‘कांची-कांची बांस के बहंगिया’, लोक गायिका नीता सिंह का नया छठ गीत लॉन्च, सुनकर याद आ जाएंगी शारदा सिन्हा

‘कांची-कांची बांस के बहंगिया’, लोक गायिका नीता सिंह का नया छठ गीत लॉन्च, सुनकर याद आ जाएंगी शारदा सिन्हा


नई दिल्ली: छठ महापर्व अब सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि विदेशों में भी इसकी भव्य रौनक देखने को मिलती है. चार दिनों तक चलने वाले इस आस्था के महापर्व की शुरुआत इस साल 13 नवंबर से हो रही है, जो 16 नवंबर तक मनाया जाएगा. इस अवसर पर श्रद्धालुओं को एक नया छठ गीत सुनने को मिलेगा, जिसे जल्द ही लॉन्च किया जा रहा है.

मशहूर आध्यात्मिक और शास्त्रीय संगीत गायिका डॉ. नीता सिंह का यह नया छठ गीत सुनकर आपको स्वर कोकिला शारदा सिन्हा की याद आ जाएगी. 50 वर्षों से शास्त्रीय संगीत की साधना कर रहीं डॉ. नीता सिंह युवा पीढ़ी को भी संगीत सिखा रही हैं. उन्हें संगीत नाटक अकादमी द्वारा लगातार 5 वर्षों तक प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है.

यह है छठ महापर्व का नया गीत
डॉ. नीता सिंह ने जो गाना छठ महापर्व पर लिखा है और जिसे वह सोमवार को रिलीज़ कर रही हैं. उसका मुखड़ा पारंपरिक धुन पर तैयार किया गया है, जो कुछ इस तरह है:

केरवा जे फरेला घवद से, ओह पर सुगा मँडराए,
काँची-काँची बाँस के बहँगिया, बहँगी लचकत जाए.

नदिया किनारे घाट सजइनी, फूलवा से सजल द्वार,
दउरा में ठेकुआ, केरा, नारियल, सज गइल पूरा संसार.

सांझ के अरघिया देवे चलली, घाटे उमड़ल भीड़,
दिया जले नदिया के तीर, मिटे मन के सब पीर.

लाल चुनरिया, माथे सेनुर, आँख में भक्ति अपार,
छठी मैया के चरण में, अर्पित तन-मन-प्राण.

केरवा जे फरेला घवद से, ओह पर सुगा मँडराए,
काँची-काँची बाँस के बहँगिया, बहँगी लचकत जाए.

उगहीं सूरजदेव, हमार अरघिया करीं स्वीकार,
हमरो आँगनवा में भर दीं सुख, नेह-दुलार.

केरवा जे फरेला घवद से, ओह पर सुगा मँडराए,
काँची-काँची बाँस के बहँगिया, बहँगी लचकत जाए.

शारदा सिन्हा से ली प्रेरणा
डॉ. नीता सिंह ने बताया कि उन्होंने छठ गीत लिखने के लिए शारदा सिन्हा से ही प्रेरणा ली थी. शारदा सिन्हा उनकी गुरु रहीं हैं और मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने शारदा सिन्हा के साथ मंच भी साझा किया था. जिसमें उन्होंने दो गीत गाए थे. पहला था गंगा नहाए और दूसरा था चमके चंदा सा मुखड़ा तोहार गोरिया… उन्होंने बताया कि छठ महापर्व सिर्फ एक महापर्व ही नहीं है बल्कि भारत की सांस्कृतिक और पारंपरिक धरोहर का एक मजबूत नींव है. उन्होंने बताया कि जल्द ही वह निर्गुण भजन और शास्त्रीय संगीत पर आधारित कुछ और भजन भी तैयार कर रही है, जो जल्द ही लोगों को सुनने के लिए मिलेंगे.

उन्होंने यह भी बताया कि क्योंकि वह देहरादून में पली बढ़ी और बनारस के बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से उन्होंने अपनी संगीत की शिक्षा ली ऐसे में भोजपुरी लिखना और बोलना उनके लिए कोई भी कठिन काम नहीं था. इसीलिए उन्होंने भोजपुरी गाने को आराम से गाया और पूरे दिल से गाया है. उन्होंने बताया कि इस पूरे सफर में उनके पति अवनीश सिंह ने भी उनका पूरा सहयोग किया और अजीत चौबे ने वीडियो एडिटिंग से लेकर के गाने को लिखने तक में उनकी काफी मदद की.



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