नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ मेले की हुई शुरुआत, आखिर 21 महीने का क्यों होगा कुंभ और अमृत स्नान की तिथियां जानें

नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ मेले की हुई शुरुआत, आखिर 21 महीने का क्यों होगा कुंभ और अमृत स्नान की तिथियां जानें


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नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ मेले की हुई शुरुआत, 21 महीने का क्यों है कुंभ

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Nashik Trimbakeshwar Simhastha Kumbh Mela: नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ मेला आज से आधिकारिक तौर पर शुरू हो गया है. धार्मिक आस्था के इस महाकुंभ को लेकर श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है. इस बार कुंभ मेला 21 महीने का लंबा क्यों है और इसके तहत होने वाले अमृत स्नान की प्रमुख तिथियां कौन-सी हैं, आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं. इस पावन अवसर पर देश-विदेश से साधु-संतों और श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है.

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Nashik Trimbakeshwar Simhastha Kumbh Mela: महाराष्ट्र के 2 धार्मिक शहरों नाशिक और त्र्यंबकेश्वर में शनिवार को कुंभ मेले का ध्वजारोहण किया गया और इसी के साथ सिंहस्थ कुंभ मेले की शुरुआत हो गई है. नासिक में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने तो त्र्यंबकेश्वर के कुशावर्त तीर्थ में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस कुंभ ध्वजारोहण किया. दोनों स्थानों पर एक ही समय में दोपहर 12 बजकर 2 मिनट पर ध्वजारोहण किया गया. खास बात यह है कि कुंभपर्व के इतिहास में पहली बार किसी महिला राष्ट्रपति के हाथों ध्वजारोहण होने जा रहा है. यह पूरे महाराष्ट्र के लिए गर्व और आनंद का क्षण है. इस ऐतिहासिक अवसर को लेकर सभी में उत्साह का माहौल है.

कुंभ मेले का धार्मिक महत्व
भारत में कुंभ मेले का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है. देश के चार प्रमुख तीर्थस्थलों प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक-त्र्यंबकेश्वर में कुंभ मेले का आयोजन विशेष ज्योतिषीय संयोगों के आधार पर किया जाता है. इस बार महाराष्ट्र के नासिक और त्र्यंबकेश्वर में सिंहस्थ कुंभ मेले की शुरुआत 31 अक्टूबर से ध्वजारोहण के बाद से हो चुकी है. इसकी विशेष बात यह है कि यह मेला जुलाई 2028 तक चलेगा. यानी श्रद्धालुओं को करीब 21 महीने तक इस धार्मिक आयोजन का हिस्सा बनने का अवसर मिलेगा.

नासिक के कुंभ को क्यों कहते हैं सिंहस्थ कुंभ?
नासिक के कुंभ मेले को सिंहस्थ कुंभ कहने के पीछे ज्योतिषीय मान्यता है. दरअसल, जब देवगुरु बृहस्पति यानी गुरु ग्रह सिंह राशि में प्रवेश करते हैं, तब नासिक-त्र्यंबकेश्वर में कुंभ का विशेष योग बनता है. सिंह राशि में गुरु के विराजमान होने के कारण इसे सिंहस्थ कुंभ कहा जाता है. हिंदू मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान गोदावरी नदी में स्नान करना बेहद पुण्यदायी माना जाता है.

त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग और कुंभ मेला
महाराष्ट्र के नासिक जिले में स्थित त्र्यंबकेश्वर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, गोदावरी नदी का उद्गम ब्रह्मगिरि पर्वत क्षेत्र से होता है, जो त्र्यंबकेश्वर के पास स्थित है. इसी वजह से इस स्थान का कुंभ मेले में विशेष महत्व है. नासिक में रामकुंड और त्र्यंबकेश्वर में कुशावर्त तीर्थ प्रमुख स्नान स्थल हैं. यहां वैष्णव और शैव अखाड़ों के स्नान की अलग-अलग परंपराएं भी हैं.

21 महीने तक सिंहस्थ कुंभ मेला
इस बार सिंहस्थ कुंभ मेले की अवधि करीब 21 महीने निर्धारित की गई है. इसकी शुरुआत 31 अक्टूबर 2026 को नासिक के रामकुंड और त्र्यंबकेश्वर के कुशावर्त तीर्थ में ध्वजारोहण के साथ हो चुकी है. वहीं इसका समापन जुलाई 2028 में होगा. निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, 24 जुलाई 2028 को त्र्यंबकेश्वर और 29 जुलाई 2028 को नासिक में समापन से जुड़े ध्वजावतरण होंगे. इस लंबी अवधि के पीछे धार्मिक परंपराएं, ज्योतिषीय मान्यताएं और अलग-अलग धार्मिक आयोजनों का कैलेंडर है.

कुंभ मेले में स्नान का महत्व
हिंदू धर्म में कुंभ मेले के दौरान पवित्र नदियों में स्नान करना बेहद पुण्यदायी माना गया है. धार्मिक मान्यता है कि शुभ मुहूर्त में गोदावरी नदी में स्नान करने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है और उसे आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है. इस दौरान साधु-संत, नागा साधु और विभिन्न अखाड़ों के महंत भी शाही स्नान यानी अमृत स्नान करते हैं. इस बार प्रमुख अमृत स्नान 2 अगस्त, 31 अगस्त और 11-12 सितंबर 2027 को निर्धारित हैं.

नासिक कुंभ मेला 2027: पूरा शेड्यूल
ध्वजारोहण: 31 अक्टूबर 2026
नगर प्रदक्षिणा: 29 जुलाई 2027
पहला अमृत स्नान: 2 अगस्त 2027
दूसरा अमृत स्नान: 31 अगस्त 2027
तीसरा अमृत स्नान (नासिक): 11 सितंबर 2027
तीसरा अमृत स्नान (त्र्यंबकेश्वर): 12 सितंबर 2027
समापन समारोह: 24 जुलाई 2028



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