Choti Dudhi Plant Health Benefits: खेतों, बगीचों और खाली पड़ी जमीन पर आपने एक छोटा सा पौधा जरूर देखा होगा, जिसे अक्सर लोग खरपतवार समझकर हटा देते हैं. लेकिन यही छोटी दूधी आयुर्वेद में लंबे समय से अलग-अलग परेशानियों में इस्तेमाल होती रही है. इसके तने या पत्ते को तोड़ने पर सफेद रंग का दूध जैसा पदार्थ निकलता है, इसी वजह से इसे दूधी या दूधिया नाम से जाना जाता है.
आयुष चिकित्सा अधिकारी डॉ. मोहम्मद इकबाल के मुताबिक छोटी दूधी का इस्तेमाल पुराने समय से पेट और पाचन से जुड़ी परेशानियों में किया जाता रहा है. पारंपरिक तौर पर इसे दस्त, पेचिश, पेट में मरोड़ और कब्ज जैसी दिक्कतों में उपयोगी माना जाता है. कुछ मामलों में आंतों से जुड़ी परेशानी और संग्रहणी में भी इसका इस्तेमाल किया जाता रहा है. हालांकि इसे घरेलू नुस्खे के तौर पर इस्तेमाल करने से पहले पौधे की सही पहचान और मात्रा का ध्यान रखना जरूरी है.
पेट और पाचन की परेशानी में होता है इस्तेमाल
आयुष चिकित्सा अधिकारी के अनुसार छोटी दूधी का इस्तेमाल पेट से जुड़ी कई परेशानियों में पारंपरिक रूप से किया जाता रहा है. दस्त, पेचिश, पेट में मरोड़ और कब्ज जैसी समस्याओं में इसके इस्तेमाल का जिक्र मिलता है. कुछ मामलों में इसे आंतों से जुड़ी परेशानी और संग्रहणी में भी उपयोगी माना जाता है.
अगर कोई व्यक्ति इसे घरेलू नुस्खे के तौर पर इस्तेमाल करना चाहता है तो बिना जानकारी के सीधे इसका सेवन नहीं करना चाहिए. पौधे की सही पहचान और सही मात्रा बहुत जरूरी है. किसी जानकार या आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह से इसका इस्तेमाल करना बेहतर रहता है. सामान्य पेट की परेशानी में हल्का भोजन करना और शरीर में पानी की कमी न होने देना भी जरूरी है.
त्वचा के लिए भी किया जाता है इस्तेमाल
छोटी दूधी का इस्तेमाल सिर्फ पेट की परेशानी तक ही सीमित नहीं है. पारंपरिक तौर पर इसके दूध या लेप का इस्तेमाल मुंहासे, खुजली, दाद और चकत्ते जैसी त्वचा संबंधी परेशानियों में भी किया जाता रहा है. यानी खेतों और खाली जमीन पर आसानी से दिखने वाला यह छोटा पौधा पारंपरिक चिकित्सा में त्वचा से जुड़ी परेशानियों के लिए भी इस्तेमाल होता आया है. हालांकि किसी भी पौधे को सीधे त्वचा पर लगाने से पहले उसकी सही पहचान और इस्तेमाल का तरीका जानना जरूरी है. संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को खास सावधानी बरतनी चाहिए.
बालों के लिए भी माना जाता है उपयोगी
आयुर्वेदिक इस्तेमाल में छोटी दूधी के रस को कुछ दूसरे प्राकृतिक रसों के साथ मिलाकर सिर की त्वचा पर लगाने का जिक्र मिलता है. पारंपरिक तौर पर इसका इस्तेमाल बालों से जुड़ी परेशानियों और गंजेपन में भी किया जाता रहा है. हालांकि बाल झड़ने की वजह हर व्यक्ति में अलग हो सकती है. इसलिए छोटी दूधी को बाल झड़ने या गंजेपन का पक्का इलाज नहीं माना जा सकता. बालों से जुड़ी समस्या लगातार बनी हुई है तो डॉक्टर या विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है.
खांसी और कफ में भी होता है पारंपरिक इस्तेमाल
छोटी दूधी का इस्तेमाल खांसी, कफ और सांस से जुड़ी परेशानियों में भी पारंपरिक चिकित्सा में किया जाता रहा है. कुछ आयुर्वेदिक जानकार इसे दमा जैसी परेशानी में भी उपयोगी बताते हैं. हालांकि सांस से जुड़ी बीमारी गंभीर हो सकती है, इसलिए ऐसी स्थिति में केवल घरेलू नुस्खे पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है.
इस्तेमाल से पहले इन बातों का रखें ध्यान
छोटी दूधी प्राकृतिक पौधा जरूर है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इसे बिना जानकारी के सीधे खा लिया जाए या त्वचा पर लगा लिया जाए. सबसे पहले पौधे की सही पहचान होना जरूरी है. इसकी मात्रा और इस्तेमाल का तरीका भी परेशानी और व्यक्ति की स्थिति के हिसाब से अलग हो सकता है. खासकर गर्भवती महिलाओं, बच्चों और किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों को इसका इस्तेमाल डॉक्टर या आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए.