अहोई अष्टमी पर कब होंगे तारों के दर्शन? जानें आपके शहर में तारे निकलने का समय
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Ahoi Ashtami 2026 Taare Nikalne Ka Time: अहोई अष्टमी के पावन व्रत पर माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र और खुशहाल जीवन के लिए निर्जला व्रत रखती हैं. इस दिन तारों को देखने और उन्हें अर्घ्य देने का विशेष महत्व होता है. यदि आप भी जानना चाहते हैं कि दिल्ली, उत्तर प्रदेश, भोपाल और अन्य प्रमुख शहरों में तारों के दर्शन और अर्घ्य देने का सटीक समय क्या रहेगा, तो यहाँ जानें अपने शहर के अनुसार पूजा और चंद्र/तारों को अर्घ्य देने का सही मुहूर्त.
Ahoi Ashtami 2026 Taare Nikalne Ka Time: अहोई अष्टमी का पर्व संतान की सुख-समृद्धि और लंबी आयु की कामना के लिए मनाया जाता है. आज माताएं अहोई माता का व्रत रखती हैं और शाम के समय विधि-विधान से पूजा-अर्चना करती हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अहोई माता की पूजा करने से संतान के जीवन में आने वाली परेशानियां दूर होती हैं और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है. अहोई अष्टमी पर तारों की पूजा का विशेष महत्व है. मान्यता है कि माताएं शाम को आकाश में तारे निकलने के बाद उन्हें जल अर्पित करती हैं और अपनी संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य तथा उज्ज्वल भविष्य की प्रार्थना करती हैं. तारों को अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण किया जाता है. आइए जानते हैं दिल्ली, UP, मध्य प्रदेश समेत आपके शहर में तारों के निकलने का सटीक समय…
अहोई अष्टमी 2026: शहरों के अनुसार तारों के निकलने का समय
अहोई माता की पूजा का शुभ मुहूर्त – शाम 5:36 से 6:54 बजे तक.
तारों के दर्शन का समय – शाम करीब 6:01 बजे.
प्रमुख शहरों में तारों के निकलने का समय
| शहर | तारे निकलने का समय |
| दिल्ली | शाम 6 बजकर 01 मिनट |
| नोएडा | शाम 6 बजे |
| मथुरा | शाम 6 बजे |
| वृंदावन | शाम 6 बजे |
| मुंबई | शाम 6 बजकर 28 मिनट |
| जयपुर | शाम 6 बजकर 08 मिनट |
| लखनऊ | शाम 5 बजकर 47 मिनट |
| भोपाल | शाम 6 बजकर 05 मिनट |
| कोलकाता | शाम 5 बजकर 22 मिनट |
| पटना | शाम 5 बजकर 30 मिनट |
| चंडीगढ़ | शाम 6 बजे |
| अहमदाबाद | शाम 6 बजकर 25 मिनट |
| बेंगलुरु | शाम 6 बजकर 15 मिनट |
| चेन्नई | शाम 6 बजकर 04 मिनट |
| हैदराबाद | शाम 6 बजकर 07 मिनट |
| पुणे | शाम 6 बजकर 24 मिनट |
नोट: इस प्रकार अहोई अष्टमी पर माताएं तारों को अर्घ्य देकर अहोई माता से अपनी संतान की खुशहाली और लंबी उम्र की कामना करती हैं. धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक व्रत और पूजा करने से माता का आशीर्वाद प्राप्त होता है. वास्तविक दर्शन मौसम, बादलों और स्थानीय वातावरण के अनुसार कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकते हैं.