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Pilibhit Voter list Scam: उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों पर भारत चुनाव आयोग ने सख्त रुख अपनाया है. आयोग ने तत्काल प्रभाव से दो निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ईआरओ) मयंक गोस्वामी और हेमंत चौधरी को निलंबित करने के आदेश दिए हैं. साथ ही, आरोपी अधिकारियों और वीआरसी कंप्यूटर ऑपरेटर अनिल कुमार के खिलाफ दर्ज एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 198 जोड़ने के निर्देश भी दिए हैं.
वोटर लिस्ट में गड़बड़ी करने वाले 2 ईआरओ को किया गया सस्पेंड
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में मतदाता सूचियों में कथित गड़बड़ियों और धांधलियों पर भारतीय चुनाव आयोग ने अब एक्शन लिया है. पीलीभीत विधानसभा क्षेत्र-127 की वोटर लिस्ट में सामने आई गंभीर अनियमितताओं पर आयोग ने दो निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ईआरओ) को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है. आयोग के इस कड़े फैसले से प्रशासनिक गलियारों में भारी हड़कंप मच गया है.
निर्वाचन आयोग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, पीलीभीत विधानसभा क्षेत्र-127 के ईआरओ (ERO) मयंक गोस्वामी और हेमंत चौधरी को तुरंत प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है. आयोग ने निर्देश दिया है कि दोनों अधिकारियों की चार्जशीट सीधे निर्वाचन आयोग को भेजी जाएगी, ताकि उसकी गहन जांच की जा सके. सबसे खास बात यह है कि आयोग की पूर्व अनुमति के बिना इन दोनों अधिकारियों को दोबारा बहाल नहीं किया जाएगा. इसके अलावा, दोनों ईआरओ और वीआरसी (VRC) कंप्यूटर ऑपरेटर अनिल कुमार के खिलाफ पहले से दर्ज एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर धारा 198 जोड़ने के भी आदेश दिए गए हैं.
चुनाव आयोग का लेटर हेड, जिसमें दोनों ईआरओ को सस्पेंड करने का आदेश दिया गया है.
तीन दिन में AERO की भूमिका और एक हफ्ते में पूरी रिपोर्ट तलब
मामले की गंभीरता को देखते हुए निर्वाचन आयोग ने तय समयसीमा के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं. वीआरसी ऑपरेटर के खिलाफ की गई कार्रवाई की रिपोर्ट और 127-पीलीभीत विधानसभा क्षेत्र के पांच सहायक निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (AERO) की भूमिका की विस्तृत जांच रिपोर्ट तीन दिनों के भीतर तलब की गई है. इसके साथ ही, पीलीभीत जिले की सभी चारों विधानसभा सीटों की मतदाता सूचियों की स्क्रूटनी रिपोर्ट एक सप्ताह के भीतर विशेष टिप्पणियों के साथ आयोग को भेजने को कहा गया है.
पूरे उत्तर प्रदेश में मतदाता सूचियों की होगी विशेष जांच
पीलीभीत प्रकरण के बाद चुनाव आयोग ने पूरे उत्तर प्रदेश के लिए बड़ा निर्देश जारी किया है. प्रदेश के सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEO) और ईआरओ को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्र की मतदाता सूचियों की दोबारा गहन जांच (Re-examine) करें. विशेष तौर पर फॉर्म-6, फॉर्म-7 और फॉर्म-8 के माध्यम से नाम जोड़ने, हटाने या उनमें संशोधन करने के दौरान की गई डेटा फीडिंग (Data Feeding) की विशेष और कड़ी जांच की जाएगी, ताकि भविष्य में इस तरह की गड़बड़ियों को पूरी तरह से रोका जा सके. आयोग के इस सख्त कदम से लापरवाह अधिकारियों और कर्मचारियों में भारी खौफ व्याप्त है.