Mumbai Family Court Divorce। Mental Cruelty Divorce Grounds। Extra-Marital Affair Allegations। चरित्र के दाग धोते-धोते घिसी चप्पलें, IAF अफसर को बीवी

Mumbai Family Court Divorce। Mental Cruelty Divorce Grounds। Extra-Marital Affair Allegations। चरित्र के दाग धोते-धोते घिसी चप्पलें, IAF अफसर को बीवी


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मुंबई फैमिली कोर्ट ने कहा है कि पति के चरित्र, विवाहेतर संबंधों और शराब पीने को लेकर बिना सबूत गंभीर आरोप लगाना मानसिक क्रूरता हो सकता है. ऐसे आरोप तलाक का आधार बन सकते हैं. अदालत ने 59 वर्षीय पूर्व वायुसेना अधिकारी को तलाक दे दिया. करीब 12 साल छह महीने चली कानूनी लड़ाई के बाद कोर्ट ने कांदिवली फ्लैट में उनके रहने का अधिकार भी बरकरार रखा.

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कोर्ट ने पति को राहत दी.

यह केस सच में किसी फिल्मी ड्रामे से कम नहीं है. 12 साल, 6 महीने और 19 दिन… सोचकर देखिए, इतने लंबे वक्त तक किसी इंसान को कोर्ट के चक्कर काटने पड़ें और उस पर कैरेक्टर से लेकर शराब तक के ऐसे-ऐसे गंदे और बेबुनियाद इल्जाम लगें कि उसकी पूरी सोशल लाइफ और शांति धू-धू करके जल जाए. पूर्व एयरफोर्स अफसर की जिंदगी में बीवी के इन झूठे आरोपों ने ऐसा भूचाल लाया कि बेचारे की चप्पलें घिस गईं, पर दाग धोने में सालों बीत गए. पत्नी खुद एक लॉयर थीं, इसलिए कानूनी दांव-पेच का ऐसा जाल बुना कि अफसर साहब का जीना मुहाल कर दिया. लेकिन कहते हैं ना कि सच की जीत देर से ही सही, पर धमाकेदार होती है. फैमिली कोर्ट ने आखिरकार दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया और कोर्ट के इस अल्टीमेट फैसले ने साबित कर दिया कि सिर्फ जुबानी तीर चलाने से किसी की इज्जत नहीं मिटती. इस लीगल बैटल ने बता दिया कि टॉक्सिक रिश्तों से बाहर निकलना कितना जरूरी है.

12 साल, 6 महीने और 19 दिन चली लंबी कानूनी जंग
मुंबई से एक बेहद दिलचस्प और चर्चित कानूनी मामला सामने आया है, जहां एक पूर्व एयरफोर्स ऑफिसर और उनकी पत्नी का रिश्ता आखिरकार कानूनी रूप से टूट गया. यह लीगल बैटल कोई छोटी-मोटी नहीं, बल्कि पूरे 12 साल, 6 महीने और 19 दिनों तक चली. दोनों की शादी दिसंबर 1997 में मुंबई में हुई थी और उनकी एक बेटी भी है. आखिरकार फैमिली कोर्ट ने पति की काउंटर-क्लेयर याचिका को स्वीकार करते हुए क्रूरता के आधार पर मैरिज को डिजॉल्व कर दिया.

अफेयर और शराब के झूठे आरोप बने मानसिक क्रूरता
पति की वकील ने कोर्ट में दलील दी कि पत्नी ने बिना किसी ठोस सबूत के पति पर अवैध संबंधों और शराब की लत के गंभीर और लापरवाह आरोप लगाए. कोर्ट ने माना कि हिंदू विवाह अधिनियम में ‘क्रूरता’ की कोई सटीक परिभाषा नहीं है, लेकिन बिना सबूत के साथी के चरित्र पर कीचड़ उछालना मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आता है. सबसे खास बात यह रही कि पति के बयानों पर पत्नी ने कोई क्रॉस-एक्जामिनेशन नहीं किया, जिससे पति का पक्ष मजबूत हो गया.

घरेलू हिंसा के आरोप और ससुर का हियरसे बयान
साल 2014 की शुरुआत में पेशे से वकील पत्नी ने घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत पति पर शारीरिक, यौन और मानसिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए थे. दूसरी ओर, पति ने पलटवार करते हुए कहा कि पत्नी हर आधिकारिक ट्रिप पर उस पर शक करती थी, सरेआम बेइज्जती करती थी और एयरफोर्स की नौकरी छोड़कर प्राइवेट जॉब करने का दबाव बनाती थी. सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी पाया कि पत्नी के पिता ने जो आरोप लगाए थे, वे सुनी-सु सुनाई बातों यानी ‘हियरसे’ पर आधारित थे, जिनका कोई व्यक्तिगत ज्ञान नहीं था.

कोर्ट का कड़ा रुख और प्रॉपर्टी पर फैसला
फैमिली कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले ने साफ कर दिया कि केवल जुबानी या निराधार आरोपों के आधार पर किसी की छवि खराब करना कानून की नजरों में भारी पड़ सकता है. कोर्ट ने अपने आदेश में पति को कांदिवली वाले फ्लैट में रहने का हक दिया है और पत्नी को निर्देश दिया है कि वह कांदिवली और सांताक्रूज के दोनों फ्लैटों के ओरिजिनल प्रॉपर्टी डॉक्यूमेट्स तुरंत वापस करे.



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