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जब भी आसमान से मूसलाधार बारिश बरसती है और नदियां उफनकर बस्तियों में घुस आती हैं, तो चारों तरफ सिर्फ तबाही और बर्बादी का ही मंजर दिखाई देता है. इंसानों के लिए तो ये किसी बुरे सपने जैसा होता है, लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि उन बेजुबान और छोटे-छोटे जीव-जंतुओं पर क्या गुजरती होगी, जिनका आशियाना पानी में डूब जाता है? प्रकृति की इस भयंकर मार के बीच ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया प्रांत और पाकिस्तान के सिंध इलाके में एक ऐसा हैरान करने वाला चमत्कार देखने को मिला, जिसे देखकर दुनिया भर के वैज्ञानिक भी दंग रह गए. बाढ़ का पानी उतरते ही मीलों लंबे खेत, वीरान सड़कें और हरे-भरे पेड़ अचानक किसी जादुई सफेद चीज से ढक गए.
‘बैलूनिंग’ तकनीक: अक्सर घरों के कोनों में या बगीचे की झाड़ियों में मकड़ियों को शांति से जाला बनाते देखते हैं, लेकिन जब जमीन पर अचानक बाढ़ का पानी भर जाता है, तो उनके पास भागने या संभलने का वक्त नहीं होता. संकट के समय जमीन के अंदर और घास में रहने वाली करोड़ों मकड़ियां ‘बैलूनिंग’ से जान बचाती हैं. जमीन से खुद को ऊपर उठाने के लिए इन मकड़ियों ने अपने शरीर से बेहद महीन रेशमी धागे हवा में छोड़े. हवा के झोंके ने इन धागों को पकड़कर एक पैराशूट जैसा रूप दे दिया और इन हवा में तैरते धागों के सहारे मकड़ियां उड़कर आसपास के ऊंचे पेड़ों और सुरक्षित जगहों पर जा पहुंचीं. (AI कॉन्सेप्ट इमेज)
ऑस्ट्रेलिया का गिप्सलैंड: इस अद्भुत घटना का सबसे भव्य नजारा ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया राज्य में स्थित गिप्सलैंड इलाके में देखने को मिला था, जहां मूसलाधार बारिश और भयंकर तूफान के बाद भयंकर बाढ़ आ गई थी. पानी का स्तर इतनी तेजी से बढ़ा कि सेल और लॉन्गफोर्ड के बीच का पूरा इलाका झील बन गया. जब पानी उतरा, तो जान बचाकर भागीं लाखों मकड़ियों ने मिलकर सड़क के किनारे-किनारे 1 किलोमीटर से भी लंबी रेशमी चादर तान दी थी. स्थानीय लोगों ने अपनी पूरी जिंदगी में कभी इतने बड़े पैमाने पर मकड़ियों के जाले नहीं देखे थे. गाड़ियों के आने-जाने वाले रास्तों के किनारे खड़े पेड़ और फेंसिंग ऐसे लग रहे थे मानो किसी ने उन पर बेहद महंगी और सफेद मलमल की मखमली चादर लपेट दी हो. (AI कॉन्सेप्ट इमेज)
कुदरती चमत्कार : गिप्सलैंड की स्थानीय पार्षद कैरोलिन क्रॉसली ने जब इस हैरान करने वाले दृश्य को अपनी आंखों से देखा, तो वह अवाक रह गईं. उन्होंने बताया कि बाढ़ के नुकसान का जायजा लेने जब वो झील के पास पहुंचीं, तो वो डरावना नजारा किसी जादुई कलाकृति में बदल चुका था. ढलते सूरज की सुनहरी और धीमी रोशनी जब इस विशालकाय रेशमी लहर पर पड़ी, तो हवा के साथ लहराता हुआ ये जाल ऐसा लग रहा था मानो किसी ने बहुत बड़ा लैंडस्केप आर्ट इंस्टालेशन तैयार कर दिया हो. (AI कॉन्सेप्ट इमेज)
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पाकिस्तान : सिंध प्रांत में आई विनाशकारी बाढ़ के दौरान लुइसियाना राज्य जितने बड़े इलाके में जब बाढ़ का पानी फैला, तो करीब 10,000 लोगों को अपना घर-बार छोड़कर सुरक्षित जगह जाना पड़ा था. इंसानों के उस वीरान छोड़े गए इलाके में जैसे ही पानी ने पैर पीछे खींचे, लाखों मकड़ियों ने अपनी जान बचाने के लिए पेड़ों को ही अपना परमानेंट आशियाना बना लिया. अंतरराष्ट्रीय फोटोग्राफर रसेल वाटकिंस जब वहां राहत कार्यों की तस्वीरें लेने पहुंचे, तो उन्होंने पाया कि इलाके का हर एक पेड़ और उसकी एक-एक टहनी मकड़ियों के घने जालों से पूरी तरह ढक चुकी थी. (AI कॉन्सेप्ट इमेज)
इंसानों के लिए कैसे बना वरदान : पाकिस्तान के इन बाढ़ प्रभावित इलाकों में पेड़ों पर बने इन विशालकाय जालों का एक बहुत बड़ा और चमत्कारी फायदा स्थानीय गरीब इंसानों को मिला. बाढ़ के बाद रुके हुए गंदे और सड़े हुए पानी में अक्सर मच्छरों की संख्या बेकाबू हो जाती है, जिससे मलेरिया और डेंगू जैसी जानलेवा बीमारियां महामारी का रूप ले लेती हैं. लेकिन इन लाखों मकड़ियों और उनके अनगिनत जालों ने वहां एक प्राकृतिक ‘मॉस्किटो नेट’ का काम किया. बाढ़ के रुके पानी से पैदा होने वाले अनगिनत बीमारी फैलाने वाले मच्छर जैसे ही उड़े, वो इन चिपचिपे जालों में फंसकर मकड़ियों का शिकार बन गए. नतीजतन, उन इलाकों में मलेरिया का खतरा चमत्कारिक रूप से बहुत कम हो गया. (AI कॉन्सेप्ट इमेज)
पेड़ों पर पड़ा भारी साइड इफेक्ट: ‘बैलूनिंग’ तकनीक ने इंसानों को मलेरिया से तो बचा लिया, लेकिन इसका एक बहुत ही डरावना पहलू भी सामने आया. पाकिस्तान के सिंध प्रांत में बाढ़ का पानी पूरी तरह सूखने में हफ्तों और महीनों का समय लग गया, जिसके चलते मकड़ियां लंबे समय तक उन्हीं पेड़ों पर डेरा जमाए बैठी रहीं. पेड़ों की पत्तियों और टहनियों पर लगातार रेशमी जालों की इतनी मोटी और एयर-टाइट परत जमी रही कि सूरज की धूप और ताजी हवा सीधे पत्तों तक पहुंच ही नहीं पाई. ऑक्सीजन की भारी कमी के कारण ये खूबसूरत दिखने वाले जाले उन पेड़ों के लिए ‘फांसी का फंदा’ बन गए, जिससे कई बड़े पेड़ अंदर ही अंदर घुटकर हमेशा के लिए सूख गए. (AI कॉन्सेप्ट इमेज)
ये अनोखा नजारा इस बात का सबूत है कि कुदरत के पास हर बड़ी से बड़ी मुसीबत का अपना एक अनूठा और हैरान करने वाला हल होता है. ऑस्ट्रेलिया और पाकिस्तान दोनों ही जगहों पर जब भारी बारिश और बाढ़ ने सब कुछ तबाह कर दिया था, तब इस कुदरती चमत्कार ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया. हालांकि ये नाजुक रेशमी जाल कुछ ही दिनों में तेज धूप और हवा के थपेड़ों से बिखरकर गायब हो जाता है, लेकिन ये इस बात की सबसे बड़ी मिसाल है कि प्रकृति के सबसे छोटे जीव भी महाआपदा के वक्त हार नहीं मानते और अपनी बिरादरी के साथ मिलकर अस्तित्व की लड़ाई लड़ते हैं. (AI कॉन्सेप्ट इमेज)