UPTET 2026 Result: 1 सवाल, 2 सही जवाब और खड़ा हुआ बखेड़ा, अब 148 अंकों पर फिर से बनेगा यूपीटीईटी रिजल्ट

UPTET 2026 Result: 1 सवाल, 2 सही जवाब और खड़ा हुआ बखेड़ा, अब 148 अंकों पर फिर से बनेगा यूपीटीईटी रिजल्ट


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UPTET 2026 Result: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपीटीईटी 2026 के दो विवादित प्रश्न हटा दिए हैं. अब 148 अंकों के आधार पर उत्तर प्रदेश पात्रता परीक्षा का नया रिवाइज्ड रिजल्ट जारी करने का आदेश दिया है. कम नंबरों से फेल हुए उम्मीदवारों के लिए यह बहुत राहत भरी खबर है.

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UPTET 2026 Result: यूपीटीईटी रिजल्ट अब 150 के बजाय 148 अंकों के हिसाब से बनाया जाएगा

नई दिल्ली (UPTET 2026 Result). उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा में शामिल हुए लाखों युवाओं के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट का नया फैसला किसी बड़े झटके से कम नहीं है. लेकिन जो उम्मीदवार कुछ अंकों से पास होने से चूक गए थे, उनके लिए यह बड़ी राहत बनकर आया है. सरकारी शिक्षक बनने का सपना देख रहे युवाओं के लिए यूपीटीईटी परीक्षा बेहद अहम होती है. ऐसे में परीक्षा के सिस्टम या सवालों में ही गड़बड़ी आ जाए तो अभ्यर्थियों का परेशान होना लाजिमी है.

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी टीईटी 2026 के मास्टर सेट के 2 विवादित सवालों (प्रश्न संख्या 36 और 37) को इवैल्युएशन प्रोसेस से बाहर करने का आदेश दे दिया है. इस मामले के केंद्र में दो ऐसे विवादित प्रश्न हैं, जिन्होंने परीक्षा की पूरी रूपरेखा पर ही सवालिया निशान खड़े कर दिए थे. अदालत के इस फैसले से यूपीटीईटी का रिजल्ट बदलने वाला है. साथ ही मूल्यांकन प्रणाली में ट्रांसपेरेंसी की अहमियत भी समझ में आ गई है. जानिए पूरा मामला और कोर्ट का आदेश.

UPTET 2026 विवाद क्या है?

उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने इस साल 3 जुलाई को प्राथमिक स्तर की UPTET परीक्षा कराई थी. इसका रिजल्ट 26 अगस्त को आया था. लेकिन सरकारी रिजल्ट जारी होते ही विवाद शुरू हो गया. यूपीटीईटी परीक्षा के मास्टर सेट के प्रश्न संख्या 36 और 37 पर अभ्यर्थियों ने आपत्ति जताई थी. उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की फाइनल आंसर की में इन दोनों सवालों के दो-दो विकल्प सही मान लिए गए थे. इससे परीक्षा की विश्वसनीयता पर आंच आई.

अभ्यर्थी कोर्ट क्यों पहुंचे थे?

उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने मार्किंग के दौरान केवल उन्हीं अभ्यर्थियों को अंक दिए, जिन्होंने उन दो सही माने गए विकल्पों में से कोई एक चुना था. जो अभ्यर्थी एक से ज्यादा विकल्प को लेकर कंफ्यूज हुए या जिन्होंने सवाल छोड़ दिया, उन्हें कोई फायदा नहीं मिला. नतीजा यह हुआ कि कई सामान्य और ओबीसी वर्ग के अभ्यर्थी पासिंग मार्क्स (82 अंक) से महज एक या डेढ़ नंबर से पीछे रह गए और फेल हो गए. न्याय की आस में विजय सोनकर और अन्य अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का रुख किया.

कोर्ट ने 148 अंकों पर रिजल्ट बनाने का आदेश क्यों दिया?

मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने बहुत तार्किक टिप्पणी की. कोर्ट ने माना कि अगर बहुविकल्पीय (Objective) परीक्षा में कोई चयन संस्था खुद एक सवाल के दो-दो उत्तर सही मान लेती है तो उस प्रश्न की उपयोगिता ही खत्म हो जाती है. ऐसा सवाल योग्य और अयोग्य छात्र में फर्क नहीं कर सकता. संविधान में दर्ज समानता के अधिकार को सुरक्षित रखने के लिए कोर्ट ने उन दोनों विवादित प्रश्नों को मूल्यांकन से बाहर करने का आदेश दिया.

यूपीटीईटी का नया रिजल्ट कैसे तैयार होगा?

हाईकोर्ट के निर्देश के मुताबिक, अब यूपीटीईटी का पूरा प्रश्नपत्र 150 की जगह 148 अंकों का माना जाएगा. इसी आधार पर पासिंग मार्क्स का प्रतिशत तय होगा. आयोग को आदेश दिया गया है कि वह सभी प्रभावित अभ्यर्थियों के अंकों की नए सिरे से कैलकुलेट करे और रिवाइज्ड स्कोरकार्ड जारी करे. हालांकि, कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया है कि यह पासिंग सर्टिफिकेट सिर्फ पात्रता (Eligibility) के लिए है. इससे किसी को सीधे तौर पर सरकारी नौकरी का अधिकार नहीं मिल जाएगा.



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