पराली से धुआं-धुआं हुआ मध्य प्रदेश, पंजाब-राजस्थान के बाद एमपी में सबसे ज्यादा जली, श्योपुर सबसे आगे

पराली से धुआं-धुआं हुआ मध्य प्रदेश, पंजाब-राजस्थान के बाद एमपी में सबसे ज्यादा जली, श्योपुर सबसे आगे


शिवकांत आचार्य(भोपाल), 

MP Parali Burning Cases: धान की कटाई के बाद अब मध्य प्रदेश के खेतों से उठता धुआं चिंता बढ़ा रहा है. प्रदेश में पराली जलाने के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. ताजा आंकड़ों के मुताबिक, पराली जलाने के मामले में मध्य प्रदेश अब देश के टॉप 3 राज्यों में शामिल हो गया है. पंजाब और राजस्थान के बाद सबसे ज्यादा पराली एमपी में जलाई जा रही है.

ICAR की CREAMS लैब के डेटा के अनुसार 1 नवंबर तक के 45 दिनों में प्रदेश में पराली जलाने के 566 मामले दर्ज किए गए हैं. यह आंकड़ा बीते साल यानी 2025 की तुलना में करीब 10 फीसदी ज्यादा है. यानी हर साल पराली जलाने का चलन कम होने के बजाय बढ़ता नजर आ रहा है.

धान की कटाई के बाद बढ़ा ट्रेंड
धान की फसल कटने के बाद खेतों में बचे अवशेष यानी पराली को हटाना किसानों के लिए समय और खर्च का काम होता है. अगली फसल की बुवाई की जल्दी में कई किसान आसान रास्ता अपनाते हुए खेतों में आग लगा देते हैं. यही वजह है कि कटाई के बाद के दिनों में ऐसे मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है.

इन जिलों में सबसे ज्यादा मामले
प्रदेश में सबसे ज्यादा 70 मामले श्योपुर जिले में दर्ज किए गए हैं. इसके बाद अन्य जिलों की स्थिति इस प्रकार है-

गुना: 45 मामले
नर्मदापुरम: 41 मामले
दतिया: 38 मामले
सीहोर: 37 मामले
उज्जैन: 33 मामले

सेहत और खेत दोनों को नुकसान
पराली जलाने से हवा में धुआं और पॉल्यूशन फैलता है, जिससे सांस के मरीजों, बच्चों और बुजुर्गों को परेशानी हो सकती है. इसके साथ ही खेत की मिट्टी में मौजूद उपजाऊ तत्व और मित्र कीट भी नष्ट हो जाते हैं, जिससे आगे चलकर पैदावार पर असर पड़ सकता है.

एक्सपर्ट का क्या कहना है
एक्सपर्ट किसानों को सलाह देते हैं कि वे पराली जलाने के बजाय उसे खेत में ही मिलाएं, खाद बनाएं या चारे और अन्य इस्तेमाल के लिए करें. इससे मिट्टी की सेहत भी सुधरती है और पर्यावरण भी सुरक्षित रहता है.

पराली के मामलों में लगातार हो रही बढ़ोतरी को देखते हुए जरूरत है कि किसानों को जागरूक किया जाए और वैकल्पिक साधन उपलब्ध कराए जाएं, ताकि प्रदेश को इस धुएं से राहत मिल सके.



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