महादेव ऐप का किंगपिन सौरभ ओमान से डिपोर्ट, अब CBI खोलेगी सट्टेबाजी के सारे तार
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Saurabh Chandrakar Oman Extradition: महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप का कथित मास्टरमाइंड सौरभ चंद्राकर अभी ओमान में है. उसे जून 2026 में इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर हिरासत में लिया गया था. भारत उसकी वापसी के लिए प्रत्यर्पण की कोशिश कर रहा है, लेकिन ओमान में कथित फर्जी इंडोनेशियाई पासपोर्ट का मामला अड़चन बना हुआ है. ED ने मार्च 2026 में उससे जुड़े करीब 1700 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच की थीं.
सौरभ को ओमान में पकड़ा गया.
दुबई की रंगीन रातों से लेकर ओमान के रेगिस्तान तक. भारत के सबसे बड़े ऑनलाइन सट्टेबाजी सिंडिकेट महादेव ऐप का मास्टरमाइंड सौरभ चंद्राकर विदेश में बैठकर हजारों करोड़ रुपये का सट्टेबाजी का नेटवर्क चला रहा था और हिंदुस्तानी एजेंसियों की आंखों में धूल झोंक रहा था. वो आखिरकार कानून के शिकंजे में आ ही गया. CBI और ED की चालाक चाल और इंटरनेशनल पुलिस के धमाकेदार कॉम्बिनेशन ने ओमान से मस्कट होते हुए ऐसा प्रत्यर्पण यानी एक्सट्रडिशन किया कि सट्टेबाज़ों की दुनिया में हड़कंप मच गया. इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस से लेकर मस्कट से कस्टडी में भारत लाने तक का यह पूरा ऑपरेशन किसी ब्लॉकबस्टर मूवी की तरह चला. अब रायपुर की स्पेशल सीबीआई कोर्ट में पेशी के साथ ही उस पूरे नेटवर्क, म्यूल बैंक खातों और सट्टे के इस काले खेल के बड़े-बड़े संरक्षकों के नकाब उतरने का समय आ चुका है.
कैसे बिछा जाल और मस्कट से हुआ एक्सट्रडिशन?
सौरभ चंद्राकर के खिलाफ इंटरनेशनल लेवल पर शिकंजा कसने के लिए इंटरपोल की तरफ से रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था. इसी नोटिस के दम पर उसकी लोकेशन ओमान में ट्रेस की गई, जिसके बाद रॉयल ओमान पुलिस ने उसे दबोच लिया. बिना वक्त गंवाए CBI और ED ने ओमान सरकार को पुख्ता सबूतों के साथ प्रत्यर्पण के औपचारिक दस्तावेज सौंपे. दोनों देशों के बीच बेहतरीन तालमेल के चलते ओमान ने भारत के अनुरोध को हरी झंडी दे दी और CBI की स्पेशल टीम मस्कट से उसे लेकर भारत पहुंच गई.
रायपुर कोर्ट में पेशी और मनी लॉन्ड्रिंग का शिकंजा
भारत पहुंचते ही सौरभ चंद्राकर की मुश्किलें और बढ़ने वाली हैं. सबसे पहले उसका मेडिकल परीक्षण कराया जाएगा और ट्रांजिट रिमांड पर उसे रायपुर लाया जाएगा. कल उसे रायपुर की विशेष CBI अदालत में पेश किया जाएगा. बता दें कि CBI इस मामले में पहले ही दो चार्जशीट दाखिल कर चुकी है, जबकि प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी मनी लॉन्ड्रिंग के तहत उसकी करोड़ों की संपत्तियां अटैच कर चुका है और प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दर्ज कर चुका है.
कैसे चलता था करोड़ों का अवैध सट्टेबाजी का खेल?
जांच में खुलासा हुआ है कि महादेव बुक कोई आम ऐप नहीं, बल्कि देश-विदेश में फैला एक हाई-टेक सिंडिकेट था. फ्रेंचाइजी मॉडल पर चलने वाले इस नेटवर्क में देश के अलग-अलग शहरों में पैनल और ब्रांच बनाई गई थीं. सट्टे के इस खेल से आने वाले काले धन को छिपाने के लिए तमाम ‘म्यूल बैंक अकाउंट्स’ का इस्तेमाल किया जाता था. पैसों को कई लेयर्स में घुमाने के बाद हवाला के जरिए देश से बाहर भेजा जाता था. अब भारत की अदालत में उसकी पेशी के बाद इस सिंडिकेट के बाकी बचे चेहरों और संरक्षकों से भी पर्दा उठने की पूरी उम्मीद है.