. उनके मुताबिक, रैली की वजह से व्यापारियों को नुकसान उठाना पड़ा.
ममता बनर्जी के वोट चोरी आरोप पर क्या बोले?
रामदास आठवले ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी तीन बार मुख्यमंत्री रह चुकी हैं और केंद्र में मंत्री भी रही हैं. अगर वह 2026 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी की जीत पर वोट चोरी का आरोप लगा रही हैं तो 2021 में उनकी सरकार बनने पर किसी ने ऐसा आरोप नहीं लगाया था. उस समय सभी ने जनता के फैसले का सम्मान किया था. आठवले ने कहा कि जब विपक्ष को सत्ता मिलती है तो उसे वोट चोरी नहीं दिखती, लेकिन दूसरी पार्टी की सरकार बनने पर यही आरोप लगाए जाते हैं.
1984 के सिख दंगों का भी किया जिक्र
आठवले ने 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद सिख समुदाय पर हुए हमलों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि उस दौरान कई सिखों की हत्या हुई और उनके मकान जलाए गए थे. गृह मंत्री अमित शाह ने इस मामले में जो कहा है, वह सही है. सिख समुदाय उस दौर की घटनाओं को नहीं भूल सकता. आठवले ने दावा किया कि पंजाब में अब उनकी सरकार बनने वाली है.