Uttar Pradesh Government: उत्तर प्रदेश के तीन जिलों बहराइच, मिर्जापुर और गोरखपुर का ग्रामीण विकास और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में पूरे देश में डंका बज रहा है. भारत सरकार के मंत्रिमंडल सचिवालय द्वारा देश भर से चुनी गई 27 सर्वश्रेष्ठ प्रशासनिक प्रथाओं में इन तीनों जिलों के अनूठे मॉडलों को शामिल किया गया है. उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (UPSRLM) के सहयोग से इन जिलों का परचम लहर रहा है. दरअसल, UPSRLM की मदद से सामुदायिक सहभागिता, तकनीकी नवाचार और महिला नेतृत्व मिलकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था की सूरत बदल गई है. इनकी सफलताओं का सत्यापन करने के लिए राष्ट्रीय सुशासन केंद्र (NCGG) की केंद्रीय टीम ने इन जिलों का दौरा किया है.
बहराइच के मिहिपुरवा विकास ब्लॉक के घुम्माना भारू ग्राम पंचायत में स्थापित सामुदायिक सौर आजीविका मॉडल ने यह दिखाया है कि नवीकरणीय ऊर्जा से कृषि उत्पादन को कैसे पंख लग सकती है. ‘ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया’ (TRI) के सहयोग से यहां 43-किलोवाट-पीक का सोलर माइक्रोग्रिड स्थापित किया गया है, जो 10 सोलर पंपों के माध्यम से लगभग 200 परिवारों की 100 एकड़ कृषि भूमि को समय पर सिंचाई सुविधा मुहैया करा रहा है. इसके अलावा, ग्राम विद्युत समिति ई-रिक्शा चार्जिंग, ई-स्कूटर चार्जिंग और मोबाइल चार्जिंग जैसी स्वच्छ ऊर्जा सेवाएं भी संचालित कर रही है, जिससे ग्रामीण इलाकों में स्थानीय स्तर पर नए आजीविका के द्वार खुले हैं.
मिर्जापुर: 1,221 महिलाओं का सामूहिक कृषि उद्यम और ‘लखपति दीदी’ का सफर
मिर्जापुर की यह शानदार उपलब्धि ग्रामीण महिलाओं की व्यावसायिक क्षमता और नेतृत्व का एक बेहतरीन प्रमाण है. छानवे विकास ब्लॉक में ‘छानवर एग्रो फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड’ की स्थापना 2022-23 में की गई थी, जिसका संचालन पूरी तरह से 1,221 महिला शेयरधारकों द्वारा किया जा रहा है. यह एफपीओ कृषि विपणन, बायोफर्टिलाइजर उत्पादन और आधुनिक कृषि उपकरणों की सुलभता सुनिश्चित कर रहा है. इन महिलाओं ने सामूहिक प्रयासों से 25 मीट्रिक टन गेहूं की आपूर्ति सफलता पूर्वक पूरी की है और लगभग 10.50 लाख रुपये का बिजनेस मार्जिन अर्जित कर रही हैं. विंध्या मार्ट जैसे मंचों के जरिए स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा मिल रहा है, जिससे महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बनने के लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रही हैं.
गोरखपुर: बायोफ्लॉक तकनीक से मत्स्य पालन में उतरीं महिलाएं
गोरखपुर के खजनी विकास ब्लॉक के छटाहि ग्राम पंचायत में ‘जल परी प्रेरणा महिला मत्स्य उत्पादक समूह’ आधुनिक जलीय कृषि की एक नई इबारत लिख रहा है. सीमित स्थान और जल प्रबंधन की पारंपरिक बाधाओं को पार करते हुए इन महिलाओं ने बायोफ्लॉक तकनीक के जरिए वैज्ञानिक और नियंत्रित तरीके से मछली पालन शुरू किया है. सूक्ष्मजीव प्रक्रियाओं और बेहतर जल गुणवत्ता प्रबंधन के सहारे कम जगह में भी उच्च स्तर पर मछली उत्पादन संभव हो रहा है. इस पहल से महिलाओं को पारंपरिक व्यवसायों से हटकर एक आधुनिक तकनीकी आजीविका से जुड़ने का बड़ा अवसर मिला है, और वे भविष्य में इन इकाइयों का दायरा बढ़ाने की योजना बना रही हैं.
सामुदायिक सहभागिता और महिला सशक्तिकरण की साझा ताकत
भले ही इन तीनों जिलों की कार्यप्रणाली और गतिविधियां अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़ी हैं, लेकिन सबका मूल दृष्टिकोण पूरी तरह समान है. बहराइच ने जहां सौर ऊर्जा को कृषि और सामुदायिक सेवाओं से जोड़ा, वहीं मिर्जापुर ने महिलाओं को कृषि उद्यम का मुख्य केंद्र बनाया और गोरखपुर ने तकनीक आधारित मत्स्य पालन का सफल प्रयोग किया. मंत्रिमंडल सचिवालय और राष्ट्रीय सुशासन केंद्र द्वारा इन पहलों की सराहना यह दर्शाती है कि जब स्थानीय संसाधनों और सामूहिक संस्थाओं का सही समन्वय होता है, तो ग्रामीण इलाके आत्मनिर्भर बनते हैं. उत्तर प्रदेश के लिए यह राष्ट्रीय मान्यता अन्य जिलों में भी इन सफल मॉडलों को लागू करने का एक बेहतरीन अवसर प्रदान करती है.
देश भर के लिए प्रेरणा बना उत्तर प्रदेश का ग्रामीण विकास मॉडल
इन तीनों मॉडलों की सफलता यह गहरा संदेश देती है कि जब ग्रामीण समुदाय खुद सक्रिय भागीदार बनते हैं, महिलाएं आर्थिक निर्णयों के केंद्र में आती हैं और दैनिक जीवन की चुनौतियों को हल करने के लिए तकनीक का उपयोग किया जाता है, तो विकास स्वतः ही टिकाऊ और असरदार हो जाता है. यूपीएसआरएलएम, जिला प्रशासनों, सहयोगी संगठनों और महिला स्व-सहायता समूहों के समन्वित प्रयासों ने इन योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाया है.