गेहूं की खेती में होगी खाद की बंपर बचत, भागलपुर के कृषि वैज्ञानिकों ने खोजा खर्च बचाने का तरीका, जानें कैसे

गेहूं की खेती में होगी खाद की बंपर बचत, भागलपुर के कृषि वैज्ञानिकों ने खोजा खर्च बचाने का तरीका, जानें कैसे


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खुशखबरी! गेहूं में 120% नहीं, सिर्फ 55% नाइट्रोजन से मिलेगी बंपर पैदावार

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बिहार कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने रिसर्च कर किसानों को नाइट्रोजन खाद का उपयोग कम करने की सलाह दी है. वैज्ञानिक श्रुति सुमन ने बताया कि गेहूं और धान में केवल पचास से पचपन प्रतिशत नाइट्रोजन की आवश्यकता होती है. जबकि किसान इससे अधिक खाद डाल देते हैं.

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भागलपुर: कृषि के क्षेत्र में बदलाव देखने को हमेशा मिलता रहता है. खासकर अगर बिहार कृषि विश्वविद्यालय की बात कर लें, तो यहां पर रिसर्च के माध्यम से कृषि को और आसान और कम खर्चीला बनाने की तरफ कार्य चलता रहता है. चाहे यंत्रीकरण की बात कर लें, खाद की बात कर लें, बीज की बात कर लें या अन्य अलग-अलग चीजों की बात कर लें. कृषि विश्वविद्यालय लगातार रिसर्च करता रहता है. ऐसे में किसान के खाद के खर्च को कम करने के लिए वैज्ञानिकों द्वारा रिसर्च कर परिणाम लाया गया है, जिससे खेतों में डालने वाले नाइट्रोजन के प्रतिशत को कम किया जाएगा.

जानें कैसे होगा खाद का कॉस्ट कम

इसको लेकर कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक श्रुति सुमन से बात की गई तो उन्होंने बताया कि किसान अपने खेतों में बेतहाशा नाइट्रोजन का प्रयोग करते हैं. यूं कहें तो जिस समय उसकी जरूरत नही हो, उस समय भी छिड़काव कर दिया जाता है और उसकी मात्रा अत्यधिक होती है. हम लोग जब कृषि पर कम कर रहे थे, तभी यह आइडिया आया और उस पर काम शुरू किया, तब जाकर पता चला की नाइट्रोजन की जो जरूरत होती है.

किसान बिना जांच किए न डालें खाद

अगर हम गेहूं और धान की बात कर लें, तो अधिकतम 50 से 55% तक में काम हो जाता है, लेकिन किसान बिना जांच किए ही उसमें 120 परसेंट तक का छिड़काव करते हैं, लेकिन रिसर्च के अनुसार इसकी आवश्यकता नहीं होती है. यानी कि अगर आप इसको 55% भी डालें तो आपके गेहूं की उपज उतनी ही होगी, जितना आप 120 परसेंट डाल कर ले रहे हैं. अगर आधे खाद की बचत होती है और किसानों का उपज उतना ही रहता है तो कम लागत में अत्यधिक मुनाफा किसान कमा सकते हैं. इसी उद्देश्य के साथ इस पर रिसर्च किया और सफलता भी हाथ लगी.

उन्होंने बताया कि अभी मक्का के खेतों पर रिसर्च चल रही है. संभवत मक्का हाई न्यूट्रिशन वाला खेती होती है. या यूं कहे तो उसके पौधे को अत्यधिक खाद की आवश्यकता पड़ती है. इस वर्ष तक यह भी रिसर्च सामने आ जाएगा कि आप मक्का के खेत में कितनी खाद डाल सकते हैं. ऐसे में किसानों को बिना जांच किए खाद नहीं डलवाना चाहिए. क्योंकि इससे दो चीज होती है, आपका लागत तो बढ़ता है. यह इसके साथ-साथ खेतों की उर्वरता धीरे-धीरे खत्म होती जाती है. इसलिए सही समय पर सही मात्रा में खाद डालें, तो आपकी खेती आसान हो जाएगी. सेंसर के माध्यम से इसको पता लगाया जाता है. अभी इसको खाद कीआवश्यकता है या नहीं उसके पत्ती से जांच की जाती है.



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